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Thursday, January 2, 2020

धूमधाम से मनाया गया गुरू गोविन्द सिंह जी का 354 वां प्रकाश पर्व

विशाल भण्डारे में सर्व समाज के लोगों ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा

फतेहपुर, शमशाद खान । गुरू गोविन्द सिंह जी के 354 वें प्रकाश पर्व को लेकर सुबह से ही गुरूद्वारे में चहल-कदमी का माहौल शुरू हो गया था। गुरूद्वारे में सर्वप्रथम सब्द-कीर्तन का आयोजन किया गया। तत्पश्चात प्रार्थना सभा हुयी। जिसमें उपस्थित सर्व समाज के लोगों ने आपसी भाईचारा एवं एकता के लिए प्रार्थना की तत्पश्चात विशाल भण्डारे का आयोजन किया गया। जिसमें सर्व समाज के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सेदारी निभायी। 
गुरूद्वारे कमेटी के प्रमुख ज्ञानी गुरूवचन सिंह ने बताया कि सिखों के दसवें गुरू संत सिपाही महायोग तथा सरवंश दानी गुरू गोविन्द सिंह का जन्म 22 दिसम्बर सन 1666 में बिहार के पटना शहर में हुआ था। उनके पिता गुरू तेग बहादुर के ज्योति ज्योत समाने के उपरान्त 11 नवम्बर सन 1675 को उन्हें गुरू की पदवी प्रदान की गयी। वह एक महान योद्धा, कवि एवं आध्यात्मिक नेता थे। गुरू गोविन्द सिंह का प्रकाश पर्व यानी संकल्प का
गुरूद्वारे में पालकी साहिब एवं भण्डारे में प्रसाद छकते श्रद्धालु।
समय इसी बात का संदेश देता है। कथनी तथा करनी के कथन को सत्य करना सहज नहीं था। परन्तु उनका एकमात्र सहारा था। अकाल पुरख। ना कोउ बैरी ना ही बेगाना, सगल संग हम कउ बन आई। गुरू गोविन्द सिंह ने भक्ति व शक्ति का अदभुत मेल किया। उस समय हुकूमत हिन्दुओं के धार्मिक चिन्हों जनेऊ, तिलक आदि को अपमानित कर रही थी। उन्होंने धार्मिक व सामाजिक अत्याचारों से लड़ने व हिन्दुओं का खोया हुआ समान वापस दिलाने के लिए सन 1699 ई0 में बैसाखी के दिन खालसा पंथ की स्थापना की जो सिक्खों के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है। मानस की जात सभै एकै पहचानबो। गुरू गोविन्द सिंह ने सिखों के पवित्र गुरू ग्रन्थ साहिब को पूरा किया और इसे ही सिखों का शाश्वत गुरू घोषित किया। गुरू गोविन्द सिंह ने सत्य की खातिर अपना सर्वस्व ही दान कर दिया। वे एक ऐसे भक्त थे कि आनन्दपुर साहिब का किला छोड़ते समय जंग के मैदान में 250 सिंध तो शहीद करवा लिए पर आसा दी वार का नितनेम नहीं छोड़ा। उन्होंने जितने भी युद्ध लड़े कोई भी युद्ध न औरते के लिए न जमीन के लिए, न धन के लिए। सिर्फ और सिर्फ सत्य के खातिर लड़े व सभी युद्ध जीते। गुरूद्वारे में प्रार्थना सभा के पश्चात विशाल भण्डारे का आयोजन किया गया। जिसमें गणमान्य लोगों ने शिरकत करके लंगर का प्रसाद छका। भण्डारा देर शाम तक चलता रहा। इस मौके पर दर्पण सिंह, पपिन्दर सिंह, सतपाल सिंह सेठी, रिक्की, हरमंगल सिंह, वजिन्दर सिंह, शरण पाल सिंह, गोविन्द सिंह, जितेन्द्र पाल सिंह, मनजीत सिंह पम्पी, गुरमीत सिंह उमंग, कुलजीत सिंह सोनू, गुरप्रीत कौर ज्योति, हरविन्दर कौर आदि मौजूद रहे।

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