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कानपुर के रिहायशी क्षेत्रो में धडल्ले से चल रहे कारखाने

दबौली वेस्ट में चल रहे कारखाने में  प्रयोग होने वाले तेजाब से क्षेत्रीय लोग परेशान
जिलाधिकारी को पत्र देकर फैक्ट्री तत्काल बंद कराये जाने की मांग

कानपुर नगर,  हरिओम गुप्ता - उच्च न्यायालय के सख्त आदेशो के बाद भी कानपुर नगर के रिहायशी क्षेत्रों में व्यवसायिक कल-कारखाने चल रहे है। नगर के कई हिस्सो में छोटे बडे उत्पाद किये जाते है और यह कारखाने धने इलाको में चलते है। कई बाद हादसे होने के बाद शहर का प्रशासन सक्रीय हो उठत है लेकिन समय बीतने के साथ फिर पहले जैसा हो जाता है। एक कारण यह भी है कि रिहायशी क्षेत्रों में कारखाने होने के कारण मालिक को कामर्शिलय व्यापारा की झंझटो से भी बचाव होता है। ऐसे कारखाने ज्यादातर सरकारी विभागो के
अधिकारियों की सांठ-गांठ से चलते है। ऐसा भी नही है कि इनकी शिकायते नही की जाती लेकिन नतीजा शून्य
ही निकलता है। शहर की धनी आबादी वाले क्षेत्रों में कई कारखाने चलते है, जिसमें तरह-तरह के उत्पाद बनाये जाते है। इतना ही नही इन कारखानो में केमिकल और खतरनाक रसायन का भण्डारण भी रहता है। सिविल लाइन से सटे मछलीवाले हातें, गम्मू खां के हाते, चमनगंज, ग्वालटोली आदि कई क्षेत्रों में कारखाने चल रहे है। इसी प्रकार वार्ड 72 दबौली वेस्ट ए3 में केडीए के आवासीय 68 एमआईजी में भी कारखाना चलाया जारहा है, जहां इलेक्ट्रानिक प्लेटो की धुलाई का काम होता है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि प्लेटो की धुलाई का काम तेजाब से किया जाता है, जिसकी जहरीली गैस मोहल्ले वालो के लिए सिरदर्द बनी हुयी है। इतना ही नही पास में बच्चों का स्कूल भी है, फिर भी जिम्मेदार ध्यान नही दे रहें है। जब-जब लोगो ने इसका विरोध किया तो दबंग फैक्ट्री संचालक अग्रवाल लोगों को धमकी देता है। इस प्रकरण में दर्जनो शिकायते केडीए, प्रदूषण बोड तथा सम्बन्धित विभागों को की गयी लेकिन न कोई सुनवाई हुई और न ही कोई कार्यवाही। लोगो का कहना है कि फैक्टी के कारण वातातरण लगातार जहरीला होता जारहा है जो स्वास्थ्य की दृष्टिकोण से खतरनाक है। स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी को प्रार्थनापत्र सौंपकर तत्काल फैक्ट्री को बंद कराने की मंाग भी की, क्योंकि उक्त फैक्ट्री को देख इलाके में अन्य फैक्ट्रिया शुरू हो गयी है। सारा खेल विभागीय सांठ-गांठ के हो रहा है। विभागो में पैसा पहुंच रहा है, जिससे सारी नियमावली को ताक पर रखा जाता है। लखनऊ हाईकोर्ट कीएक बेंच से न्यायमूर्ति ने सरकार से पूंछा था कि रिहायशी इलाको में व्यवसायिक कारखाने कैसे। इसके बावजूद कानपुर की धनी आबादी वाले क्षेत्रों में हजारो कारखानो का संचालन हो रहा है।

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