Latest News

ठंड से जनजीवन अस्त-व्यस्त, सर्दीली हवाएं बनीं मुसीबत

बदली के बीच से कुछ देर के लिए झांके सूर्यदेव 
ठंडी हवाओं के झोंकों ने गलन में किया इजाफा 
सुबह आसमान पर छाई रही कोहरे की धुंध 

बांदा, कृपाशंकर दुबे । दिसंबर माह में ही ठंड ने लोगों के छक्के छुड़ा दिए हैं। सुबह कोहरे की धुंध के बीच चल रही ठंडी हवाओं ने जहां गलन में इजाफा कर दिया है वहीं लोग ठिठुरने को मजबूर हो गए हैं। आग जलाकर लोग किसी तरह से ठंड से अपना बचाव करते नजर आ रहे हैं। कड़ाके की ठंड के बीच मजबूरन आवश्यक कार्य होने पर ही लोग अपने घरों से बाहर निकल रहे हैं। कुछ देर के लिए शनिवार को दोपहर के समय बदली के बीच से सूर्यदेव झांके और फिर बादलों में ही छिप गए। तकरीबन एक घंटे के लिए निकली धूप ठंड को काफूर कर पाने में नाकाम रही। 
अलाव में बदन सेंकते लोग और खड़े बेजुबान मवेशी
दिसंबर माह की शुरुआत से ही ठंड ने अपनी दस्तक दे दी थी। लेकिन दिसंबर के आखिरी दिनों में ठंड इतना विकराल रूप धारण कर लेगी, यह किसी ने नहीं सोचा था। दिसंबर माह के दूसरे और आखिरी पखवारे में जिस कदर ठंड ने लोगों को बेजार करके रखा है, उससे लोग हलाकान हैं। अब तक ठंड से एक दर्जन से ज्यादा लोग अकाल मौत का शिकार हो चुके हैं। जबरदस्त गलन और बर्फीली हवाएं चलने से तापमापी पारे की सुई लगातार नीचे की ओर जा रही है। शनिवार की सुबह भी मौसम का मिजाज सर्दीला बना रहा। सुबह जब लोगों की नींद खुली तो आसमान कोहरे से ढका हुआ था। हालांकि जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, वैसे-वैसे कोहरे की धुंध तो साफ हो गई, लेकिन जबरदस्त गलन की वजह से लोग ठिठुरने को मजबूर हो गए। जबरदस्त ठंड से लोग बेजार हो गए हैं। सबसे ज्यादा मुसीबत छोटे बच्चों की है। बदली की ओट से सूर्यदेव झांके और एक घंटे तक धूप खिली रहीं, लेकिन जबरदस्त ठंड को दूर कर पाने में गुनगुनी धूप नाकाफी साबित हुई। कुल मिलाकर जबरदस्त ठंड की वजह से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। 

सरकारी अलावों का अता-पता नहीं 
बांदा। जबरदस्त ठंड में भी अधिकारियों को राहगीरों और गरीबों पर तरस नहीं आ रहा है। सरकारी अलाव कागजों में धंधक रहे हैं। हकीकत में इक्का-दुक्का लकड़ी ही पड़ी नजर आ रही हैं। जिन स्थानों को अलाव जलवाने के लिए चिन्हित किया गया है, उन स्थानों पर अलाव जल ही नहीं रहे हैं। सप्ताह में एक दिन फेंकी गई लकड़ी के कुछ टुकड़े जरूर पड़े नजर आते हैं। सरकारी अलाव सिर्फ कागजों में ही जलते नजर आ रहे हैं, हकीकत में इन अलावों का कुछ पता नहीं है। 

No comments