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सिंहवाहिनी देवी मंदिर में ज्ञान यज्ञ का किया जा रहा आयोजन

ज्ञान यज्ञ में उपदेशों को ग्रहण कर रहे श्रोता 

बांदा, कृपाशंकर दुबे । गीता जयंती महोत्सव के उपलक्ष्य में गीता संस्थान समिति के तत्वावधान में श्रीमद्भगवद गीता ज्ञानयज्ञ का आयोजन शहर के कटरा स्थित प्राचीन देवी मंदिर श्रीसिंहवाहिनी मंदिर में किया गया। जिसमें दूरदराज से आए विद्वान संत महात्माओं ने श्रीमद्भागवतगीता से जुड़े प्रसंग सुनाकर श्रोताओं को गीता के उपदेशों को जीवन में उतारने और जीवन रूपी भवसागर से पार होने का माध्यम बताया। 
कटरा में आयोजित ज्ञान यज्ञ के दौरान मौजूद संत महात्मा 
शहर के सिंहवाहिनी मंदिर में वेदांती आश्रम चित्रकूट के महंत रामकृष्ण देवाचार्य वेदांती जी महराज की पे्ररणा से आयोजित तीन दिवसीय ज्ञान यज्ञ में चित्रकूट के दण्डी स्वामी श्रीश्री 1008 स्वामी महेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए गीता के ज्ञान का सार बताया। कहा कि कर्म करने के बाद फल की प्राप्ति की चिंता अपने ऊपर न लेकर प्रभु पर छोड़ देनी चाहिए। प्रयागराज से आए स्वामी गीता बाबा महाराज ने कहा कि महिलाओं को एकादशी का व्रत और बच्चों को गीता पाठ, पाठन की प्रेरणा देनी चाहिए, यदि बच्चे शुरू से ही गीता का पाठ करेंगे और उसके आदर्शों को जीवन में ढालेंगे तोे निश्चित ही वह संस्कारवान होंगे। जालंधर (पंजाब) के अजेशस्वरूप ब्रह्मचारी ने बताया गीता के तीसरे अध्याय की व्याख्या करते हुए कर्म के महत्व को समझाया। कार्यक्रम संयोजक प्रद्युम्न कुमार लालू दुबे ने हिंदू धर्म में गीता के महत्वपूर्ण स्थान पर चर्चा करते हुए कहा कि गीता ही एक मात्र ऐसा धर्मग्रंथ है जिसकी जयंती मनाई जाती है। इस मौके पर अनुराग शुक्ला, डा.गयाप्रसाद त्रिपाठी समेत समिति के सभी पदाधिकारियों व सदस्यों ने पूर्व मंत्री जमुना प्रसाद बोस व शिव विशाल शुक्ला को सम्मान पत्र, शाल, श्रीफल व मिष्ठान देकर सम्मानित किया। वहीं समिति के उपाध्यक्ष दिनेश कुमार दीक्षित, उपमंत्री निखिल सक्सेना, वरिष्ठ सदस्य विश्राम सिंह व हरीराम सिंह ने संतों को विदाई स्वरूप दक्षिणा, श्रीफल, शॉल, मिष्ठान्न व स्मृति चिन्ह देकर उन्हें सम्मानित किया व उनका आशीर्वाद लिया।

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