नागरिकता संशोधन बिल असंवैधानिक- विद्याभूषण रावत - Amja Bharat

Amja Bharat

All Media and Journalist Association

Breaking

Advt.

Advt.

Post Top Ad

Responsive Ads Here

Thursday, December 12, 2019

नागरिकता संशोधन बिल असंवैधानिक- विद्याभूषण रावत

अम्बेडकर व गांधी के विचारों का बताया अपमान
मंहगाई, बेरोजगारी एव गिरती अर्थव्यवस्था से सरकार लोगो का हटाना चाहती ध्यान 

फतेहपुर, शमशाद खान  । केंद्र सरकार द्वारा लाया गया नागरिकता संशोधन विधेयक असंवैधानिक एवं धार्मिक तुष्टिकरण पर आधारित है। सेक्युलर देश की जनता पर इस तरह के कानून थोपा जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उक्त बातें राजनैतिक विश्लेषक विद्या भूषण रावत एव समाजिक कार्यकर्ता संगीता ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही। गुरुवार को समाजिक कार्यकर्ता मो0 आसिफ एडवीकेट के आवास में पत्रकारों से वार्ता करते हुए राजनैतिक विश्लेषक विद्या भूषण रावत ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा पास करवया गया नागरिकता संशोधन बिल धार्मिक आधार पर बनाया गया असंवैधानिक कानून है। इस कानून से देश में रह रहे पाकिस्तान, बंगलादेश एव अफगानिस्तान से आये हिन्दू, बौद्ध, सिख, ईसाइयों को नागरिकता तो दी जायेगी लेकिन इन देशों से आये हुए मुस्लिमो को नागरिकता से वंचित किया जायेगा। देश का सेक्युलर कानून धर्मिक आधार पर नागरिकता देने वाले 
पत्रकारो से बातचीत करते राजनैतिक विश्वेलषक विद्याभूषण रावत।
कानून को बनाने की इजाजत नही देता उसके बाद भी केंद्र सरकार द्वारा आरएसएस के एजेंडे पर चलते हुए कानून को बनाया गया है। संख्या बल के आधार पर विधेयक को पास कराना तानाशाही करने जैसा है। साथ ही कहा कि कानून को बनाया जाना सावरकर एव जिन्ना के विचारों की जीत है। श्री रावत ने इस कानून को मुसलमानों को डराने वाला बताते हुये कहा कि यह विधेयक देश मे बढ़ती मंहगाई बेरोजगारी, गिरती, अर्थव्यवस्था एव पूर्वोत्तर मे लागू की गयी एनआरसी की विफलता से लोगों का ध्यान बंटाने के लिये लाया गया है। देश मे मंहगाई चरम पर पहुंच गई है लोग बड़ी संख्या में बेरोजगार हो रहे है। सरकार अपनी नकामी छिपाने के लिये देशवासियो को हिन्दू मुस्लिम में बांटने का काम कर रही है। सरकार द्वारा पूर्वोत्तर में लागू की गयीं एनआरसी जिसमे लगभग 19 लाख नागरिकों को सूचीबद्ध करने से वंचित कर दिया गया है नागरिकता संशोधन बिल के जरिए मुस्लिमो को छोड़कर सभी को नागरिकता तो मिल जायेगी जबकि देश के मुसलमानों को धर्मिक आधार पर नागरिकता से वंचित कर दिया जायगा जो कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने इस विधेयक को मुसलमानों के साथ भेदभाव करने वाला असंवैधानिक एव बाबा साहब भीमराव अंबेडकर एव राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों के विपरीत बताते हुए राष्ट्रपति एव सर्वोच्च न्यायालय से बिल को रद्द करने की मांग किया। 

No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Responsive Ads Here

Pages