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नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ वामपंथी दलों ने दिया धरना

फतेहपुर, शमशाद खान । नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ विरोध के स्वर लगातार जारी हैं। गुरूवार को वामपंथी दलों ने भी कैब के विरोध में नहर कालोनी में धरना देकर अपनी आवाज बुलन्द करते हुए इसे संविधान का उल्लंघन बताया। केन्द्र सरकार के खिलाफ जमकर भड़ास निकालते हुए राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन उप जिलाधिकारी को सौंपकर बिल को तत्काल वापस लिये जाने की मांग उठायी। 
नहर कालोनी में धरना देते वामपंथी दलों के कार्यकर्ता।  
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी माक्र्सवादी, लोकतांत्रिक जनता दल व राष्ट्रीय लोकदल के बैनर तले बड़ी संख्या में लोग नहर कालोनी में एकत्र हुए। जहां नागरिकता संशोधन बिल का पुरजोर विरोध किया। वक्ताओं ने कहा कि संसद के दोनों सदनों ने नागरिकता संशोधन बिल को पारित कर दिया है। यह बिल भारत के संविधन का पूरी तरह से उल्लंघन करता है और इसका लक्ष्य भारतीय गणतंत्र की धर्म निरपेक्ष, लोकतांत्रिक बुनियादों को तबाह करना है। यह बिल नागरिकता को किसी व्यक्ति की धार्मिक सम्बद्धता के साथ जोड़ता है जो धर्म निरपेक्षता के सरासर खिलाफ है। इस बिल का लक्ष्य देश में साम्प्रदायिक फूट और सामाजिक धु्रवीकरण को और अधिक तेज करता है। जो देश की एकता और अखण्डता के लिए हानिकारक है। वामपंथी दलों ने धरने के पश्चात राष्ट्रपति को सम्बोधित चार सूत्रीय ज्ञापन उपजिलाधिकारी को सौंपकर मांग किया कि भारतीय संविधान की प्रस्तावना के खिलाफ कोई भी कदम न उठाया जाये, नागरिक संशोधन बिल वापस लिया जाये, देश के विभिन्न हिस्सों में नागरिक संशोधन बिल के खिलाफ आन्दोलनकारियों पर दर्ज मुकदमें वापस लिये जायें, जामिया, जेएनयू सहित देश के विभिन्न विश्वविद्यालय व कालेजों के छात्रों पर किये जा रहे दमनात्मक कार्रवाई को रोका जाये तथा उनके खिलाफ दर्ज किये गये मुकदमे वापस लिये जायें। इस मौके पर रोधेश्याम यादव, प्रभास नारायण द्विवेदी, मोतीलाल एडवोकेट, हरिशंकर, जगरूप भार्गव, राधेश्याम यादव, जावेद जाफरी, राम प्रकाश, जगन्नाथ, सुमेर सिंह, सुमन सिंह चैहान, दिलशाद अहमद, हाजी मो0 हारून, राम प्यारे प्रजापति, वसील उद्दीन, राम कृपाल कश्यप, रामनरेश सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। 

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