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90 प्रतिशत पानी आर्थिक लाभ के लिए होता इस्तेमाल: उमराव

सेमिनार समापन पर मप्र सरकार से आए सचिव ने जल संरक्षण का किया आवाहन 
बोले: अगला विश्व युद्ध पानी के लिए नहीं बल्कि मिट्टी के लिए होगा

बांदा, कृपाशंकर दुबे । कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में बुंदेलखंड विकास इश्यूज आयोजित सेमिनार के समापन अवसर पर बोलते हुए मप्र सरकार से आए सचिव उमाकांत उमराव ने कहा कि 90 प्रतिशत पानी महज आर्थिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जाता है। 35 करोड़ हेक्टेयर में हमारे देश में पानी होता है लेकिन उसे संरक्षित करने का कोई तकनीकी उपाय नहीं किया जाता। 30 फीसदी पानी ही भूजल भंडार में बचा हुआ है। सचिव ने सतही जल प्रबंधन के विषय में सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि आगामी 20 वर्षों में पानी का भंडारण खत्म हो जाएगा। 30 फीसदी भूजल ही शेष है। उन्होंने कहा कि पानी की समस्या से अगर बचना है तो बारिश का पानी 
सेमिनार में अवलोकन करते जलशक्ति मंत्री डा. महेंद्र व अन्य 
को संरक्षित करने के बारे में सोचना होगा। अपने वक्तव्य में सचिव ने कहा कि लोग कहते हैं कि अगला विश्व युद्ध पानी के लिए होगा। लेकिन उनका मानना पानी के लिए नहीं बल्कि मिट्टी के लिए होगा। 
बुंदेलखंड के विकास को गति देने के लिए नियोजन विभाग तथा बुंदंेलखंड विकास बोर्ड द्वारा बुंदेलखंड के विकास के संबंध में रणनीति तैयार करने के लिए सेमिनार का आयोजन किया गया है। श्री उमराव ने कहा कि सिंचाई के लिए स्प्रिंकलर और ड्रिप पद्धति को अपनाना चाहिए। 
मौजूद विशेषज्ञ व अन्य
बुंदेलखंड विकास बोर्ड चेयरमैन बादल सिंह ने बताया कि ग्राम विकास बुंदेलखंड ही केवल नहीं है, बुंदेलखंड का एक हिस्सा नक्सलवाद से पीड़ित रहा है। धीरे-धीरे सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि भूमि का समतलीकरण कराना बहुत ही आवश्यक है। ग्राम समितियों की मासिक बैठक कराई जानी चाहिए। उसमें जिम्मेदारी और जवाबदेही दोनो तय होनी चाहिए। विकास के लिए जन सहयोग होना बहुत ही आवश्यक होता है। ग्रगाम पंचायत सदस्यों को प्रशिक्षित करके उन्हें ग्राम विकास का भागीदार बनाया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए स्थानीय छोटे-छोटे सतही अवरुद्ध बनाए जा सकते हैं और जिन स्थानों पर मिट्टी की गहराई कम हो, ऐसे स्थानों पर खेती वाली जमीन में नीचे की ओर तालाब बननाना चाहिए, जिससे वर्षा जल को संरक्षित
सेमिनार को संबोधित करते जलशक्ति मंत्री डा. महेंद्र 
किया जा सके। इसके अलावा जल प्रबंधन में सदस्यों द्वारा सुझाव दिए गए। महेंद्रपाल राजपूत ने बताया कि जो तालाब मृत हो चुके हों और उन पर अतिक्रमण कर लिया गया हो, उनमें शासन एवं प्रशसान द्वारा रणनीति तैयार कर कब्जा हटाने और खुदाई का कार्य प्राथमिकता पर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि खेतों में बड़ी-बड़ी बंधियां बनाई जानी चाहिए, जिससे पानी को रोका जा सके और जतन सामान्य को पौधरोपण के प्रति जागरूक करना चाहिए, जिससे पौधरोपण वृहद पैमाने पर किया जा सके। उन्होंने कहा कि जल की उपलब्धता के आधार पर फसलों का चयन किया जाए। इस दो दिवसीय सेमिनार में उपस्थित प्रो. एसपी सिंह, कार्यक्रम के वरिष्ठ सलाहकार अनिल सिन्हा, संजय सिंह परमार्थ, डा. संजय सिंह सहित दूरदराज से आए हुए विषय विशेषज्ञ उपस्थित रहे। इसके अलावा समापन समारोह के अवसर पर कृषि राज्यमंत्री लाखन सिंह राजपूत, व्यावसायिक शिक्षामंत्री कमला रानी, उपाध्यक्ष बुंदेलखंड विकास बोर्ड राजा बुंदेला, उपाध्यक्ष बुंदेलखंड विकास बोर्ड अयोध्या प्रसाद पटेल, मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार केवी राजू, सांसद भानू प्रसाद वर्मा, सांसद हमीरपुर-महोबा पुष्पेंद्र सिंह चंदेल, आयुक्त चित्रकूटधाम मंडल गौरव दयाल, जिलाधिकारी बांदा हीरा लाल तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी विशेषज्ञ, जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। 

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