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हल्दी की खेती से किसान हुये सरसब्ज, बने दूसरों के नजीर

हमीरपुर, महेश अवस्थी । परम्परागत खेती से नाता तोड़कर राठ और सरीला क्षेत्र के तमाम किसान औद्यानिक और औषधीय खेती कर समृद्ध हो रहे हैं और वे लोगों को नजीर पेश कर रहे हैं कि हल्दी, पामारोजा, अश्वगन्धा, तुलसी की खेती कर आर्थिक रूप से समृद्ध हो रहे हैं। राठ तहसील के औड़ेरा के कौशल किशोर पिछले 15 साल से इस अभियान में लगे हैं। इस इलाके के किसानों को पिपरमेन्ट और लेमन ग्रास की खेती के लिये उन्होंने प्रोत्साहित किया। खुद हल्दी और पामारोजा की खेती कर रहे हैं। उद्यान विभाग ने उनके इस सराहनीय कार्य पर
किसान दिवस में सम्मानित किया। जिले के अन्य क्षेत्रों से आये किसानों ने उनकी इस पहल को सराहा और उनसे खेती के गुर सिखने आये। 03 हे0 में पामारोजा की फसल के साथ एक हे0 में हल्दी की फसल उद्यान विभाग के वैज्ञानिकों की सलाह पर कराया। अब वे इस हल्दी को पिसवा कर पैकेट बनाकर बाजार में बेंचेगे। इससे उद्यमता की राह खुलेगी और मुनाफा भी अच्छा होगा। उन्होंने बताया कि पामारोजा के लिये उन्हें पहला पुरस्कार मिल चुका है। एक एकड़ में 42 लीटर तेल निकलता है जो 1800 रु0 प्रति लीटर बिकता है। इसी प्रकार सरीला क्षेत्र के खेड़ा शिलाजीत के 42 वर्षीय किसान श्यामसुन्दर राजपूत ने एलएलबी तक शिक्षा हासिल की, मगर उन्होंने वकालत की जगह खेती, किसानी को तरजीह दी और वे भी किसानों के लिये लेमनग्रास के जरिये एक नजीर पेश किये हैं।

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