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प्रभारी बीएसए पटेल भी चले निलंबित बीएसए शाह की राह

शिक्षक संगठन ने भेंट कर नियम विरुद्ध कार्यों का किया विरोध
व्यवस्थायें न बदली तो करेंगे तीखा विरोध
उरई (जालौन), अजय मिश्रा । जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार के विरुद्ध शिक्षक नेता द्वारा सोशल मीडिया पर मंतव्य लिखा तो कार्यालय में हड़कंप मच गया और फिर आनन-फानन में सच्चाई की आवाज दबाने के लिये प्रभारी बीएसए भगवत पटेल से उक्त शिक्षक नेता को स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने अन्यथा कार्यवाही करने हेतु कहा गया। इससे जनपद के शिक्षकों में उबाल आ गया और उन्होंने शुक्रवार को प्रभारी बीएसए से भेंट कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराते हुये स्पष्ट किया कि नियम विरुद्ध कार्य करने की परंपरा को अब जनपद में किसी भी कीमत पर शिक्षक समाज बर्दाश्त नहीं करेगा। इस बीच बीएसए दफ्तर के लिपिक आपस में बात करते दिखे कि अब प्रभारी बीएसए पटेल भी चले निलंबित बीएसए की राह।

प्रभारी बीएसए को ज्ञापन सौंपते शिक्षक संगठन पदाधिकारी।
प्रभारी बीएसए से मिलने पहुंचे शिक्षक संगठन के पदाधिकारियों से उन्होंने कहा कि मीडिया में लिखने से पूर्व मुझसे बात करनी थी। तो शिक्षक आग बबूला हो गये और उन्होंने कहा कि आप डायट प्राचार्य के पद का प्रभार संभाल रहे और आपने पांचों विषयों का एक ही पेपर बनाकर एआरपी की परीक्षा संपादित करायी जबकि पांचों विषयों की अलग-अलग परीक्षा संपादित करानी थी और चयनित अभ्यर्थियों को उनके द्वारा विकल्प के आधार/साक्षात्कार द्वारा विकासखंड आवंटित होना चाहिये था जो किये बाद में विकासखंड बदलना प्रारंभ कर दिया। वहीं आपके प्रभारी रहते परिषदीय विद्यालयों में संपन्न परीक्षा अस्त व्यस्त तरीके से संपादित करायी गयी अतना ही नहीं बगैर टेण्डर कुटेशन के परीक्षा के प्रश्नपत्रों की छपाई भी करायी गयी और उसका भुगतान भी आनन-फानन में करवा दिया गया। जबकि परीक्षा पुस्तिका हेतु भेजी जाने वाली धनराशि का बजट वापस हो गया जो विद्यालयों को प्राप्त नहीं हुआ। जनपद में स्वेटर वितरण की स्थिति पर बताया कि किसी स्वेटर का एक हाथ गायब है कोई छोटा हैं तो कोई बड़ा है। ऐसे स्वेटरों का वितरण कराया जा रहा है। शिक्षक नेताओं ने इस पर आश्चर्य व्यक्त किया कि बाल क्रीड़ा प्रतियोगिता में डिग्री कालेजों के छात्रों को शामिल कराया गया जो कि इतिहास में पहली बार ऐसा कृत्य किया गया। जबकि बाल क्रीड़ा प्रतियोगिता विकास खंडों पर हुई ही नहीं और जिला स्तर पर संपन्न करवा दी गयी। पिछले वर्ष की स्वेटर खरीद हेतु शासन से आयी धनराशि भी वापस हो गयी और उसका  भुगतान अभी तक लंबित है। प्रभारी बीएसए भगवत पटेल से भेंट वार्ता के दौरान शिक्षकों में इस बात को लेकर सबसे ज्यादा आक्रोश था कि बाल्यकाल देखभाल अवकाश किसी का एक माह का किसी का दो माह का ही स्वीकार किया तो किसी का बगैर किसी कारण बताये अस्वीकृत करना भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है। इस पर तीखा विरोध प्रकट किया। इस दौरान शिक्षकों ने यह भी कहा कि विभाग आपका इतना सहयोग करता है कि आप माध्यमिक के विद्यालय संचालन हेतु प्राथमिक शिक्षकों को लगाये हुये हो और प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता देखते ही मंगरौल में शिक्षण कार्य होता फाउण्डेशन कोर्स कराना है। जबकि माध्यमिक शिक्षा में मानदेय पर शिक्षकों को रखने की पूरी व्यवस्था की गयी है और किन्हीं-किन्हीं विद्यालयों में मानदेय पर शिक्षक कार्य भी कर रहे हैं। शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल में रामराजा द्विवेदी, जिला मंत्री संजय दुबे, नरेश निरंजन, युद्धवीर कंथरिया, विद्यासागर मिश्रा, लालजी पाठक, राजेश शुक्ला, देवेंद्र यादव, मनीष गुप्ता, अनुराग मिश्रा, शैलेंद्र नायक, अरविंद श्रीवास्तव, देवेंद्र द्विवेदी, शिवशंकर सोनी, मनीष समाधिया, राहुल दीवौलिया, ब्लाक अध्यक्ष डकोर बृजेंद्र राजपूत, हिमांशु समाधिया, महेबा ब्लाक अध्यक्ष योगेंद्र सिंह जादौन, रामपुरा अध्यक्ष राममोहन वाजपेयी, अमित गुप्ता, राजीव थापक, राघवेंद्र सिंह निरंजन, विभा गुप्ता, प्रियंका शर्मा, साधना त्रिपाठी, विकास त्रिपाठी, ओमनारायण दीक्षित, उदय राजपूत, बृजेंद्र दूरवार, कदौरा अध्यक्ष महेंद्र वर्मा सहित सैकड़ों शिक्षक उपस्थित रहे।


नियम विरुद्ध कार्यों का लेखाजोखा

1. एआरपी चयन में शासनादेश के विपरीत कार्य होना।
2. बाल्यकाल देखभाल अवकाश।
3. बगैर टेण्डर कुटेशन के परीक्षा प्रश्नपत्र की छपाई।
4. परीक्षा पुस्तिका भुगतान हेतु धनराशि प्रेषण न कर धन वापिसी।
5. बाल क्रीड़ा प्रतियोगिता के साथ डिग्री कालेजों की प्रतियोगिता।
6. एआरपी के विकास खंड परिवर्तन करना।
7. जनपद में जूनियर के विद्यालयों को स्वेटर न उपलब्ध कराना।

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