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योग तपस्या के बीच मनाई प्रजापिता ब्रम्हाबाबा की 51 वीं पुण्यतिथि

ब्रम्हाबाबा परमात्मा शिव के साकार माध्यम-नीरा बहन 

फतेहपुर, शमशाद खान । दादा लेखराज ब्रम्हाबाबा की 51 वीं पुण्यतिथि सेवा केन्द्र कार्यालय में योग तपस्या के बीच मनाई गयी। वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। केन्द्र की संचालिका नीरा बहन ने कहा कि ब्रम्हाबाबा परमात्मा शिव के साकार माध्यम हैं। वे सर्वगुणों तथा कलाओं में निपुण मधुर स्वभाव एवं आकर्षक व्यक्तित्व के धनी थे। 
शहर के ज्वालागंज स्थित ओम शांति भवन सेवा केन्द्र पर पिता प्रजापिता ब्रम्हाबाबा की पुण्यतिथि गणमान्य भाई-बहनों के बीच माल्यार्पण करके योग तपस्या के बीच मनायी गयी। केन्द्र्र की संचालिका नीरा बहन ने उपस्थित लोगों को संदेश देते हुए कहा कि अलौकिक पुरूषों की जो भी कसौटिया हो सकती है वे दादा लेखराज पर पूरी खरी उतरती हैं। उनका पूरा जीवन वृतांत परमात्म सत्ता एवं परमात्म कार्य को सम्पन्न करने की कथा है। उन्होने बताया कि सन 1876 में सिंध में वैष्णव कृपलानी परिवार में जन्में दादा लेखराज बचपन से वृद्धावस्था तक एक साधारण ईश्र भक्त के ही रूप में कार्य व्यवहार किया। उनका हीरे जवाहरातों का व्यवसाय था वे सर्वगुणों तथा कलाओं में निपुण मधुर स्वभाव एवं आकर्षक व्यक्तित्व के धनी थे। 1936 में जब उनकी आयु 60 वर्ष की थी उस समय उनको परमात्मा शिव के ज्योति स्वरूप का साक्षात्कार हुआ। यह आकस्मिक एवं आनन्ददायक अनुभव
दादा लेखराज के चित्र पर पुष्प अर्पित करतीं बहनें।
उनके लिए महत्वपूर्ण था। इसके अतिरिक्त उन्होने विष्णु चर्तुभुज कलयुग के महाविनाश तथा सतयुगी दैवी सृष्टि के आगमन का भी दिव्य साक्षात्कार किया। इन अचानक हुए साक्षात्कारों से बाबा का मन संसार से न्यारा होने लगा परमात्मा शिव जो निराकार ज्योर्तिलिंगम् स्वरूप बिन्दु रूप है उन्होने कलयुगी पतित सृष्टि को दैवी सतयुगी सृष्टि बनाने तथा श्रेष्ठ आत्माओं में फिर से देवी देवताई गुणों का विकास करने के लिए निराकार परमात्मा शिव ने उस दिन से ही परकाया प्रवेश करके सभी को यह संदेश दिया कि सभी धर्म एवं जाति सम्प्रदाय के मनुष्य आत्मा-आत्मा हैं। भाई-भाई हैं और मैं निराकार शिव परमात्मा जिसे नूर ए खुदा, गाड फादर, एकोओंकार या सबका मालिक कहकर सभी पुकारते वही शिव परमात्मा हूं। जिनके निराकार स्वरूप को समस्त विश्व की आत्माएं ईश्वर के रूप में स्वीकार करते हैं। उसी समय परमात्मा शिव ने उनका दिव्य नाम प्रजापिता ब्रम्हा रखा। तब से बाबा ईश्वरीय रंग में रंग गये और उनमें अशरीरी पन का चुम्बकीय आकर्षण प्रतीत होने लगा। इस प्रकार परमात्मा शिव ने दादा लेखराज के मनुज तन के द्वारा ज्ञान की गंगा धरा पर लायी। धीरे-धीरे आत्मअनुभूति तथा परमात्म अनुभूति की ऐसी बयार बही जिसमें बहुत सी आत्माओं ने घर गृहस्थ में रहते अपना जीवन निर्विकारी, र्निव्यसनी एवं राजयोगी बनाया। नीरा बहन ने बताया कि 150 देशों से भी अधिक स्थानों पर ईश्वरीय ज्ञान एवं सहज के माध्यम से मनुष्य को देवता बनाने की सेवा कर रही हैं। जहां नर से श्री नारायण तथा नारी से श्री लक्ष्मी बनने की शिक्षा स्वयं भगवान दे रहे हैं। इस मौके पर ब्रम्हाकुमारी संगीता, प्रीति, प्रियंका, सीमा, संदीप, दिनेश आदि मौजूद रहे। 

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