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लोकार्पण समारोह एवं लघु काव्य गोष्ठी

मर्चेट चेंबर हाल कानपुर जन संस्कृति मंच के तत्वधान में सुप्रसिद्ध साहित्यकार प्रभा दिछित की तीन पुस्तकें हर नजर भीगी हुयी है, हिंदी में समकालीन हस्ताक्षर, समीक्षाकृति) भूण्डलीयकरण के परिप्रेक्ष्य में संस्कृति दलित एवं उत्तर आधुनिक विमर्श (चिन्तनकृति) लोकार्पण एवं लघु काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता प्रसिद्ध जनवादी कवि कमल किशोर श्रमिक ने की अपने अध्यक्षीय वक्तव्य मैं समिति ने कहा कि डॉ प्रभा दीक्षित गद्दे वन काव्य दोनों विधाओं में आम आदमी के पक्ष में सामान अधिकार से कलम चलाने वाली है कैसी वरिष्ठ लेखिका है जिनकी लेखनी में आज आदमी की त्रासदी जिजीविषा और वर्ग संघर्ष को वाली मिली है वे सामाजिक सरकारों से जुड़ी हुई जन पक्षधर रचनाकार के रूप में हिंदी साहित्य का गौरव बढ़ा रही हैं

कानपुर गौरव शुक्ला:- मुख्य अतिथि के रुप में लखनऊ से पधारे जसम के प्रदेश अध्यक्ष एवं रेवंत पत्रिका के संपादक कौशल किशोर जी ने कहा कि डॉ प्रभा की गजलें दुष्यंत कुमार और अदम गोंडवी की परंपरा को आगे बढ़ाने वाली गजलें हैं जो बिना किसी नजाकत एवं नफासत की व्यवस्था कदम को रेखांकित करती हैं उनकी पुस्तक हिंदी के समकालीन हस्ताक्षर एवं एक ऐसी प्रति है जो ऐसे अनेक समर्थ समकालीन हस्ताक्षर ओं को प्रतिष्ठित करती है जो आलोचकों के द्वारा उपेक्षित किए गए हैं

विशिष्ट अतिथि के रुप में उन्नाव से आए हुए युवा साहित्यकार दिनेस प्रिय मन्ने डॉ प्रभा दीक्षित की पुस्तक भूण्डलीयकरण के परिप्रेक्ष्य में संस्कृति दलित एवं उत्तर आधुनिक विमर्श पर बोलते हुए कहा कि लगभग 3 दशकों के बाद विश्व व्यापार संगठन में हस्तक्षेप करने के बाद कथित भूण्डलीयकरण के नतीजे आम भारतीय समाज और जीवन पर साफ तौर पर देखे जा सकते हैं प्रभा जी का अनेक विधायक सचिन हमारे समय का वस्तुनिष्ठ अनुशीलन तो है ही हिंद की प्रगतिशील वैचारिक परंपरा के निर्वाह किस सचेतन कोशिश भी है

अपने आधार वक्तव्य में डॉ ज्योति किरण ने कहा कि साहित्य की लगभग सभी विधाओं में सृजन रत डॉक्टर प्रभा दीक्षित के साहित्यिक सांस्कृतिक सरोकार निसंदेह व्यापक हैं उनका गजल संग्रह हर नजर भीगी हुई है हिंदी गजल परंपरा में एक सार्थक हस्तक्षेप है जिसमें उन्होंने जनवादी परंपरा और ज्ञानात्मक संवेदन दोनों को बड़ी खूबसूरती से बयां किया है उनकी गद्य कृतियां भी साहित्य के अध्येताओं के लिए महत्वपूर्ण हैं

जयपुर के प्रख्यात समीक्षक और समांतर पत्रिका के संपादक राजाराम भादू ने अपने संदेश में डॉ प्रभा दीक्षित को एक यथार्थवादी समीक्षक और जनोन्मुख साहित्यकार घोषित करते हुए उनकी लेखनी की सराहना की

दिल्ली से पधारे अलावा पत्रिका के संपादक वरिष्ठ साहित्यकार एवं रामकुमार कृषक ने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि समकालीन हिंदी साहित्य परिदृश्य में भटकते प्रभा दीक्षित एक ऐसी रचनाकार हैं जो सिर्फ कवित्री ही नहीं बल्कि समर्थ गद्यकार भी है कविता में भी उन्हके यहां खासा वैविध्य है

डॉ प्रभा दिछित ने सभी आए हुए अतिथियों का आभार प्रदर्शन करते हुए अपनी कृतियों को समय और समाज के द्वंद का मनुष्य पर पड़ने वाले प्रभाव के रूप में चिन्हित किया

द्वितीय सत्र में एक लघु काव्य गोष्ठी का भी आयोजन हुआ जिसमें कमल किशोर श्रमिक राधा साहब की विरेंद्र आस्तिक सुनील बाजपेई सतीस गुप्ता जयराम सिंह और कुसुम अविचल अशोक शास्त्री सुरेश अवस्थी कमल मुसद्दी अनीता मौर्य अलका मिश्रा आवाज द्विवेदी अंजलि सागर कमलेश दुवेदी शीतल बाजपेई आदि अनेक कवियों ने अपनी रचनाएं सुनाई कार्यक्रम का सफल संचालन डॉक्टर ज्योति किरन ने किया

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