Latest News

यूनिवर्सिटी के हालात खराब

 देवेश प्रताप सिंह राठौर
 (वरिष्ठ पत्रकार)

उत्तर प्रदेश यूनिवर्सिटी में बहुत से नाम आते हैं अच्छे में लेकिन सबसे खराब स्थित है अगर उत्तर प्रदेश में कोई यूनिवर्सिटी  है और वह झांसी यूनिवर्सिटीऔर दूसरा मेडिकल क्षेत्र में देखा जाए तो झांसी मेडिकल कॉलेज दोनों की स्थिति बहुत ही दर्दनाक है। जिसमें आपको बताना चाहते हैं झांसी बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में शिक्षा के नाम से अराजकता फैला रखी है कोई विगत अपनी जिम्मेदारी को शिक्षा के संबंधित निभाने में अपनी रुचि नहीं दिखाई देती है। मैंने जब-जब झांसी बुंदेलखंड का छात्रों के बताने के अनुसार एक गुप्त जानकारी नाम ना छापने की स्थित में बताएं झांसी बुंदेलखंड के समस्त विभागों का जाकर स्थित का अवलोकन किया प्रोफ़ेसर सिर्फ चेंबर में ठंड को मनाने के लिए हर सुविधाओं से युक्त उनके चेंबर बने हुए हैं जिस तरह राजा महाराजा लोग बैठे होते हैं और प्रजा जाती है तानाशाह राजा जो होते हैं ओ कुर्सी घुमाते हुए बात सुनते हैं और इस तरह का जवाब देते हैं जिसकी आपने कभी कल्पना भी नहीं की होगी, यह झांसी बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी की हकीकत है मैंने जब वहां के

कुछ कर्मचारियों से बात की तो उन कर्मचारियों ने अपने नाम ना छापने की स्थिति में स्पष्ट तौर पर कहा कि भाई यहां पर बहुत ही स्थिति खराब है बताने की स्थिति में हम नहीं है जो यहां के बी सी है वह भी कोई ध्यान नहीं देते हैं सारा स्टाफ जो यहां का है जो जैसा कहते हैं बीसी उसी को मानकर कार्य करते हैं ऐसा लोगों द्वारा बताया गया शिक्षकों के द्वारा पढ़ाई ना के बराबर है और जहां पर महिलाएं प्रोफेसरों के पद पर असिस्टेंट प्रोफेसरों के पद पर लेक्चरर के पद पर कार्यरत है ऐसा मुझे ज्ञात हुआ है वह भी उन्हीं लोगों के ढर्रे पर कार्य करती हैं, तथा शिक्षा में एक संस्कार नाम की भाषा होती है परन्तु झांसी बुंदेलखंड में मैंने कुछ प्रोफेसरों से मिला वह प्रोफेसर कम गुंडे जैसी भाषा अधिक बोलते हैं जब  शिक्षक गुंडे वाली भाषा से बात करेंगे और लोगों को  गलत तरीके से जवाब देंगे,जब प्रोफ़ेसर इस तरह क्यों होंगे तो छात्रों से आप क्या उम्मीद कर सकते हैं, कॉलेजों में जो भी बवाल होते हैं छात्र करते हैं उसका मुख्य कारण होता है वहां के प्रबंध तंत्र, प्रबंध तंत्र छात्रों को इस तरह परेशान करते हैं स्वयं अपना काम ना अपने दायित्वों को न ही इमानदारी से निभा रहे है। छात्रों का उत्पीड़न करते हैं,जब कॉलेजों में वही उनके अन्याय के प्रति आवाज उठाते हैं उपद्रव करते हैं तो उन्हें गलत सिद्ध किया जाता है की वह जिम्मेदारी ना निभाते हुए एक दूसरे पर अपनी बात को थोपने का काम करते हैं इससे स्पष्ट हो जाता है कि कोई भी किसी का यहां पर अंकुश नहीं है, जबकि बीसी वाइस चांसलर को चाहिए ऐसे प्रोफेसर शिक्षा जो छात्रों के साथ गलत व्यवहार कर रहे हैं छात्रों को शिक्षा देने में कुताही कर रहे हैं तथा उनको शिक्षा का ज्ञान है कि नहीं है सिर्फ डिग्री लेकर किसी माध्यम से शिक्षा लेकर आ गए हैं और नौकरी पा गए मेरे पास बहुत से नाम है मैं उन नामों को लिखना नहीं चाहता हूं तथा वाइस चांसलर महोदय से निवेदन करना चाहता हूं शिक्षा में गुणवत्ता को सुधार लाने का प्रयास करें तथा उन लोगों को चेंबर में जाकर आकाशमिक  निरीक्षण करें जिसमें आपको पता चल जाएगा चेंबर में महफिले ज्यादा सजती है पढ़ाई की बातें कम होती है।.................झांसी मेडिकल कॉलेज ........... झांसी मेडिकल कॉलेज जिस तरह से काम चल रहा है लगता है मेडिकल कॉलेज जिसे बने हुए लगभग 50 वर्ष से अधिक हो लेकिन झांसी मेडिकल कॉलेज में कोई भी विकास नहीं किया सिर्फ कागजों में विकास होता है और कहां पर व्यवस्थाएं ठीक ना होने का मुख्य कारण है कि अधिकतर वहां के डॉक्टर स्वयं प्राइवेट नर्सिंग हो खोले हुए है। तथा बहुत से डॉ प्राइवेट प्रैक्टिस करते है, जिनकी ओपीडी फीस बहुत अधिक है तथा मेडिकल कॉलेज के सामने बने दर्जनों नर्सिंग होम तथा आस पास मेडिकल कॉलेज के ऐसे आसपास बस्तियों में बहुत सारे नर्सिंग होम बने हुए हैं जिन पर मेडिकल कॉलेज से उनके सहयोगी क्षेत्रीय गांव में झोलाछाप डॉक्टर उनके कमाऊ पूत होते हैं मरीजों को भेजते हैं जिनसे उन्हें कमीशन प्राप्त होता है यह सिलसिला मेडिकल कॉलेज में धड़ल्ले से चल रहा है, हां पर डॉ कुछ अच्छे हैं खराब  की संख्या अधिक होने के कारण वह भी उन्हीं में मिक्सफ हो गए हैं। आज मेडिकल कॉलेज बहुत ही दशा खराब है उसी के सामने एक नर्सिंग होम है जिसका नाम लिखना नहीं चाहता उस नर्सिंग होम में जिले के बहुत बड़े आला अफसर के कर्मचारी के परिवार में बुखार होने पर भर्ती कराया डेंगू बता दिया तथा प्लेटलेट बहुत कम बताते गए और एडमिट कर लिया और जनपद की मानी जानी पैथोलॉजी जो मानी जानी कम है लेकिन मेडिकल कॉलेज के सामने है।जहां पर सारी जांच होती है, कराते हैं डॉक्टर  झांसी जनपद के लगभग सभी डॉक्टर निर्देशित वही करते वहां पर जांच कराई जांच रिपोर्ट में भिन्नता आने पर उन्होंने जब देखा कि मरीज को कोई लाभ नहीं हो रहा है प्लेटलेट कम होती जा रही थी तो डॉक्टर से बोला कितनी प्लेटलेट्स कम होती जा रही है कोई लाभ नहीं हो रहा है मैं दूसरी जगह कहीं दिखाऊंगा और जांच कराता अगर कमी पाई गई तो डॉक्टर साहब  आप के खिलाफ कार्रवाई करूंगा। ट्रैक्टर समझ गए कि गलत जगह है फस गए तुरंत डॉक्टर ने सही बात बताई जबकि प्लेटलेट ठीक थी भरती करके पैसा कमाने का इन लोगों का एक ईतरीका इसे मानवता को तार-तार कर दिया है। जब  डॉक्टर ने देखा फस जाएंगे तुरंत पलटी मार दी। यह है डॉक्टरों का सच।एक बड़े जिले के अधिकारी के साथ रहने वाला कर्मचारी के साथ जब डॉक्टर यह काम कर सकते हैं तो आम आदमी की क्या हैसियत है। वह अधिकारी हैं जो उनका नर्सिंग होम सील करने की क्षमता रखते हैं। तथा उनकी डॉक्टरी डिग्री सील करने को शासन को भेज सकते हैं। उनका भेजा हुआ शासन को कभी नकारा नहीं जाता है। उन्हें किसी से पूछने की जरूरत नहीं है, उस विभाग के कर्मचारी के साथ जब नर्सिंग होम वाले इस तरह का निडरता पूर्वक कार्य करते हैं तब एहसास होता है की इन नर्सिंग होम के पीछे कोई ना कोई हाथ और साथ मजबूत जरूर मिलता है चाहे राजनीत का या किसी अन्य प्रकार का यह हाल झांसी के नर्सिंग होम का है। आप का इलाज मर्ज के आधार पर नहीं धन के हिसाब से तय होता है ।  आप का इलाज पैसे हड़पने के आधार पर तय होगा और आप उस हालात में पहुंचा देते हैं कि आप ना मर सकते हैं ना कि ही जी सकते है। हम सब मजबूर है जाए तो कहां जाए उसी मजबूरी का फायदा डॉक्टर उठाते हैं।अभी हाल में मेडिकल कॉलेज में मुख्यमंत्री द्वारा कई योजनाओं पर अवलोकन किया गया था परंतु क्या इसके पूर्व भी कई योजनाओं का चलाई गई क्या वह संस्कृत में चली समझने की जरूरत आज सबसे ज्यादा झांसी का आदमी परेशान है तो मेडिकल उसके बाद अगर कोई परेशान है तो शिक्षा के संबंध में टारगेट कोचिंग को इंपैक्ट कोचिंग बहुत सारी कोचिंग है उनका इतिहास जानने का प्रयास करें। किसी स्थित है कॉलेजों कहां का किस-किस कॉलेजों में इनका अटैचमेंट स्कूलों को बच्चों को कोचिंग सेंटर में बढ़ाने का दबाव कालेजों की तरफ से है से किया जाता है किसी माध्यम से कोचिंग आज और बड़ी-बड़ी को कोचिंग के नाम से जानी जा रही है।

No comments