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नागरिकता संशोधन बिल, ओवैसी का भड़काऊ बयान

देवेश प्रताप सिंह राठौर
 (वरिष्ठ पत्रकार).

नागरिकता संशोधन बिल पर जिस तरहआज मोदी जी की सरकार में गृह मंत्री अमित शाह जी ने नागरिकता संशोधन बिल (सीएबी) पेश किया है. नागरिकता संशोधन बिल (सीएबी) लोकसभा/राज्यसभा से पास होने के बाद अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद कानून बन चुका है.
सीएबी के कानून बन जाने के बाद पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से अवैध तरीके से आए हिन्दू, सिख, ईसाई, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म को लोगों को आसानी से भारतीय नागरिकता मिल जाएगी. यह विल
गुपचुप तरीके से लागू नहीं हो सकता एनआरसी: अमित शाह भारत के गृहमंत्री एवं प्रधानमंत्री मोदी जी ने संसदीय दल की बैठक में बीजेपी के सभी राज्यसभा सांसदों से सदन में मौजूद रहने को कहा है. राज्यसभा में नागरिकता संशोधन बिल को पास करवाने के लिए बहुमत का आंकड़ा 121 का है. बीजेपी मोटे तौर पर इस मैजिक नंबर के पार लग रही है.
नागरिकता संशोधन बिल 2019 में केंद्र सरकार के प्रस्तावित संशोधन से बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिंदुओं के साथ ही सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों के लिए अवैध दस्तावेजों के बाद भी भारतीय नागरिकता हासिल करने का रास्ता साफ हो जाएगा,एनआरसी और नागरिकता कानून 2019 में क्या है। नागरिकता संशोधन बिल का पूर्वोत्तर के राज्य विरोध कर रहे हैं. पूर्वोत्तर के लोग इस बिल को राज्यों की सांस्कृतिक, भाषाई और पारंपरिक विरासत से नागरिकता संशोधन के आधार पर , बिल नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों को बदलने के लिए पेश किया जा रहा है. नागरिकता बिल 1955 के हिसाब से किसी अवैध प्रवासी को भारत की नागरिकता नहीं दी जा सकती. अब इस संशोधन से नागरिकता प्रदान करने से संबंधित नियमों में बदलाव हो गया है ,एनआरसी से जुड़ी ये पांच बातें पता हैं आप कोनागरिकता बिल में इस संशोधन से मुख्य रूप से छह जातियों के अवैध प्रवासियों को फायदा होगा.बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिंदुओं के साथ ही सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों के लिए अवैध दस्तावेजों के बाद भी भारतीय नागरिकता हासिल करने का रास्ता साफ हो जाएगा. वास्तव में इससे नॉन मुस्लिम रिफ्यूजी को सबसे अधिक फायदा होगा ।राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के बारे में ये बातें जानते हैं आप भारत के प्रमुख विपक्षी दलों का कहना है कि मोदी सरकार सीएबी के माध्यम से मुसलमानों को टार्गेट करना चाहती है. इसकी वजह ये है कि सीएबी 2019 के प्रावधान के मुताबिक पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले मुसलमानों को भारत की नागरिकता नहीं दी जाएगी.कांग्रेस समेत कई पार्टियां इसी आधार पर नागरिकता संशोधन बिल का विरोध कर रही हैं. सरकार का तर्क यह है कि धार्मिक उत्पीड़न की वजह से इन देशों से आने वाले अल्पसंख्यकों को सीएबी के माध्यम से सुरक्षा दी जा रही है.

संविधान के आर्टिकल 14 में क्या
मोदी सरकार कहती है कि साल 1947 में भारत-पाक का बंटवारा धार्मिक आधार पर हुआ था. इसके बाद भी पाकिस्तान और बांग्लादेश में कई धर्म के लोग रह रहे हैं. पाक, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यक काफी प्रताड़ित किये जाते हैं. अगर वे भारत में शरण लेना चाहते हैं तो हमें उनकी मदद करने की जरूरत है. बिल पुराने फॉर्म में पास किया गया था. सीएबी वास्तव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का चुनावी वादा है. गृह मंत्रालय ने वर्ष 2018 में अधिसूचित किया था कि सात राज्यों के कुछ जिलों के अधिकारी भारत में रहने वाले पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से सताए गए अल्पसंख्यकों को नागरिकता प्रदान करने के लिए ऑनलाइन आवेदन स्वीकार कर सकते हैं. राज्यों और केंद्र से सत्यापन रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद उन्हें नागरिकता दी जाएगी. इसमें भारत की नागरिकता पाने के लिए 12 साल के निवास की जगह अब अवधि छह साल हो जाएगी.नागरिकता कानून पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर कौन और क्यों कर रहा है?
विपक्षी दल सीएबी का विरोध कर रहे हैं. उनका तर्क है कि यह भारत के संविधान के आर्टिकल 14 का उल्लंघन करता है. आर्टिकल 14 समानता के अधिकार से संबंधित है. कांग्रेस, तृणमूल, सीपीआई (एम) जैसे दल सीएबी का विरोध कर रहे हैं. इसके साथ ही देश के पूर्वोत्तर के राज्यों में इस बिल का काफी विरोध किया जा रहा है,पूर्वोत्तर के राज्य के लोगों का मानना है कि सीएबी के बाद इलाके में अवैध प्रवासियों की संख्या बढ़ जाएगी और इससे क्षेत्र की स्थिरता पर खतरा उत्पन्न होगा नागरिकता संशोधन कानून 2019 पर केंद्र सरकार  राज्यों पर सीएबी का सबसे अधिक असर पड़ेगा?

सीएबी का सबसे अधिक असर पूर्वोत्तर के सात राज्यों पर पड़ेगा. भारतीय संविधान की छठीं अनुसूची में आने वाले पूर्वोत्तर भारत के कईइलाकोंकोनागरिकता संशोधन विधेयक में छूट दी गई है. छठीं अनूसूची में पूर्वोत्तर भारत के असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम आदि शामिल हैं जहां संविधान के मुताबिक स्वायत्त ज़िला परिषद हैं जो स्थानीय आदिवासियों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 244 में इसका प्रावधान किया गया है. संविधान सभा ने 1949 में इसके ज़रिए स्वायत्त ज़िला परिषदों का गठन करकेराज्यविधानसभाओं कोसंबंधितअधिकार प्रदान किए थेइसके अलावा क्षेत्रीय परिषदों का भी उल्लेख किया गया है. इन सभी का उद्देश्य स्थानीय आदिवासियों की सामाजिक, भाषाई और सांस्कृतिक पहचान बनाएरखनाहै.नागरिकता कानून के विरोध करने वालों को जानकारी नहीं है। इस समय तीन पड़ोसी देश से 31,313 लोग भारत में लंबी अवधि के वीजा पर रह रहे हैं. सीएबी से इन्हें तुरंत फायदा होगा. इसमें 25,000 से अधिक हिंदू, 5800 सिख, 55 इसाई, दो बौद्ध और दो पारसी नागरिक शामिल हैं।

नागरिकता (संशोधन) बिल 2019 के बारे में ये पांच बातें जानते हैं ।

नागरिकता संशोधन बिल राज्यसभा से पास, जानिए किन दलों का आज देश में क्यों मचा है देश भर में नागरिकता संशोधन बिल |राज्यसभा | लोकसभा   से पास होने के बाद अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद कानून बन चुका ह। अकबरूद्दीन को हैदराबाद ओल्ट सिटी का बाहुबली माना जाता है। वह पहली बार तब सुर्खियों में आया था जब उसने प्रख्यात लेखिका तस्लीमा नसरीन को जान से मारने की बात कही थी। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि ऐसी नीच बातें करने वाले दोनों भाई पढ़े-लिखे हैं। अकबरूद्दीन ओवैसी ने तो बकायदा लंदन से बैरिस्टरी की पढ़ाई की है।ओवैसी भाई वैसे तो हैदराबाद के पॉश बंजारा हिल्स इलाके में रहते हैं लेकिन उनकी राजनीति की जड़ें ओल्ड सिटी में हैं जहां की 40 फीसदी आबादी मुसलमानों की है जो केवल मजहब के नाम पर एकजुट होकर इनका पुरजोर समर्थन करते हैं। वक्फ बोर्ड और मुस्लिम शिक्षा संस्थानों में इन दोनों की मजबूत पकड़ है। देश के बँटवारे के वक़्त तक एमआईएम अलग मुस्लिम राज्य के लिए मुस्लिम लीग के साथ रहा था। वही मुस्लिम लीग जिसने मजहब के नाम पर दस लाख भारतीयों की लाशों पर देश के दो टुकड़े किये। असदुद्दीन ओवैसी जो कानून को भी चैलेंज देता है कहता है बाबरी मस्जिद वहीं बनाएंगे वहीं आज नागरिकता संशोधन बिल पर जबकि कानून बन चुका है लोकसभा /राज्यसभा में उस पर जिस तरह के देश में टीका टिप्पणी करके बवाल मचा रहा है और उपत्रों करने में उसका मुख्य योगदान है, ऐसे लोगों को जम्मू कश्मीर में धारा 370 हटने पर जिस तरह वहां के क्षेत्रीय नेताओं को कैद में बंद कर दिया था आज देश में उसी तरह की जरूरत आ गई है, ओबीसी जैसे लोगों को और उनके भाई अकबरुद्दीन ओवैसी को जेल में बंद करने की जरूरत है ।और इस तरह के जितने भी लोग हैं जो देश में भड़काऊ वक्तव्य दे रहे हैं जो by आतंक मचा रहे हैं सरकारी तंत्र जला रहे हैं सरकारी तंत्र को परेशान किए हैं ऐसे लोगों को इंगित करके सजा देने का काम सरकार करें l अशरउद्दीन ओवैसी और उसका भाई अकबरुद्दीन ओवैसी यह दोनों राष्ट्रपति इनका पूरा परिवार एवं खानदान रहा है इतिहास उठा कर देखो असदुद्दीन ओवैसी का खानदान किस तरह भारत विरोधी गतिविधियों और जातिगत राजनीति से लिख रहा है। भारत सरकार को चाहिए असदुद्दीन ओवैसी एवं उसका भाई अकबरुद्दीन ओवैसी और देश में जैसे इस धारणाके लोग हो फोन पर सख्त कानून बनाकर उन्हें जेल के अंदर डालने की जरूरत है यह भारत देश के अंदर देश के लिए बहुत ही घातक है। इस समय देश नागरिकता संशोधन बिल पर भ्रमित हो रहा है ।और भ्रमित करने वाले यही ओवैसी बंधु और इनकी मानसिकता रखने वाले लोग आज देश में गुंडागर्दी तोड़फोड़ आतंक फैलाए हैं ऐसे लोगों पर सख्त से सख्त कार्रवाई कानून द्वारा की जानी चाहिए क्योंकि यह वह जहर है देश के लिए जो जातिगत राजनीति खेल कर हिंदू और मुस्लिम के रूप पैदा करके दंगा कराते हैं।

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