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जनसंख्या नियंत्रण आज की आवश्यकता

(देवेश प्रताप सिंह राठौर)
(वरिष्ठ पत्रकार)

भारत वर्ष में एक बात बहुत अहम है संस्कारर लोग संस्कार हीन है पर मूर्ख बनाने का संस्कारों की बात करते तथा बहुत सी बातें होती है। परंतु जो व्यक्ति वास्तव में सत्य पर चलता है वह विकास नहीं कर सकता उदाहरण के तौर पर हमारे देश के प्रथम राष्ट्रपति डा. राजेन्द्र प्रसाद, लालबहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री पद पर रहे और एक नाम आता नीलम संजीव रेड्डी यह भी राष्ट्रपति रहे। भारत के यह सब बेहद ईमानदार लोग रहे इनके इतिहास उठाये कुछ नहीं था यहां तक पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी के पास इतने पैसे नहीं थे वह कार ले सके उन्होंने पंजाब नेशनल बैंक से लोन लिया और कार ली यह है संस्कारी लोग उन्हीं के बाद आज एक नाम सामने देश के आया आज आधुनिक जीवन में सबसे बड़े पद पर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी इनकी ईमानदारी के आज पूरा  देश जो जाति पाॅति से उठकर सोचेगा तो देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ही है। ईमानदार व्यक्ति हमेशा परेशानियों से ग्रस्त रहता क्योंकि वह चोरों कि चलने नहीं देता।

भ्रष्टाचारी होने नहीं देगा न खाऊंगा। न खाने दूंगा तो क्या होगा बुराई होगी सत्य के खिलाफ वहीं चल रही आज नागरिकता संशोधन विल पर  देश में फण्ड एकत्र किया जा रहा आंदोलन नागरिकता पर चलता रहे पर यह मूर्ख समझते नहीं कुछ नहीं होने वाला अति करोगे तो कानून से कोई जीत पाया अभी नरमी सरकार कर रही है।
आपने देखा उत्तर प्रदेश में किस तरह शुरूआत में विरोध हुआ और कितना सरकारी प्राइवेट नुकसान किया तथा योगी सरकार ने नुकसान करने वालों पर भरपायी करना आरंभ किया सब ठीक हो गये दंगा दंगे से नहीं दबता कानून की सख्ती से मेरा देश के अन्य राज्य भी योगी सरकार की नीति से कार्य करे सब नागरिकता संशोधन विल वाले शांत हो जायेंगे। 
आपने झारखण्ड राज्य में किस तरह नागरिकता संशोधन विल के समर्थन में शांति से जुलूस निकाल रहे थे पत्थर फेंके गये। मैं एक बात आज बिना डर भय पक्ष के लिख  रहा आपके समझ में आता होगा इस देश में जो हिन्दु की संख्या अधिक बताई जाती है तथा मुसलमान को अल्पसंख्यक कहा जाता है पर कभी एक बात आपने ध्यान नहीं दिया वह है मदरसा एवं मस्जिद यह आपको हर मुहल्ले में एक या दो अवश्य मिलेगी वह भी बड़ी अच्छी स्थिति में मंदिर की क्या स्थिति शंकर जी रख दिये चबूतरा बना दिया चल भाई बन गया मंदिर यह हाल है मंदिर एवं मस्जिद में मदरसा में क्या पढ़ाई हो रही कोई सरकारी तंत्र उसके बारे में नियुक्त है।
क्या हो रहा है कोई जानकारी किसी को होती नहीं आप अक्सर सुनते है आतंकवादी मस्जिद सा मदरसा में पाये जाते क्यों? जहां धार्मिक स्थल हो वहां पर आतंकी क्यों मिलते पहला प्रश्न, दूसरा झारखण्ड में शांति जलूस नागरिकता संशोधन के समर्थन में थे क्यों उनके ऊपर मस्जिदों मदरसों से पत्थर फेंके गये यह सब दर्शाता है आने वाले समय में यही लोग एक पाकिस्तान और तैयाार कर रहे अगर सरकार की विपक्ष नीति पर चली तो वर्ष 2035 तक यह एक बड़े नासूर देश के लिए बनेंगे। और आज हिन्दु भारत कहा जाता है। यह अल्पसंख्यक हिन्दु कहे जायेंगे। 
आप समझ सकते है कि नागरिकता संशोधन विल पर भारत एवं भारतीय को कोई परेशानी नहीं है परेशानी है तो सिर्फ पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बंगला देश जिसमें मुख्य रूप से बंगला देश है। उनके लिए भारत के अल्पसंख्यक जो अब नहीं है अल्पसंख्यक वह नागरिकता का विरोध कर रहे है। 
आज एक कानून की और जयरत है वह सरकार बनाये जनसंख्या नियंत्रण आपने देाा नागरिकता कानून बनते 12 हजार बंगलादेशी अपना बोरी बिसतरा लेकर भाग गये और जा रहे यह लड़ाई जो समर्थन वाले लड़ रहे इन्हीं के लिए एक कहावत कही गयी है धर का भेदी लंका उावे। नागरिकता कानून उन जाति के लिए बनाया गया था जो लोग पाकिस्तान बंगलादेश, अफगानिस्तान में अल्पसंख्यक है तथा उनको वहां पर उत्पीड़न जबरदसत किया जा रहा है वह आप सब जानते हैं वह जाति है हिन्दु, बौध जैन, सिख ईसाई आदि लोग आसानी से भारत की नागरिकता पा सके कभी इन अल्पसंख्यकों ने अभी पाकिस्तान में हिन्दु अल्पसंख्यकों की बेटियों के साथ बलात्कार हुआ यह नहीं दियाा इस पर भी पाकिस्तान मुर्दावाद नारे लगाते प्रदर्शन करते भारत का सीना ऊंचा होता चला कुछ तो हमें समझे वहां पर चुप्पी साधे आये दिन हत्या बलात्कार हो रहे है। 
पाकिस्तान में आजाद भारत जब हुआ था उस समय 30 प्रतिशत हिन्दु था पाकिस्तान में आज एक प्रतिशत के लगभग बचा है। वह भी भगवान की पूजा नहीं कर पाता छुपाकर मूर्ति रखता भगवान की यह हाल है पाकिस्तान में हिनदु एवं जैन, बौद्ध सिख, ईसाईयों का वहां पर भी इन्हें आजादी दिलाओ जैसे यहां पर आजादी की मांग करते, जेएनयू गद्दार कन्हैया कुमार खालिद मोहम्मद, कहते हम लेकर रहेंगे आजादी परंतु भारत की सरकार और उन्हें शरणदाता भूल जाते देश के साथ गद्दारी करोगे जनता कभी माफ नहीं करेगी। कानून भले माफ कर सकता क्योंकि कानून का सबूतों पर चलता चोर बेईमान गद्दार सबूत जुटा लेते है।
जनसंख्या नियंत्रण
एक कानून जनसंख्या नियंत्रण पर मोदी सरकार अवश्य बनाये जिस तरह से जनसंख्या इस देश की बढ़ रही वह एक चिंता का विषय है। सरकार दो से अधिक बच्चों पर शिक्षा विहीन एवं नौकरी विहीन, कोई भी सरकारी लाभ न प्राप्त हो इस तरह कानून सख्त बनाया जाए। एक बार संजय गांधी ने वर्ष 1977 में नसबंदी का दौर चलाया था इस जनसंख्या नियंत्रण पर आप समझ ले जब वर्ष 1977 में चला था जनसंख्या नियंत्रण पर सोच बनी थी। आज पचास वर्ष हो गये अब तो बहुत ही आवश्यक है नहीं वह दिन दूर नहीं जब सरकारें संभल नहीं पायेगी इन गद्दारों को रोकना है तो जनसंख्या नियंत्रण कानून अवश्य बनाया जाना आवश्यक है जो संजय गांधी ने वर्ष 1977 में सोचा और लागू किया वह वर्ष 2020 में मोदी सरकार जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाये आज देश की मांग है।
संस्कार बसते है बकते नहीं
सच्चा व्यक्ति वह होता है जो एक अच्छी सोच रखे मै आपको एक सच्ची बातें बताना चाहता जो मेरे संस्कारों में रही मैं अपनी लेखनी सत्य के लिए लिखता उससे समझौता किसी से नहीं किया जिसने सत्य को दबाने का प्रयास किया। उस पेपर से हट जाता हूं। दुनिया है तु नहीं तो और नहीं और सत्यवादी है तभी दुनिया चल रही है। मैं जब छोटा था पापा एनई रेलवे इज्जतनगर बरेली में एकाउण्टस आॅफीसर थे यह बात वर्ष 1979 की है पापा बाबू जी मेरे बहुत ईमानदार व्यक्ति थे उनका सभी सम्मान करते थे यहां तक डीआरएम एवं उनसे भी बडे लोग राठौर साहब को अपने बगल में मीटिंग में बैठाते थे जबकि मीटिंग में पापा के कैडर के बहुत थे परंतु सब सामने बैठते यह ईमानदारी संसकारों का असर रहा हमारे पिता जी पेआॅडर बिल पास करते थे। रेलवे गोरखपुर हैड आॅफिस था बहुत लोग पैसा देने का काम टीटी, टीआई करते थे कि हमारा कार्य कर दें परंतु पापा ने पैसा रिश्वत नहीं ली। जिसने देने का प्रयास किया उसका कार्य कुछ दिनों बाद करते थे रोक देते थे। एक बार एक टीटी ने अपना टीए बिल पास कराने हेतु सौ रूपये दिये जो घर आॅफिस से पांच सौ मीटर की दूरी पर था मां सीधी थी रख लिए शाम को बाबू जी घर पर आये बताया यह पर्ची एवं सौ रूपये दे गये बाबू जी पापा ने उनका आॅफिस में क्लास लगा दिया मां को भी डाटा। आज दोनों इस दुनिया में नहीं है पर उनका खून मेरी रंगो में नहीं है जो संस्कार पापा बाबू जी ने ईमानदारी के प्राप्त कराये यह सब बातें मैं इसलिए जानता जब मैं पन्द्रह वर्ष का था स्कूल से आकर तुरंत बाबू जी के पास आॅफिस चला जाता था वहीं कुर्सी डलवा देते थे मैं उनके पास बैठा रहता था तथा 10 पैसे का समोसा एवं 15 पैसे का पेडा मिलता था रेलवे की कैन्टी से बाबूजी पापा मेरे लिए मंगाते थे। मैं वर्ष 1979 में बाबूजी पापा के रिटायरमेंट के बाद जबकि मां बाप आज इस दुनिया में नहीं है पर उनके दिये सच्चाई पर चलने के सिद्धांत कभी नहीं छोड़ता। वे कहा करते थे सत्य में दिक्कतें आती है विकास रूक जाता है पर हिम्मत आनन्द बहुत मिलता है। वहीं मैं आज निभा रहा जिसके कारण परेशानियां आती है। चली जाती पर दिक्कतें बहुत होती जिसे हर कोई निभा पाना सम्भव नहीं यही संस्कार ही होते है। मैं 1979 वर्ष के बाद एक शादी में बरेली गया वर्ष 2019 में मेरा जाने का मकसद यही रहा कि वहां जाकर देखूं 38 वर्षों में कितना बदलाव हुआ जहां बाबूजी हम मां सब रहते थे। वह घर रेलवे काॅलौनी में गया देखा पुरा हो गया सब वैसा ही था सारा बचपन सामने आ गया हर मोड़ पर बाबूजी दिखने लगे मां दिखने लगी मन भावुक हो गया। आंख में आंसू आ गये। उस मकान कि कुण्डी खटखटाई एक महिला निकली बोली कैसे किससे मिलना है मैंने कहां आज से 38 वर्ष पूर्व इसी मकान में मेरा जन्म हुआ और 15 वर्षों तक रहा बाबूजी रिटायर हो गये तब यहां से गया बहुत यादे जुड़ी है मैंने पूछा यहां पर निशान सिंह, चन्द्रपाल, अयोध्या पाण्डे, आदि रहते थे एवं राजेन्द्र जैन पापा बाबू जी  के बहुत करीबी मित्र थे वह सब पता मालूम है एक व्यक्ति निकला कहां और तो नहीं पर चन्द्रपाल का घर राजेन्द्र नगर बरेली में बनवा लिया।
मैंने घर को प्रणाम किया और ओला कार लेकर गया था बैठ गया कहां वापस शादी के गेस्ट हाउस में पहुंचा दो और वापस आ गया मैं काफी देर परेशान रहा।

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