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हजरत मिस्कीनशाह वारसी का 101वां उर्स शुरू

चादरपोशी, लंगर करने वालों की पहुंच रही भीड़  

बांदा, कृपाशंकर दुबे । कौमी एकता का प्रतीक हजरत मिस्कीन शाह वारसी का 101वां चार दिवसीय सालाना उर्स मंगलवार की सुबह कुरानख्वानी और रस्मे संदल के साथ शुरू हो गया। नरैनी रोड स्थित हजरत मिस्कीन शाह वारसी की दरगाह में देश भर से अकीदतमंदों का आना शुरू हो गया है। दरगाह और उसके आसपास सैकड़ों दुकानें सजने लगी हैं। दरगाह में फातिहा पढ़ने और चादरपोशी, गुलपोशी करने, मन्नत मांगने और लंगर
दरगाह जुलूस निकालते वारसी एहरामपोश व अकीदतमंद
करने वालों की भीड़ पहुंच रही है। इस दरगाह की सबसे खास बात यह है कि यहां हिन्दू और मुस्लिम, सभी धर्मों के लोग आपस में मिल-जुलकर इस दरगाह के उर्स में हिस्सा लेते हैं, जिससे यहां एक आपसी सौहार्द का माहौल बना रहता है। मंगलवार की सुबह दरगाह में कुरान ख्वानी और रस्मे संदल अदा की गई। दोपहर बाद इर्दगाह चैराहे के पास स्व. सगीर उर्फ सग्गन मास्टर के आवास में खानकाही कव्वालियों की महफिल सजी, जिसमें कव्वाल पार्टी, वकील ताज जहांगीरी बेलाताल, वकील साबरी बांदा, दिलवर ताज बांदा, शहजादे बांदा आदि ने अपने-अपने खानकाही कलाम सुनाए और वारसी अकीदतमंदों ने कव्वालों को दिल खोलकर नजराना दिया। इसके बाद सग्गन मास्टर के आवास से चादर जुलूस उठाया गया जो खानकाही कव्वालियों के साथ गूलरनाका स्थित दरगाह के मुतवल्ली कसीमुद्दीन वारसी के आवास पहुंचा। कसीमुद्दीन वारसी के आवास में भी खानकाही महफिल सजाई गई। यहां भी कव्वालों ने कलाम सुनाए और काफी देर तक यह महफिल चलती रही। देर शाम यहां से यह चादर जुलूस उठकर अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ नरैनी रोड स्थित हजरत मिस्कीन शाह वारसी की दरगाह पहुंचा, जहां वारसी अकीदतमंदों ने दरगाह में चादरपोशी की। फातिहा खानी हुई। इस अवसर पर वारसी एहरामपोश तगयुर शाह वारसी कानपुर, बेनजीर शाह वारसी लखनऊ, शराफत बाबा कानपुर, मुनव्वर शाह वारसी, हसीन शाह वारसी और दरगाह के खादिम अजमल शाह वारसी के साथ-साथ सैकड़ों की संख्या में वारसी सिलसिले के मानने वाले लोग मौजूद रहे। 

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