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परम्परागत सिंचाई छोड़ें ड्रिप अनायें

हमीरपुर, महेश अवस्थी । प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना पर ड्राॅप मोर क्राॅप माईक्रोएरिगेशन योजना में 50 किसानों को उद्यान विभाग ने कृषि प्रशिक्षण केन्द्र कुरारा में प्रशिक्षण दिया। मुख्य अतिथि नरोत्तमदास गुप्ता थे। केवीके के अध्यक्ष डाॅ मुस्तफा ने परम्परागत् सिंचाई की जगह ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई की महत्ता के बारे में बताते हुये किसानों को सलाह दी। जिला उद्यान अधिकारी उमेशचन्द्र उत्तम ने विभागीय योजनाओं के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि बुन्देलखण्ड में पानी की कमी है। जमीन में ऊची-नीची है। जिसके कारण यहां परम्परा
ढंग से सिंचाई करने में कठिनायी है। इसलिये ड्रिप और स्पिं्रकलर सिंचाई पद्धति का प्रयोग करें। जिसके जरिये जल की 30 से 60 फीसदी की बचत होती है। बागवानी के साथ-साथ डेªगन फ्रूट तथा मौन पालन की सलाह दी। डाॅ चंचल सिंह ने जल संचयन के साथ पौध सुरक्षा के बारे मेें विचार रखे। डाॅ एसपीएस सोमवंशी ने पशुपालन, डाॅ शालिनी ने जल प्रबन्धक, डाॅ फूल कुमारी पोषक वाटिका के बारे में बताया। उद्यान वैज्ञानिक डाॅ प्रशान्त कुमार ने खरीफ में प्याज की खेती के फायदे बताये। कार्यक्रम के अध्यक्ष गुप्ता जिला सहकारी पूर्ति भण्डार संघ ने किसानों को कृषि सिंचाई योजनाओं के बारे में बताया। यहां उपनिदेशक कृषि जितेन्द्र मोहन श्रीवास्तव ने पराली न जलाने के विकल्प में हैप्पी सीडर तकनीकी से गेंहू की सीधे बुआई करने के बाद में बताया। इस मौके पर केशव प्रसाद मिश्रा, कौशल किशोर द्विवेदी, आशाराम, विनोद कुमार ने अपने अनुभव साझा किये। संचालन डाॅ एसपी सोनकर कर रहे थे।

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