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विधान परिषद में सम्मानित होंगे संत कृष्णानन्द

हमीरपुर, महेश अवस्थी । प्यास से दम तोड़ रहे जानवरों, पशु, पक्षियों और ग्रामीणों को एक एक बाल्टी पानी के लिये भटकते देखकर संत के मन में पीड़ा हुई कि वह इन सबके लिये क्या कर सकता है और जनता के सामने मिशाल पेश करते हुये आठ बीघे का कलारम दायी का तालाब खोद दिया और बारिश की बूंदे सहेज लीं। सार साल के इस अथक प्रयास से उन्हें विधान परिषद में सम्मानित किया जायेगा। यह संत हैं कृष्णानन्द। सुमेरपुर

ब्लाक से 20 किमी दूर पचखुरा महान गांव में कल्लू सिंह के परिवार में 1964 में जन्मे कृष्णानन्द इण्टरमीडिएस पास कर हरिद्वार चले गये और स्वामी परमानन्द जी के शिष्य बनकर रहे। 2014 में अपने पैतृक गांव वापस लौटे तो गांव के बाहर बने रामजानकी मंदिर को ठिकाना बनाया। यहां 200 साल पुराने कलारन दायी के तालाब को जीवनदान दिया जो सिल्ट से पटा हुआ था। सात फिट गहरी खोदाई करके 3 हजार से ज्यादा ट्राली मिट्टी निकाली और मंदिर के पीछे जमा किया। संस्कृत विभाग के प्रमुख सचिव जीतेन्द्र कुमार ने प्रमुख सचिव ग्राम विकास और वन पर्यावरण विभाग को पत्र भेजकर संत कृष्णानन्द का व्यौरा तलब किया। विधान परिषद, सचिवालय, संसदीय अनुभाग, संसदीय कार्य अनुभाग-2 के नियम-59 के तहत संत को सम्मानित करने की सिफारिश की गई है।

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