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जिला महिला अस्पताल में बेबी-फ्रेंडली मानकों पर पूछे सवाल

माताओं को दिए स्तनपान से सम्बंधित टिप्स   
अस्पतालों को बेबी-फ्रेंडली बनाने पर जोर  

बांदा, कृपाशंकर दुबे । जिला महिला अस्पताल में पीएनसी वार्ड भर्ती 24 वर्षीय प्रसूता कौशल देवी से जब पूछा गया कि क्या उसने जन्म के बाद अपने बच्चे को स्तनपान कराया, तो उसने बताया कि प्रसव के तुरंत बाद लेबर रूम में ही स्टाफ नर्स की मदद से उसने बच्चे को स्तनपान कराया है। कौशल देवी ने कहा दृ “स्तनपान के बारे में आशा बहू ने भी जानकारी दी थी और मैं छरू माह तक अपने बच्चे को केवल स्तनपान ही कराउंगी”। कौशल के इस जवाब से यह साफ है कि समुदाय और अस्पताल में दिए गए स्तनपान से सम्बंधित जरूरी संदेशों को उसने भलीभांति समझा है।  
बैठक में जानकारी देते चिकित्सक
देश में स्तनपान व शिशु आहार (आईवाईसीएफ) को बढ़ावा देने के लिए ‘माँ’ (मदर्स एब्सोलूट एफेकशन) कार्यक्रम चलाया जा रहा है जिसके तहत चिकित्सा इकाइयों में स्तनपान को प्रोत्साहन देकर अधिक बेबी-फ्रेंडली बनाने पर जोर दिया जा रहा है। रणनीति के अनुसार प्रदेश सभी जिला चिकित्सालयों का तीन चरणों में अनुश्रवण किया जा रहा है, जिसके बाद मानकों के अनुसार योग्य जिला चिकित्सालयों को पुरुस्कृत किया जाएगा। इसी क्रम में गत दिवस यूनिसेफ के मंडलीय समन्वयक पवन मिश्रा द्वारा जिला महिला चिकित्सालय का निरीक्षण किया गया। उन्होंने उपस्थित स्टाफ नर्स, वार्ड आया आदि से बेबी-फ्रेंडली मानकों पर सवाल-जवाब किये और बेहतर प्रदर्शन के लिए उन्हें जरूरी टिप्स भी दिए। साथ ही पीएनसी वार्ड का निरीक्षण कर स्तनपान के बारे में माताओं की जानकारी का जायजा लिया और नवजात की देखभाल के बारे में बताया। पवन मिश्रा ने बताया कि मां और नवजात के बीच शारीरिक जुड़ाव बेहद जरूरी है। इसके साथ ही अस्पताल में रहने के दौरान माँ और साथ आए परिवार के सदस्य की काउन्सलिंग भी महत्वपूर्ण है। यदि समुदाय में आशा द्वारा और अस्पताल में स्टाफ नर्स द्वारा स्तनपान के संदेशों को सुदृढ़ तरीके से पहुँचाया जाए तो हर बच्चे को स्तनपान का अधिकार मिल सकता है। और ऐसा होने से ही मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करने में सफलता मिलेगी। इस दौरान अस्पताल के जिला क्वालिटी एश्योरेंस प्रबंधक डॉ. प्रमोद सिंह और डा. चारु गौतम भी मौजूद रहे। 

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