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Sunday, January 19, 2020

दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में विद्वानों ने रखे विचार

नवीन चुनौतियां झेल रहीं अनादि काल की परम्पराएं: प्राचार्य

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरी । गोस्वामी तुलसीदास राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित प्राचीन भारतीय सामाजिक संस्थाएँ एवं वर्तमान में उनकी प्रासांगिकता विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ मुख्य अतिथि प्रो कपिलदेव मिश्र कुलपति, रानी दुर्गावती विश्व विद्यालय जबलपुर व महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ राजेश कुमार पाल ने किया। इस मौके पर विशिष्ट अतिथि डाॅ विनोद शंकर सिंह, डाॅ राजेश त्रिपाठी, डाॅ राकेश राणा, अभिमन्यु सिंह मौजूद रहे। 

संगोष्ठी में प्राचार्य डाॅ राजेश कुमार पाल ने कहा कि प्राचीन भारतीय सामाजिक संस्थाओं में सामूहिकता एवं स्थायित्व का गुण विद्यमान था। जीवन में उच्च आदर्शाें की प्रधानता थी। आर्थिक तत्व साध्य न होकर साधन मात्र था, परन्तु वर्तमान में आर्थिक तत्व ही सब कुछ बनकर रह गया है। परन्तु भारतीय समाज आज एक संक्रमणकालीन स्थिति से गुजर रहा है। अनादिकाल से चली आ रहीं परम्परायें, संस्थायें एवं मान्यतायें नवीन चुनौतियों का सामना कर रही हैं। मनुष्य भौतिकवादी संस्कृति में इस तरह डूबता जा रहा है कि उसे अपने जीवन का ही पता नहीं है। उसका एकमात्र लक्ष्य अधिक से अधिक धन कमाना और असीम भौतिक वस्तुओं का उपभोग करना ही रह गया है। पाश्चात्य संस्कृति के सम्पर्क ने पिछली शताब्दी में भारतीयों को अपने मूल्यों तथा दृष्टिकोणों को पुनिरीक्षित करने को विवश किया है। आज यह प्रश्न पुनः भारतीय मनीषो को व्यग्र कर रहा है कि कैसे अपने वैशिष्ट्य बनाये रखते हुए भी पाश्चात्य ज्ञान, प्रौद्योगिकी और जीवनस्तर को अपना सकें।

मुख्य अतिथि प्रो कपिलदेव मिश्र ने प्राचीन भारतीय संस्कृति के मूल तत्वों पुरुषार्थ, वर्णाश्रम व्यवस्था, संस्कार तथा सनातनी परम्परा के विषय में विषद् प्रकाश डाला। उन्होंने रामायण, भगवद् गीता एवं वेद, उपनिषदों की युगानुकूल व्याख्या करने पर बल दिया। जिससे प्राचीन भारतीय संस्कृति नवीन आधुनिक मूल्यों के साथ समायोजित हो सके। जिससे परम्पराओं के वाहक के साथ ही नवीन मूल्यों को आत्मसात कर सके। उन्होंने कहा कि आज प्राचीन संस्कृति एवं मूल्यों संजोये रखने के लिए प्राचीन संस्थाओं को उनके मूलस्वरूप में जीवित रखना होगा। इसके लिए शिक्षण संस्थाओं, विश्व विद्यालयों, समाजसेवी संगठनों एवं पारिवारिक संस्थाओं को आगे आना होगा। 
प्रथम तकनीकी सत्र में पं जेएनपीजी कालेज बाँदा के विद्वान प्राध्यापकों ने चर्चा की। द्वितीय तकनीकी सत्र के मुख्य अतिथि के रूप में कुलसचिव दिव्यांग विश्व विद्यालय चित्रकूट डाॅ महेन्द्र उपाध्याय उपस्थित रहे। वक्ताओं में डाॅ जेपी सिंह राजकीय महिला महाविद्यालय बाँदा डाॅ विनोद मिश्र दिव्यांग विश्व विद्यालय, डाॅ अनिल कुमार ंिसंह राजकीय महिला महाविद्यालय झाँसी, डाॅ एलसी अनुरागी राजकीय महाविद्यालय महोबा, डाॅ एस कुरील महामति प्राणनाथ महाविद्यालय मऊ, डाॅ देवेन्द्र पाण्डेय एसो. प्रो महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्व विद्यालय प्रमुख रूप से रहे। संगोष्ठी में आये हुए अतिथियों का आभार डाॅ अमित कुमार सिंह, सहसमन्वयक ने जताया। संचालन डाॅ वंशगोपाल ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापक डाॅ धमेन्द्र ंिसंह, डाॅ रामनरेश यादव, डाॅ सीमा कुमारी, डाॅ मुकेश कुमार, डाॅ अतुल कुमार कुशवाहा, डाॅ राकेश कुमार शर्मा, डाॅ नीरज गुप्ता सहित छात्र, छात्राएँ उपस्थित रहे।

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