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युवा किसान की अनूठी पहल

कड़कड़ाती सर्दियो मे उगा लिये गर्मियो की फसल के पौधे 

फ़िरोज़ाबाद, विकास पालीवाल ।   खेती को घाटे का सौदा मानते हुए गांव के युवा मामूली नौकरियो के लिए शहर की ओर पलायन कर रहे है, लेकिन  जनपद के एक युवा ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद  शहर से अपने पैत्रिक गांव सिरसागंज तहसील के ग्राम सींगेमई  की ओर रुख किया है। वह नई वैज्ञानिक तकनीक से खेती करके भरपूर मुनाफा मुनाफा कमा रहा है। इस  किसान ने कुछ हजार रुपये खर्च करके इजराइल कृषि विज्ञानियो द्वारा विकसित ग्रीन हाउस फैक्टर तकनीकी से कड़कड़ाती सर्दी मे भी गर्मियो मे उगने वाली कद्दू वर्गीय साब्जियों के पौधे तैयार कर लिये है। इसकी अगेती फसल मंडी मे काफी ऊँची कीमत पर बिकती है।
     
  जिला फिरोजाबाद के शिकोहाबाद निवासी दीपांशु जादौन  ने अंग्रेजी विषय से स्नातक की पढ़ाई की है। अन्य अधिकांश युवाओं की तरह उन्होने पढ़ाई के बाद नौकरी की तलाश करने के बजाय अपनी पैत्रिक कृषि जोत पर नई तकनीक से खेती करने की योजना बनाई। उन्होने परंपरागत खेती का तरीका त्याग कर जिला उधान अधिकारी विनय कुमार यादव के सुझाब पर ड्रिप इंरीगेशन सिस्टम लगाया,सिंचाई की इस तकनीक से पानी की बचत के साथ ही कृषि उत्पादन में काफी बढोत्तरी होती है। दीपांशु ने देखा कि अगर मंडी में कोई फसल समय से पहले बिक्री को जाती है तो वह काफी ऊँची कीमत पर बिकती है। दीपांशु का कहना है कि मंडी मे माल की बिक्री के लिए  सबसे पहले जाओ या सबसे बाद मे।अगर भीड़ मे माल की बिक्री करोगे तो सस्ते मे बिकेगा।यही कारण है कि अगेती और पिछेती कृषि उत्पाद की अच्छी कीमत मिलती है।अगेती फसल लेने के लिए इस किसान ने कृषि विज्ञान केन्द्र टूण्डला के उधान विज्ञानी डॉ. सुभाष शर्मा से संपर्क किया तो उन्होंने संरक्षित खेती पर जोर दिया। जिला उधान अधिकारी ने गर्मियो मे उगायी जाने वाली सब्जियो की अगेती खेती की सलाह दी। इसके लिए वाकिग टनल मे बीजो को जनवरी में बोकर पौध तैयार किये जाते है। फरबरी माह मे जैसे ही मौसम मे गर्माहट आती है तो इन्हे खेत मे रोप दिया जाता है। टनल के ढाँचे को अल्ट्रा वाईलेट फैक्टर वाली प्लास्टिक सीट से ढंक कर ढाचे के अंदर का तापमान  बढ़ाया जाता है।इस किसान ने 40 वर्ग मीटर क्षेत्रफल पर प्लास्टिक पाइप से एक ढांचा तैयार करके उसे यूवी फैक्टर प्लास्टिक सीट से ढक दिया। इस ढांचे की खासियत यह है कि सूरज की तपिस से अंदर का तापमान बाहर खुले वातावरण की अपेक्षा काफी आधिक रहता है। जिसमे आसानी से बीजो का अंकुरण होकर पौधे का विकास हो जाता है। गर्मियो मे उगायी जाने वाली  फसले जैसे तोरई,लौकी, करेला, टिण्डा, काशीफल, तरबूज,खरबूज, खीरा आदि के पौधो को जनवरी की सर्द ऋतु मे उगा सकते है। यह फसल आम किसानो की फसल से एक-डेढ माह पूर्व बाजार मे आ जाती है।जिनकी मंडियो मे काफी ऊँची कीमतों पर विक्री होती है।

   
आलू छोड़ विदेशी प्रजाति के फलो की खेतीं 
फिरोजाबाद । जनपद मे प्रमुख रुप से आलू की खेती की जाती है। सिरसागंज के सींगेमई गांव निवासी दीपांशु ने
आलू को छोड़ कर विदेशी प्रजाति के फलो की खेती शुरु की है।जैसे ताईवान का पपीता, ईजराइल का केला, थाईलैड का एपल बेर। इन फलो की बाजार मे अच्छी मांग है।इस युवा किसान को जिला एवं मंडल स्तर पर उधान विभाग द्वारा पुरष्कृत किया जा चुका है।  

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