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Saturday, December 28, 2019

सर्द मौसम में परिषदीय विद्यालयों में स्वेटर वितरण के नाम पर हो रही खानापूर्ति

ठेका हथियाने वाली फर्म ने अभी तक कक्षा 1 से लेकर तीन तक 50 फीसदी बच्चों को ही वितरित किये स्वेटर
कक्षा 4, 5, 6, 7 व 8 के बच्चों की कोई सुध नहीं

उरई (जालौन), अजय मिश्रा । बर्फीली हवाओं के बीच जनपद के परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को स्वेटर वितरण के नाम पर अभी तक जो जमीनी हकीकत सामने आयी है वह वास्तव में बेहद ही चैंकाने वाली है। जिस फर्म ने स्वेटर सप्लाई का ठेका हथियाया था वह अभी तक महज कक्षा 1 से लेकर तीन तक के पचासी फीसदी बच्चों को ही स्वेटर वितरण का कार्य बमुश्किल कर पायी है। अब ऐसी स्थिति में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्वेटर वितरण से अवशेष पांच कक्षाओं के बच्चों को स्वेटर वितरण कब तक फर्म कर पायेगी। हालांकि अभी स्वेटर वितरण के मामले में जिम्मेदार अधिकारी अपना मुंह नहीं खोल रहे है।

प्रदेश सरकार की मंशानुसार जनपद के परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को हर वर्ष सर्दी का मौसम शुरू होने के साथ ही उन्हें स्वेटर वितरण के लिये लाखों रुपये का बजट बीएसए दफ्तर को आवंटित कर दिया जाता है। लेकिन स्वेटर वितरण के हर वर्ष टेण्डर हथियाने वाली फर्म केवल खानापूर्ति करती है और गर्मियों के मौसम तक स्वेटर वितरण का कार्य चलता रहता है। ऐसा ही इस वर्ष स्वेटर वितरण करने वाली फर्म द्वारा किया जा रहा है। भीषण सर्दी के मौसम में अभी तक संस्था महज कक्षा 1, 2 व 3 तक के पचास फीसदी बच्चों को ही स्वेटर वितरण कर पायी। उसमें भी जो 50 प्रतिशत बच्चे स्वेटर पाने से छूट गये उन्हें कब स्वेटर मुहैेया कराये जायेंगे इस बारे में भी कुछ कहा नहीं जा सकता है। फिर कक्षा 4 व 5 जो प्राइमरी के है तो कक्षा 6, 7 व 8 जूनियर के बच्चों को कब स्वेटरों का वितरण होगा इस मामले में जिम्मेदार अधिकारी अपना मुंह नहीं खोलना चाहते हैं। स्वेटर वितरण के मामले में जो ढील पोल चलती है वह किसी से भी छिपी नहीं है। पूर्व के वर्षों में देखा जाये तो अनेकों परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को गर्मियों के सीजन में स्वेटरों का वितरण किया जाता रहा। ऐसी स्थिति में जो गरीब बच्चे हैं उन्हें न तो समय से स्वेटर का वितरण किया जाता है और न ही डेªेस, जूता, मोजा आदि का। जब इस संबंध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी दफ्तर में जानकारी करने का प्रयास किया गया तो एक जिम्मेदार लिपिक ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि यह ढर्रा वर्षों पुराना है। जब तक जंग लग चुके सिस्टम पर विभागीय चाबुक नहीं चलेगा यह इसी प्रकार से कार्य करता रहेगा।


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