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‘मिट्टी के स्वास्थ्य प्राकृतिक संसाधन के संरक्षण की है जरूरत’

नमसा कार्यक्रम व किसान मेला का हुआ आयोजन

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। मृदा दिवस के अवसर पर स्वस्थ धरा खेत हरा के लिए ानल मिशन फाॅर सस्टेनेवल एग्रीकल्चर (नमसा) योजनान्तर्गत मृदा स्वास्थ्य कार्ड कार्यक्रम एवं किसान मेला विकास खण्ड कर्वी के ग्राम कहेटामाफी में आयोजित किया गया। जिला कृषि रक्षा अधिकारी धर्मेन्द्र अवस्थी ने कहा कि मिट्टी के स्वास्थ्य प्राकृतिक संसाधन जल, जंगल, जमीन और जानवर को संरक्षित करने की आवश्यकता है। इसकी जागरूकता के लिए पूजन एवं दिवस की परम्पराएं बनाई गयी जो एक दूसरे के पूरक हैं तथा इनके द्वारा ही स्वच्छ वातावरण एवं पर्यावरण द्वारा सभी जीवधारी स्वस्थ रह सकते हैं। गायों के गौमूत्र से जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत, गोबर की खाद, नैडेप, वर्मीकम्पोस्ट खाद, कीटनाशकों को बनाकर प्रयोग करें तभी रसायनिक दुष्प्रभावों को दूर कर जैविक खेती द्वारा कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर कृषक आय में वृद्धि दो गुनी कर सकते हैं। साथ ही कीट, रोग की समस्या के समाधान को व्हाट्सएप् नम्बर 9452247111 एवं 9452257111 पर रोग कीट ग्रसित

फसल की फोटो व अपना विवरण भेजकर 48 घंटे के अन्दर समाधान प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही बीज उपचार भण्डारण की विस्तृत जानकारी दी। विषय विशेषज्ञ सुनील कुमार सिंह ने संचालन करते हुए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में ऋणी कृषकों को बैंक द्वारा एवं गैर ऋणी कृषकांें को जनसेवा केंद्र द्वारा अंतिम तिथि 31 दिसम्बर तक अधिसूचित फसलों को बीमित कराने की प्रक्रिया पर चर्चा करते हुए कृषकों की शंकाओं एवं क्लेम आदि समस्याओं पर चर्चा की। साथ ही प्रधानमंत्री किसान मानधन (पेंशन) योजना से 18 से 40 वर्ष के कृषकों को पंजीकरण कराकर 60 वर्ष की आयु प्राप्त करने पर रूपया तीन हजार मासिक पेंशन के रूप में आजीविका के लिए प्राप्त की जानकारी, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन द्वारा दलहन एवं तिलहन उत्पादन को प्रदर्शन, मृदा स्वास्थ्य कार्ड में लाल हरे रंग के अनुसार मृदा में उपलब्ध पोषक तत्वों के अभावग्रस्त बहुत कम एवं पर्याप्त उपलब्धता की जानकारी एवं खेत तालाब योजना, बीज ग्राम योजना के साथ ही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के वंचित कृषकों के प्रश्नों के जवाब में त्रुटि रहित डाटा यथा नाम मिसमेच, आधार संख्या, खाता संख्या आदि के संशोधन प्रक्रिया के बारे में बताया। कृषि अपशिष्टों यथा पराली घास-फूस, पुआल आदि को जलाने पर दण्डात्मक कार्यवाही होने व फसल अवशेष प्रबंधन को इन सी टू योजना के अन्तर्गत कृषि यंत्र हैप्पी सीडर, पेडी स्ट्राचापर, श्रेडर, मल्चर, सुपर इस्ट्रामैनेजमेण्ट सिस्टम आदि यंत्रों के प्रयोग से अपषिष्टों को काटपिट कर, मिलाकर, सड़ाकर खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ाने पर जागरूक किया। सौरभ अवस्थी उप प्रबंधक बेसिक्स संस्था हैदराबाद ने बताया कि कृषको की आय दोगुनी करने को विभिन्न विषय विशेषज्ञों द्वारा बतायी गयी नवीनतम कृषि तकनीकी के प्रयोग के साथ किसी भी प्राकृतिक आपदा एवं रोके न जा सकने वाले जोखिमों से बचने के लिए सुरक्षा के रूप में फसल बीमा को अनिवार्य रूप से कराया जाए। 20 हे से अधिक क्षेत्रफल की फसल अधिसूचित न होने पर ग्राम प्रधान द्वारा प्रस्ताव भेजकर कृषि विभाग द्वारा उक्त फसल को अधिसूचित कराया जा सकता है। बीमित फसल के किसी भी प्राकृतिक आपदा से 72 घंटे के अन्दर कृषक क्लेम को सूचित करने की विस्तृत जानकारी ंदी। कार्यक्रम में संबंधित अधिकारी व ग्रामीण मौजूद रहे।

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