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दुर्लभ वन्यजीव पेंगोलिन को लोगों ने पकड़ कर की हत्या

काटे जाने का वीडियो वायरल होते ही मचा हड़कंप
पुलिस एवं वन विभाग की टीम जांच में जुटी

फतेहपुर, शमशाद खान । जंगली जीव जंतुओं के साथ जनपद में होने वाली घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही है। जागरूकता का अभाव, टोटकों या फिर शिकार की लत कहे वन्य जीवो के साथ होने वाली हिंसक घटनाएं लगातार घट रही है। किशनपुर थाना क्षेत्र के गढ़वा पौली ग्राम में अति दुर्लभ प्रजाति एव अंतराष्ट्रीय बाजार में लाखों की कीमत रखने वाले जीव पैंगोलिन को अज्ञात लोगों द्वारा पकड़ कर उसको गांव में लाकर नृशंस तरीके से काट दिया गया। सोशल मीडिया में वीडियो वायरल होने के बाद हड़कम्प मच गया। वही घटना की जानकारी
 पेंगोलिन की फाइल फोटो।
मिलते ही मौके पर इलाकई पुलिस एव वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच पड़ताल शुरू कर दी है। पिछले दिनों जनपद के ही हुसैनगंज थाना क्षेत्र में बाघ का शव मिला था जिसमे वन विभाग द्वारा पोस्टमार्टम कराये जाने के बाद बाघ को गोली लगने की बात सामने आयी थी और वन विभाग द्वारा अज्ञात लोगों के विरुद्ध बाघ की हत्या किए जाने का मामला दर्ज करवाया था। वहीं किशनपुर थाना क्षेत्र के गढ़वा पौली गांव अतिदुर्लभ प्रजाति के पैंगोलिन को जंगल से पकड़कर नृशंस तरीके से काटे जाने की घटना होने से एक बार फिर से पुलिस एव वन विभाग की लापरवाही उजागर हो गयी है। जनपद में एक के बाद एक वन जीवो की नृशंस हत्याओं की घटनाएं लगतार हो रही है। जानकारों की माने तो दुर्लभ प्रजाति के स्तनधारी वर्ग के जीव पैंगोलिन देश के कई हिस्सों यदा कदा ही मिलते है। इनके माँस को औषधियों एव कई अन्य गुणों के कारण दुनिया भर में इनकी तस्करी की जाती है। अन्तराष्ट्रीय बाजार में एक पैंगोलिन की कीमत लाखो रुपयो तक होती है। वही पेंगोलिन के मामले को लेकर पुलिस का कहना रहा कि घटना की जांच की जा रही है। वन विभाग की ओर से तहरीर मिलने पर मामला दर्ज कर कार्रवाई की जायगी। वही इस बाबत वन विभाग के अफसरों से सम्पर्क करने का प्रयास किया जाता रहा लेकिन अफसरों की काल नही रिसीव की।
 
क्या है पैगोलिन क्यो है दुर्लभ

वज्रशल्क या पेंगोलिन फोलिडोटा गण का एक स्तनधारी प्राणी होता है। केराटिन के बने शल्क की संरचना होती है। जिससे यह अन्य दुश्मन जीवो से अपनी रक्षा करता है। पैंगोलिन दुनियाभर में ऐसे शल्कों वाला अकेला ज्ञात स्तनधारी है जो अफरीका और एशिया में पाया जाता है। भारत में इसको सल्लू साँप भी कहते हैं। देशभर में इसकी आठ प्रजातियां पाई जाती हैं। रोग-निवारण के लिए इसके अंगों को खाने की झूठी और अन्धविश्वासी प्रथाओ के कारण इनका शिकार किया जा रहा है। दुनिया भर में इसकी तस्करी किये जाने के कारण पैंगोलिन की सभी जातियां अब खतरे में बताई जा रही हैं और उन सब पर विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है। अन्तराष्ट्रीय बाजार में पैंगोलिन की कीमत लाखों रुपये बताई जाती है।

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