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सदगुरु का सानिध्य करा सकता है ईश्वर का दीदार: त्यागी

रामकथा के जरिए दिया नारी का सम्मान करने का संदेश 

बांदा, कृपाशंकर दुबे । सोमवार को श्रीराम कथा के छठवें दिन महामंडलेश्वर स्वामी जगत प्रकाश त्यागी ने नारी का सम्मान करने का संदेश दिया। उन्होंने इस दौरान एक ऐसे भक्त की गाथा बयां की, जो भाषा से अनिभज्ञ ग्रामीण और गरीब है। रामचरित मानस में इस पात्र का वर्णन चंद चैपाइयों में आता है। लेकिन इन चैपाइयों का बड़ा गहरा मर्म है। यह भक्त केवट प्रभु राम के प्रति अथाह प्रेम से भरा हुआ है। जो यह कहता है कि मैं प्रभु के मर्म का जानता हूं। एक साधारण सा व्यक्ति होकर भी केवट प्रभु के समक्ष जो बात कहता है वही बात आज हमारा प्रत्येक धार्मिक ग्रंथ व शास्त्र भी कहता है कि परमात्मा के मर्म को जाना जा सकता है।
श्रीराम कथा सुनाते कथावाचक जगत प्रकाश त्यागी
मृत्युंजय मानस परिवार के तत्वाधान में संकट मोचन के सामने स्थित जहीर क्लब ग्राउंड में कथा व्यास ने कहा कि प्रत्येक भक्त ने प्रत्येक महापुरुष ने उस परमात्मा को देखने की बात कही। मगर आज हम उस प्रभु को देखने की बात पर विश्वास नहीं करते क्योंकि हमारे समक्ष किसी ने उसे देखने या दिखाने की बात ही नहीं की। जब एक पूर्ण सद्गुरु का सान्निध्य मिलता है तो जीव अपने अतंरूकरण में ईश्वर का दीदार कर सकते है। केवट प्रसंग के दौरान कथा व्यास ने उनके जानकी के प्रति सम्मान भाव को देखते हुए समाज को भी नारी के प्रति आदर भाव
मौजूद श्रोतागण
रखने का संदेश दिया। उन्होने कहा कि वैदिक काल से ही हमारे ऋषियों ने नारी को पूजनीय और सम्मानीय बताया। परंतु आज नारी की दशा दयनीय है। हर क्षेत्र में सम्मानित नारी के साथ अपराध की प्रवृति दिन प्रतिदिन बढ़ती चली जा रही है। उसे मात्र भेग की वस्तु समझा जा रहा है। नारी की ऐसी दशा का कारण उसकी अज्ञानता है। इसलिए उसे भीतर से जागरूक होने की जरूरत है और यह जागरूकता नारी में तभी संभव है जब वह धर्म से जुड़ जाएगी। आज परमात्मा की अनुभूति की प्रत्येक व्यक्ति को जरूरत है।

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