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नागरिकता संशोधन बिल के विरोध में कई संगठनों के साथ नमाजी सड़कों में उतरे

प्रदर्शन करके राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन तहसीलदार को सौपा
प्रस्तावित विधेयक को वापिस लेने की भरी हुंकार 

कालपी (जालौन), अजय मिश्रा । प्रस्तावित नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर कालपी की सड़कों में नागरिकों का गुस्सा फूट पड़ा। शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद हजारों नमाजियों ने उलमा-ए-अहले सुन्नत अमन कमेटी के तत्वाधान में कार्यकर्ताओं के साथ प्रदर्शन करके तहसीलदार को राष्ट्रपति संबोधित चार सूत्रीय ज्ञापन सौपकर विरोध जताया।

शाही जामा मस्जिद, खानकाह मुहम्मदिया मस्जिद, शुभान मस्जिद हरीगंज, तहसील मस्जिद, मुढ़िया गुम्बद मस्जिद, मख्दूमिया मस्जिद मनीगंज तथा बड़ी मस्जिद में जुमे की नमाज समाप्त होते ही दोपहर ढ़ाई बजे हजारों नमाजी जुल्हैटी चैराहे में एकत्रित हुये। मुफ्ती-ए-शहर अशफाक अहमद बरकाती की अगुवाई में विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता एवं नागरिक जुलूस के शक्ल में प्रस्तावित विधेयक-2019 को वापिस लेने की मांग को लेकर नारेबाजी करते हुये निकल पड़े। हाथों में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा एवं पट्टियां लेकर प्रदर्शनकारियों का जुलूस हरीगंज चैराहा से होकर फुलपावर बाईपास चैराहे में पहुँचकर विरोध सभा के रूप में परिवर्तित हो गया। इस मौके पर अपने सम्बोधन में मुफ्ती अशफाक अहमद बरकाती ने कहा कि यह अधिनियम संविधान प्रस्तावना का उल्लंघन है और हमारे संविधान की मूल संरचना के विरुद्ध है। स्वतंत्र संग्राम के मूलभूत मूल्यों के विरुद्ध है। ब्।ठ के

विरोध का मतलब ब्।ठ आधारित राष्ट्रव्यापी एन.आर.सी का विरोधी है। जो भेदभाव पूर्ण और अंसवैधानिक है। यदि इस विधेयक पर राष्ट्रपति हस्ताक्षर कर देते हैं तो धर्म हमारी नागरिकता का आधार बन जायेगा। जिसे हमारे स्वतंत्रता संग्राम ने अस्वीकार कर दिया था।  इसी क्रम में बड़ी मस्जिद के पेश इमाम हाफिज इरशाद बरकाती ने कहा कि ब्।ठ प्रवासियों को नागरिकता प्रदान करने के लिए एक रास्ता साफ करता है और नागरिकता मुहैय्या कराने का इसका कानूनी प्रावधान धर्म पर आधारित हैं। यह कानून गलत दिशा में एक खतरनाक मोड़ है। उन्होंने कहा कि इस नागरिकता संशोधन अधिनियम विधेयक पर माननीय राष्ट्रपति हस्ताक्षर नहीं करें और इसे पुनर्विचार के लिए सदन को लौटा दे। 
इस मौके पर मौलाना अब्दुर रउफ, मौलाना तारिक बरकाती, पूर्व विधायक प्रतिनिधि सुरेंद्र सिंह सरसेला, मौलाना जाहिद अली, मौलाना जियाउद्दीन, कारी अमानत अली, मौलाना इमरान मिशवाही, हाफिज दावर रजा, मौलाना रिजवान, हाजी मुजीब अल्लामा, चैयरमैन प्रतिनिधि जगजीवन अहिरवार, पूर्व पालिकाध्यक्ष कमर अहमद, शिवबालक सिंह यादव, हरमोहम सिंह यादव, वीरेंद्र सिंह चैहान, अजहर बाबा, इमरान अंसारी सभासद, इरफान अंसारी प्रमुख रूप से मौजूद रहे। सुरक्षा के दृष्टिकोण से कोतवाल मानिकचंद्र पटेल, कुठौंद थानाध्यक्ष सुधाकर मिश्रा, चुर्खी, आटा, कदौरा थाना पुलिस के अलावा अतिरिक्त पुलिस जवान चप्पे-चप्पे में तैनात रहे। नायब तहसीलदार राजेश कुमार पाल तथा खुफिया तंत्र भी सक्रिय रहा।

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