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साकाहारी और नशामुक्त समाज में नई पीढ़ी के बच्चें में पड़ेंगे अच्छे संस्कार

हमीरपुर, महेश अवस्थी । संत बाबा जय गुरूदेव जी महाराज के उत्तराधिकारी पंकज महाराज ने मुस्करा में कहा कि मानव शरीर परमात्मा का बनाया हुआ है। चेतन ईश्वरीय मंदिर कुदरतीय काबा है जो भवसागर से पार जाने की नौका है। परमात्मा जीते जी मिलता है। कर्मजनित संकटों व आसन्न बीमारियों से बचने के लिये साकाहारी और नशामुक्त होना जरूरी है। चरित्र उत्थान के लिये नई पीढ़ी के बच्चों में संस्कार डालना समय की मांग की है। गुरू की महिमा अगम अपार है। वे 40 दिवसीय बुन्देलखण्ड जनजागरण यात्रा पर निकले हैं। पहाड़ी भिटारी के सत्संग में उन्होंने कहा कि 84 लाख योनियों में मानव सर्वश्रेष्ठ है। ये साधना का धाम है। इसमें से प्रभु के
पास जाने का एक मात्र रास्ता है। जिसका भेद केवल संत महत्मा जानते हैं। इस मानव शरीर को महापुरूषों ने सच्चा हरि मंदिर बताया। परत्मा इसी के अन्दर मिलेगा। जीव जब पैदा हुआ तो उसके आंखों के पीछे माया ने एक भूल का पर्दा डाल दिया, जिससे उसे ज्ञान नहीं रहा कि हम कौन हैं, कहां से आये हैं। वे जन्ममरण के चक्कर में कष्ट उठा रहे हैं इसलिये प्रभु ने अति दया करके समय-समय पर संतों को धराधाम भेजा ताकि वे जीवों को सझमा, बुझाकर सच्चे मार्ग पर चला सकें। अशुद्ध खान, पान के कारण समाज में हिंसा, अपराध की प्रवृत्ति बड़ी हैं। मांशाहार और नशापान से बुद्धि का विवेक खत्म हो गया है। चित्रवृत्तियां चलायेमान हैं। अगर साकाहारी और नशा मुक्त समाज हो तो बहन, बेटी, बहू, मां की पहंचान हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि कोई नहीं जानता कि दुनिया कब बनी, लेकिन इतना जरूर मालूम है कि हम तभी से भव सागर में गोता खा रहे हैं। अगर कोई सच्चा रहबर है तो वह केवल गुरू है जो आपको संभाल सकते हैं। 9, 10, 11 मार्च मो जय गुरूदेव आश्रम मथुरा में आयोजित होने वाले होली सत्संग में भाग लेने का निमंत्रण दिया। संगत प्रभारी शंकर लाल विश्वकर्मा, अर्जुन सिंह राजपूत, सुघर सिंह, भगवानदास यादव, मानसिंह राजपूत, दयाराम भारतीय और हजारों नर, नारियों ने सत्संग को श्रवण किया। यह जागरण यात्रा महोबा के लिये प्रस्थान कर गई।

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