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भू-माफियाओं के खेल से न्यू कालोनी वासियों के आशियाने दांव पर

राजस्व अभिलेख में भू-माफियाओं ने किया खेल, तालाबी भूमि पर कर दी प्लाटिंग
एसडीएम के आदेश से जीवनभर की कमाई डूबने की कगार पर, लोगों में मायूसी

फतेहपुर, शमशाद खान । उच्च न्यायालय के एक आदेश के बाद बड़ी आबादी को तालाबी क्षेत्र घोषित करने के जिला प्रशासन की कार्रवाई से ज्वालागंज वॉर्ड के नई कालोनी निवासियों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही है। अपनी जीवन भर की कमाई दांव पर लगाकर आशियाना बनांकर रहने वाले लोग जिला प्रशासन व माफियाओ के हाथों ठगा हुआ महसूस कर रहे है।
तालाबी नम्बर पर अवैध कब्जा करते भूमाफिया। 
लगभग दो दशक पूर्व माफियाओं द्वारा प्रशासनिक मशीनरी से सांठगांठ कर नई कालोनी ज्वालागंज के नाम से नई आबादी में प्लाटिंग की शुरुआत की गयीं देखते ही देखते दूर दराज के गांव व किराए के मकान में जीवन यापन करने वाले मध्यमवर्गीय परिवारो द्वारा मामूली जानकारी करने के बाद प्लाटों की खरीदारी कर अपने जीवन भर की पूँजी को निवेशित कर उस पर आशियाना बनाकर जीवन यापन करना शुरू कर दिया। नई कालोनी में उन मकानों की भी बड़ी संख्या है। जिन्होंने भवनों के निर्माण में प्रशासनिक अनुमति हासिल करने के साथ बाकायदा नक्शा भी पास हुआ। लेकिन इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर प्रशासनिक अफसरों द्वारा मकानों के 22 बीघा के हिस्से को तलाबी नम्बर घोषित कर दिया। जिला प्रशासन की इस कार्रवाई की भनक लगते ही मकान मालिकों में हड़कंप मच गया। सभी ने भवन स्वामी अपने मकानों की रजिस्ट्री एवं सरकारी नक्शा पास होने की बात करते हुए इसे प्रशासन की एक तरफा कार्रवाई बताया। प्रशासन की इस कार्रवाई से समूचे क्षेत्र के लगभग साढ़े तीन सौ अधिक मकानों की आबादी का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया है। जिला प्रशासन की ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाई की बात सुनकर लोगो के मन मे सिहरन दौड़ जाती है। प्लाट की खरीद, रजिस्ट्री, निर्माण से लेकर नगर पालिका परिषद तक सभी सरकारी प्रक्रिया मानने व टैक्स अदा करने के बाद भी इस तरह के व्यवहार व अपने जीवन भर की कमाई दांव में लगने की बात कहते हुए लोगो की आंखे आंसुओ से भर जाती है।
आगरा जनपद में तालाबी नम्बर की भूमि में पाँच सितारा होटल बनाये जाने की घटना पर निर्णय देते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने होटल को गिराने व प्रदेश के सभी जिला अधिकारियों को तालाबों से अवैध कब्जे खाली कराने के निर्देश दिए। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के बाद 20 नवम्बर को एडीएम सदर प्रमोद कुमार झा द्वारा शहर के न्यू कालोनी ज्वालागंज स्थित 22 बीघे की इस भूमि के दस्तावेजों में तालाबी नम्बर दर्ज करने का आदेश कर दिया। उप जिलाधिकारी का आदेश मिलते ही तहसील प्रशासन द्वारा भूमि के दस्तावेजो में तालाब के रूप में दर्ज हो गया है। एसडीएम के आदेश की जानकारी प्लाट खरीदारों को मिली तो लोगों के पाँव तले जमीन निकल गयी। सभी अपने-अपने दस्तावेजों को लेकर तहसील पहुंचे जहां प्रकरण की जानकारी मिलने पर खरीदारों को माफियाओ द्वारा ठगे जाने का एहसास हुआ। शहर के नामी गिरामी भूमाफियाओं द्वारा वर्ष दो हजार के लगभग षणयंत्र की इबारत लिखते हुए पूर्व में तलाबी नम्बर रखी भूमि को राजस्व विभाग से सांठगांठ कर दस्तावेजों में जमीन को भूमिधरी दर्ज करवा दिया और बड़ा खेल करते हुए भोले भाले लोगो को नई आबादी के नाम पर भूखण्डों को बेचा गया। इस खेल में शहर के कई सफेदपोश भूमाफिया जो अब राजनैतिक चोला ओढ़ चुके है। पावर आफ अटॉर्नी लेकर खुद बाकायदा रजिस्ट्री भी की गयी। लोगों ने राजस्व अभिलेखों की मामूली जाँच पड़ताल कर भूमि की हाथों-हाथों बिक्री कर मकानों के निर्माण शुरू कर दिया। और लगभग 20 वर्षो के अंतराल पर कुम्भकर्णी नींद से जागे जिला प्रशासन द्वारा भूमि को तालाबी नम्बर बताते हुए दस्तावेजों में इसे दर्ज कर दिया गया। ऐसे में लगभग साढ़े तीन सैकड़ा मकानों पर करवाई की तलवार लटकती नजर आ रही है। मकान मालिकों में भूमाफियाओं व जिला प्रशासन को लेकर बेहद आक्रोश देखने को मिल रहा है भवन स्वामियों के कहना है कि उन्होंने तो पूरी जांच परख कर भूखण्ड की खरीद की थी। राजस्व दस्तावेजों में यदि कोई हेर फेर की गयी थी तो उसमे खरीददार का कोई दोष नही उसके बाद भी जिला प्रशासन से बाकायदा नक्शा बनवाकर निर्माण की अनुमति भी ली गयी। यदि कही कोई त्रुटि थी तो अनुमति किस आधार पर दी गयी। जिला प्रशासन द्वारा किसी तरह की नोटिस मिलने पर जवाब देने के लिये अधिवक्ताओ से राय लेने व एकतरफा कार्रवाई के खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाये जाने की बात कही। वही मामले को लेकर इस संदर्भ में तहसीलदार सदर विदुषी सिंह का कहना रहा कि एसडीएम के आदेश पर भूमि को दस्तावेजो में तालाब दर्ज कर दिया गया है। नगर पालिका परिषद द्वारा सभी को नोटिस जारी करके उनसे सम्बंधित दस्तावेज देखने के बाद आगे की करवाई की जायेगी।

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