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Wednesday, January 22, 2020

योगी राज में किसी भी थाना व चौकी में नहीं अल्पसंख्यक प्रभारी

अल्पसंख्यक इंचार्जी के नहीं काबिल या फिर अफसर कर रहे पक्षपात
सबका साथ सबका विकास का सरकार का नारा बेमायने
सपा-बसपा की तर्ज पर भाजपा शासन में भी जातिवाद हावी

फतेहपुर, शमशाद खान । सूबे में बहुजन समाज पार्टी की सरकार रही हो या समाजवादी पार्टी की उस पर जातिवाद की राजनीति करने का आरोप लगाने वाली भारतीय जनता पार्टी पर भी जातिवाद करने का आरोप लगने लगा है। जनपद के 21 थाना क्षेत्रों व उनके तहत आने वाली सभी चैकियों में एक भी अल्पसंख्यक समाज का प्रभारी नियुक्ति न होना कम से कम सरकार के सबका साथ सबका विकास का नारे को बेमायने साबित कर रहा है। जनपद की पांच सर्किलों सदर, खागा, जाफरगंज, बिंदकी, थरियांव में महिला थाना समेत 18 थानें व तीन कोतवाली आती हैं। जिसमे कोतवाली क्षेत्र के तहत मुराइनटोला, आबूनगर, कचेहरी, बाकरगंज, हरिहरगंज, कारगार, हुसैनगंज के अंतर्गत आसनी भिटौरा, मलवां के तहत सहेली, औद्योगिक, गाजीपुर में शाह, ललौली में बहुआ व दतौली, चांदपुर में अमौली व दपसौरा, थरियांव थाना क्षेत्र के तहत हसवा, हथगांव में छिवलहा, असोथर में सरकंडी, जरौली, बिंदकी थाना क्षेत्र के तहत आने वाली चार चैकियां कस्बा खजुआ, जोनिहां-सरकंडी,
जहानाबाद के तहत कस्बा चैकी, कल्याणपुर में चैडगरा, जाफरगंज में मुसाफा व देवमई, खागा कोतवाली के तहत आने वाली चार चैकियां कस्बा महिचा मन्दिर, मंझिलगांव, सतनरेनी, खखरेरू थाना में परवेजपुर व शिवपुरी, किशनपुर में विजयीपुर मड़़ौली व किशनपुर है। इन थानों व चैकियों में जहां ब्राह्मण व क्षत्रियों का वर्चस्व है तो अन्य समाज के अफसर भी इंचार्ज के रूप में आंकड़े की पूर्ति करते हुए दिखाई देते है लेकिन किसी भी थाने व चैकियों में अल्पसंख्यक समाज के किसी भी अधिकारी की नियुक्ति प्रभारी के रूप में न होना कही न कही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सीएम योगी आदित्यनाथ समेत भारतीय जनता पार्टी के सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास के नारे को बेमायने साबित कर रहे है। प्रदेश की सरकार व डीजीपी समेत बड़े अफसर सरकार की मंशा के अनुरूप कार्य करने को प्रमुखता देते है लेकिन सूबे की बड़ी आबादी एवं जनपद में अच्छी खासी तादात रखने वाले अल्पसंख्यक समाज के किसी भी सब इंस्पेक्टर को भी प्रभारी पद पर नियुक्ति न मिलना बड़ा सवाल है। अल्पसंख्यक समुदाय के अफसरों को शायद इंचार्जी की योग्यताओं के मापदंड पर खरा न उतरना है या फिर कोई और मंशा यह तो अफसर ही जाने। समाजवादी पार्टी व बहुजन समाज पार्टी के कार्यकला में जहाँ मुख्य विपक्षी दल रही भारतीय जनता पार्टी अक्सर उन पर अपने समाज के अधिकारी तैनात करने व जिले में भी यादवों को प्राथमिकता देने के लिये सपा पर जबकि बसपा पर एक विशेष जाति को प्राथमिकता दिए जाने का आरोप लगाया जाता था। 2017 में बनी योगी सरकार को लोगो ने विकास के नाम पर व जातिवाद से ऊपर उठकर भारतीय जनता पार्टी को चुनकर प्रदेश में जातिवाद की राजनीति को अलविदा करने की कोशिश की लेकिन लगता है भारतीय जनता पार्टी के शासन में भी धीरे धीरे जातिवाद सर उठाने लगा है। कम से कम अफसरों द्वारा अल्पसंख्यक समुदाय की उपेक्षा करने से तो यही साबित होता है।

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