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राज्य स्तरीय पुरस्कार के बाद अब एनक्वास की तैयारी

प्रदेश में दूसरा स्थान मिलने पर चिकित्सा अधीक्षक और कायाकल्प परामर्शदाता हुए सम्मानित

उरई (जालौन), अजय मिश्रा । नदीगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) को राज्य स्तरीय कायाकल्प अवार्ड योजना में प्रदेश में दूसरा स्थान मिला है। इसके लिए नदीगांव सीएचसी के चिकित्सा अधीक्षक डा. देवेंद्र भिटौरिया और कायाकल्प के जनपदीय परामर्शदाता डा. अरुण कुमार राजपूत को लखनऊ में सम्मानित किया गया। सम्मान से खुश चिकित्सकों का कहना है कि अब केंद्र एनक्वास  पुरस्कार भी जीतेगा।
बता दें कि कायाकल्प अवार्ड योजना के तहत वर्ष 2018- 2019 में नदीगांव सीएचसी को त्रिस्तरीय परीक्षण के बाद प्रदेश में दूसरा स्थान मिला है। इसके लिए सीएचसी को शासन की ओर से सात लाख रुपये की धनराशि से पुरस्कृत किया गया था। इस धनराशि में 75 प्रतिशत धनराशि अस्पताल के रखरखाव और सुविधाओं की बढ़ोतरी
के लिए दी गई थी, जबकि 25 प्रतिशत धनराशि अस्पताल के स्टाफ को पुरस्कार स्वरुप दी गई थी। कायाकल्प
योजना में दूसरा स्थान पाने पर 16 जनवरी को लखनऊ के योजना भवन में सीएचसी प्रभारी डा. देवेंद्र भिटौरिया और जनपदीय कायाकल्प परामर्शदाता डा. अरुण कुमार को मिशन निदेशक विजय विश्वास पंत की मौजूदगी में अधिकारियों ने प्रमाणपत्र और शील्ड देकर सम्मानित किया। कायाकल्प जनपदीय परामर्शदाता डा. अरुण कुमार ने बताया कि कायाकल्प अवार्ड के लिए तीन चरणों में तैयारी होती है। पहले चरण में आंतरिक सर्वेक्षण में 70 फीसदी से अधिक अंक मिलने पर अस्पताल को दूसरे चरण यानी मंडल स्तरीय असेस्मेंट के लिए चुन लिया जाता है। इसमें भी 70 फीसदी से ज्यादा अंक मिलने पर बाहरी टीम द्वारा असेस्मेंट होता है, वहां से भी सफलता मिलने पर पुरस्कार के लिए नामांकित किया जाता है। नदीगांव को राज्य में दूसरा स्थान मिला था। उन्होंने बताया कि अब नेशनल स्तरीय पुरस्कार (एनक्वास) की तैयारी चल रही है। इस महीने के अंत तक एनक्वास की टीम आने की संभावना है।

नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड (एनक्यूएएस) 

स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता को बढ़ाने और उसे सस्टेन करने के लिए स्वास्थ्य केन्द्रों को एनक्यूएएस से सर्टिफाइ किया जाता है। यह राष्ट्रीय स्तर का सर्टिफिकेशन होता है जिसमें प्रत्येक विभाग को 70 प्रतिशत अंक लाना जरूरी होता है। इसमें 8 बिन्दुओं को विशेष रूप से देखा जाता है। चिकित्सालय में उपलब्ध सेवाएं, मरीजों के अधिकार, चिकित्सालय में उपलब्ध वार्ड एवं उपकरण सामाग्री की उपलब्धता, चिकित्सालय में उपलब्ध उपकरण व मशीनों का रखरखाव एवं उपयोग, चिकित्सालय में दिये जाने वाले उपचार की गुणवत्ता, संक्रामण नियंत्रण, क्वालिटी मैनेजमेंट, मासिक उपलब्धियों का मूल्यांकन।

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