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Monday, January 27, 2020

बसन्त पंचमी 30 जनवरी 2020

माघ मास में शुक्ल पक्ष  की पंचमी को बसन्त पंचमी के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष बसंत पंचमी को लेकर पंचाग भेद भी है। इसलिए कुछ जगहों पर ये पर्व  29 और कई जगह उदया तिथि ग्राह्य होने से 30 जनवरी को सरस्वती देवी की पूजा अर्चना की जाएगी। दोनों दिन पूर्वाह्न व्यापिनी तिथि रहेगी। पंचमी तिथि 29 जनवरी को प्रातः 10ः45 से प्रारम्भ होकर 30 जनवरी को दिन 01ः19 तक रहेगी। बुधवार को वसंत पंचमी का शुभ मुहूर्त प्रातः 10.45 से 12.35 तक और 30 जनवरी गुरुवार को शुभ मुर्हूत  प्रातः 6.00 से 7.30 और  दिन 12ः20 से दिन 01ः19 श्रेष्ठ है। इस वर्ष 3 ग्रहों का स्वराशि योग निर्मित हो रहा है। मंगल वृश्चिक राशि पर, गुरु धन में और शनि मकर में रहेंगे।  सिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि का संयोग बनेगा।ये पर्व ऋतुराज बसन्त के आने की सूचना देता है। बसंत ऋतु में प्रकृति का सौंदर्य मन को मोहित करता है  अबूझ मुहूर्त होने से इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, पद भार, विद्यारंभ, वाहन, भवन खरीदना आदि कार्य अतिशुभ हैं। बसंत पंचमी भारत के आलावा बांग्लादेश और नेपाल में बड़े उल्लास से मनाई जाती है 
माँ सरस्वती को शारदा, वीणावादनी, वाग्देवी, भगवती, वागीश्वरी आदि नामों से जाना जाता है। इनका वाहन हंस है। बसंत पंचमी को देवी सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाते हैं  माँ सरस्वती विद्या, गीत-संगीत, ज्ञान एवं कला की  अधिश्ठात्री देवी है। इनको प्रसन्न करके इनके आर्शीवाद से विद्या, ज्ञान, कला प्राप्त किया जा सकता है। बसन्त पंचमी पर श्वेत वस्त्रावृत्ता माँ सरस्वती की प्रातः स्नान कर इनकी पूजा - अर्चना करनी चाहिए। इनके पूजन में दूध, दही, मक्खन, सफेद तिल के लड्डू, गेहँू की बाली, पीले सफेद रंग की मिठाई और पीले सफेद पुष्पों को अर्पण कर सरस्वती के मंत्रों का जाप करना चाहिए। इस दिन पीले वस्त्र पहनने चाहिए और पीले रंग की खाद्य सामग्री के अधिकाधिक सेवन की भी परम्परा है। बसन्त पंचमी के दिन किसान लोग नये अन्न में गुड़-धृत मिश्रित करके अग्नि तथा पितृ- तर्पण करते है।  
भगवान श्री कृष्ण इस बसन्त उत्सव के अधिदेवता है । ब्रज में इस दिन से बड़ी धूम-धाम से राधा- कृष्ण की लीलायें मनाई जाती है। बसंत पंचमी पर कामदेव और रति का पूजन भी किया जाता है। इस दिन से फाग उड़ाना (गुलाल) प्रारम्भ करते है और चैराहों पर अरड़ की डाल होलिका दहन के स्थानों पर लगाई जाती है -ज्योतिषाचार्य एस0एस0 नागपाल , स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज, लखनऊ

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