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परिजन बहवास, बिलखती रही मां, हर आंख हुई नम

मां का करुण क्रंदन देखकर मौजूद परिजन भी फफक कर रो पड़े 
ट्रामा सेंटर में मौजूद हर सख्श की आंख नजर आई नम 
मटौंध थाना क्षेत्र के बजरंग पुरवा में दो बच्चों के शव मिलने का मामला 

बांदा, कृपाशंकर दुबे । बजरंग पुरवा में रहने वाले श्रीकृष्णचंद्र के एक पुत्र और दो पुत्रियां थीं। एक पुत्री श्रृष्टि तीन वर्ष की थी जबकि उसका बेटा आदर्श तकरीबन डेढ़ वर्ष का था। जुलाई महीने में श्रीकृष्णचंद्र को एक पुत्री रत्न की और प्राप्ति हुई। गुरुवार को इन बच्चों की मां मंजू यादव अपने घर में छोटी बेटी की तेल मालिश कर रही थी और आदर्श व उसकी बड़ी बहन श्रृष्टि आंगन में ही खेल रही थीं। आंगन के एक हिस्से में ही भूसे का ढेर पड़ा हुआ था और उस भूसे के ढेर को बारिश से बचाने के लिए घरवालों ने ढेर पर काली रंग की पालीथिन डाल दी
ट्रामा सेंटर के बाहर परिजनों से बात करते सीओ सिटी आलोक मिश्रा
थी। इसके साथ ही पालीथिन उड़ न जाए, इसके लिए चारो ओर लकड़ी भी रख दी गई थी। गुरुवार की दोपहर को तकरीबन एक बजे श्रृष्टि और आदर्श खेल-खेल में भूसे के ढेर के बीचोबीच पहुंच गए। भूसा धंसक गया और इसी के साथ ही दोनो मासूम भाई बहन भी धंसकते हुए भूसे के अंदर पहुंच गए। ऊपर पड़ी पालीथिन भी नीचे चली गई और लकड़ी के कई टुकड़े भी उनके ऊपर पहुंच गए। मां मंजू ने इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। भूसे में ही दब जाने के कारण श्रृष्टि और आदर्श की दम घुटने से मौके पर ही मौत हो गई। इधर, जब काफी देर तक बच्चे नहीं नजर आए तो मां मंजू ने खोजबीन की। न मिलने पर शोर मचाया, परिजनों ने भी खोजबीन की। बाद में पुलिस ने भूसे के ढेर से ही शव बरामद किए। कुछ घंटे पहले तक हंस-खेल रहे बच्चों का शव मां मंजू ने देखा तो बदहवास हो गई। परिजनों में कोहराम मच गया। आनन-फानन पुलिस ने दोनो बच्चों को ट्रामा सेंटर लाई, जब वहां पर बच्चों को मृत घोषित कर दिया गया तो परिजनों की आस टूट गई। इसके बाद शुरू हुआ करुण क्रंदन का सिलसिला। तिपहिया आटो वाहन में बैठी मां मंजू बदहवास हालत में थी। होश में आते ही वह सिर्फ इतना ही पूछती थी कि मेरे बच्चे कहां हैं। साथ में मौजूद परिजन बच्चों के जीवित होने का दिलासा देते हुए बार-बार उसे चुप कराते रहे। 

मेरा सब कुछ लुट गया: श्रीकृष्ण चंद्र 
बांदा। अपने मासूम बच्चों के बेजान जिस्म देखकर किस बाप का कलेजा नहीं कांपेगा, श्रीकृष्णचंद्र ने जब अपने
ट्रामा सेंटर में आटो वाहन में बैठी बदहवास मां को पकड़े महिलाएं
बच्चों को बेजान जिस्म देखे तो एकबारगी उनसे लिपट गया और दहाड़े मारकर रो पड़ा। मौके पर मौजूद सभी लोग रो पड़े। पिता श्रीकृष्णचंद्र ने कहा कि उसके बच्चे ही उसका सब कुछ थे। पिता ने बिलखते हुए कहा कि उसका तो सब कुछ लुट गया। 

हत्या से परिजनों ने किया साफ इनकार 
बांदा। दो मासूम बच्चों के शव मिल जाने के बाद तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। मां मंजू के साथ मौजूद रही
अब सात माह की मासूम बेटी ही बची
महिलाओं ने कहा कि किसी ने दोनो बच्चों को बेहोश करने के बाद शव भूसे के ढेर में दबाकर ऊपर से लकड़ी डाल दी। इसके अलावा तरह-तरह की बातें होती रहीं। ट्रामा सेंटर में मौजूद रहे मृतकों के चाचा ने कहा कि उनके बच्चों की किसी ने हत्या नहीं की गई है। खेलते-खेलते बच्चे भूसे के ढेर में गिर गए और दम घुटने से उनकी मौत हो गई। 
 
किसी निर्दोष को नहीं फंसाएंगे 
बांदा। खबर हत्या की वायरल हुई। पुलिस प्रशसान में हड़कंप मच गया। हरकत में आई पुलिस ने आनन-फानन
बिलख रहे बदवास परिजनों को उठाते लोग
में शव बरामद किया और ट्रामा सेंटर लाने के बाद मृतक के परिजनों ने कहा कि वह किसी निर्दोष को नहीं फंसाएंगे। भगवान ने वैसे भी उनके साथ यह सितम किया है। इसके बाद हम किसी पर कोई सितम नहीं करना चाहते। 

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