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Tuesday, January 14, 2020

नटबलि मंदिर में आशिकों ने टेका मत्था, मांगी मोहब्बत

ऐतिहासिक भूरागढ़ में मंगलवार को आयोजित हुआ मेला, उमड़े हजारों लोग 
नट की मनपसंद रेवड़ियों का चढ़ाया गया प्रसाद, मेले में जमकर हुई खरीददारी 
बुधवार को भी गुलजार रहेगा ऐतिहासिक भूरागढ़ दुर्ग, नौका विहार का लोगों ने उठाया आनंद 
अपनी प्रेमिका को पाने के लिए सूत की रस्सी पर चलते हुए नदी में समा गया था नट 

बांदा, कृपाशंकर दुबे । मकर संक्रांति का पर्व मंगलवार को भी श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया गया। सुबह से लोगों ने नदियों और जलाशयों में स्नान कर भगवान सूर्य देव को अर्ध्य दिया। ऐतिहासिक भूरागढ़ स्थित नटबली मंदिर में मेले का आयोजन हुआ। लोगों ने केन नदी में जमकर नौका विहार का आनंद लिया। भूरागढ़ दुर्ग के
नट की समाधि पर बने मंदिर में बैठा नट और चढ़ाई गई रेवड़ियां 
नीचे केन नदी किनारे स्थित नटबली मंदिर के इर्द-गिर्द मेले की धूम रही। प्रेमी जोड़ों और दंपतियों ने नटबली की मजार पर माथा टेक कर मोहब्बत की लंबी उम्र की कामना की। इसे आशिकों का मेला भी कहा जाता है। 
भूरागढ़ मेले में खिचड़ी का वितरण करते एनसीसी कैडेट्स 
इस साल मकर संक्रांति का पर्व लोगों ने दो दिन मनाया। मंगलवार को भी लोगों ने त्योहार मनाया और मेले का लुत्फ उठाया। लेकिन ज्यादातर लोग बुधवार को मकर संक्रांति का पर्व मनाएंगे। मंगलवार को कुछ लोगों ने केन नदी में पहुंचकर श्रद्धा की डुबकी लगाई और पूजा पाठ किया। वहीं शहर के प्रमुख बामदेवेश्वर मंदिर, संकट मोचन मंदिर, महेश्वरी देवी, काली देवी, चैसठ जोगिनी मंदिर के अलावा जिले भर के प्रमुख मंदिरों में सुबह से
केन नदी में नौका विहार का आनंद लेते लोग और सेल्फी लेती युवती 
श्रद्धालुओं की भीड़ जमा रही। लोगों ने मंदिरों में बैठे गरीबों को खिचड़ी दान कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। उधर केन नदी तट पर बने नटबली मंदिर में भी मेला लगा रहा। लोगों ने श्रद्धा से माथा टेक कर मंगलकामना की। मेला देखने के लिए शहर समेत दूर दराज से लोग जुटे। लोगों ने प्राचीन भूरागढ़ किला घूमकर आनंद उठाया।
नटबली के मेले में उमड़ा लोगों का हुजूम और सजीं दुकानें 
महिलाओं और बच्चों ने मेले का जमकर लुत्फ उठाया। उधर मेले में भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था चाक चैबंद रही। मटौंध व भूरागढ़ समेत आसपास थानों की फोर्स तैनात रही। युवा नटबली प्रेमी की कहानी से जुड़े इस मेले में हर वर्ष बड़ी संख्या में आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से लोग शरीक होते हैं। यहां दो मंदिर हैं। किवदंती है
कि एक प्रेमी नटबली की और दूसरा मंदिर उसकी प्रेमिका किलेदार नोने अर्जुन सिंह की पुत्री का है। वर्ष 1850 में मकर संक्रांति के दिन प्रेमिका के पिता की शर्त पूरी करते समय सूत की रस्सी पर चलकर नदी पार कर रहे
मेले में खरीददारी करतीं युवतियां 
नटबली प्रेमी की गिरकर मौत हो गई थी। प्रेमिका के पिता ने रस्सी काट दी थी। तब से हर वर्ष यहां मकर संक्रांति पर मेले की परंपरा चली आ रही है। बड़ी संख्या में स्त्री, पुरुष, युवक-युवती व बच्चे शरीक हुए। प्रेमी जोड़ों और नव दंपतियों ने भी यहां हाजिरी दी। कुछ श्रद्धालुओं ने खिचड़ी लंगर का आयोजन किया।

मेले में महिलाओं व बच्चों ने की खरीददारी

बांदा। भूरागढ़ में नटबली की समाधि पर लगने वाले दो दिवसीय मेले में पहले दिन मंगलवार को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। मेला में महिलाओं व बच्चों ने जमकर लुत्फ उठाया और खरीददारी भी की। मेले में उमड़ी भीड़ 
भूरागढ़ में लोगों को पौध वितरित करते सीडीओ हरिश्चंद्र 
की सुरक्षा को लेकर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। इस मेले में नवविवाहित जोड़ों के अलावा प्रेमी-प्रेमिकाओं की ज्यादा भीड़ उमड़ती है। इसके अलावा यूपी और एमपी के तमाम गांवों के सैकड़ों लोग मेले में नट समाधि पर मत्था टेकते हैं और अपने प्यार की लंबी उम्र की कामना करते हैं। समाधियों में प्रसाद के तौर पर रेवड़ी चढ़ाई जाती है। बताते हैं कि नट को रेवड़ी बहुत पसंद थी। इसलिए प्रसाद के रूप में रेवड़ियां चढ़ाई जाती हैं। 

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