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अयोध्या कांड की कथा सुनकर भक्ति में डूबे श्रोता

जहीर क्लब मैदान में मृत्युंजय मानस मण्डल के तत्वाधान में चल रही श्रीरामकथा

बांदा, कृपाशंकर दुबे । मृत्युंजय मानस मंडल के तत्वाधान में आयोजित श्रीरामकथा के सातवे दिन व्यास महामंडलेश्वर स्वामी जगत प्रकाश त्यागी ने बडी मार्मिक बात कही कि अयोध्या काण्ड गुरूओं का कांड है। बालकाण्ड में गुरू बंदना की गयी है। बताया कि बालकाण्ड में गुरू रज से दृष्टि को और अयोध्या काण्ड में मन को निर्मल होना कहा। जब दृष्टि और मन दोनो ठीक हो गये, मानो सब ठीक हो गया। आगे किसी काण्ड में गुरूरज की बंदना नही की। 
रामकथा का बखान करते जगत प्रकाशी त्यागी
भक्तों का कथा का रसपान कराते हुये उन्होने बताया कि तुलसीदास जी ने भरत जी को गुरू माना, कलिकाल तुलसी से सठन्ह हठराम सन्मुख करत को, भरद्वज्ञज से राम जी ने पूछा, नाथ काहिअ हम केहि मग जाही, क्योंकि वे परमारथ पथ परम सुजाना’’ बाल्मीकि से पूछा हम कहां रहे, उन्होने बताया कि चित्रकूट गिरि कारउं निवास, तात्पर्य आज से अयोध्या काण्ड की कथा का शुभारम्भ है और इस काण्ड को बहुत ही साधना से श्रवण एवं पठन की आवश्यकता है। आगे उन्होने कथा में एक अद्भुत बात कही कि कैकेई मंथरा की गलत बातों में आकर भ्रमित हो गयी और अपनों का विश्वास खो दिया, जब अपनो पर विश्वास समाप्त हो जाता है तभी उसको दुष्परिणाम भोगने पडते है। जिस राम को कैकेई इतना स्नेह करती थी, उसी राम को बनवास मांग लिया। दशरथ जी ने कहा कि राम ने तुम्हारा क्या विगाडा है, भरत को राजपद दे दो स्वीकार है, पर राम को बनवास नही।
मौजूद श्रोतागण
कैकेई ने कहा, क्या मुझसे अपराध हो गया, मैने धर्म के अनुकूल ही वर मांगा है, बल्कि आपसे भूल हो रही है। आज और सभी यही करते है कि राम साधु है, साधु को बन में रहना चाहिये या घर में। आप कहते है कि राम नही रहंेगे तो मेरी मृत्यु निश्चित है। कैकेई ने कहा कि किसी ने किसी ने किसी की मृत्यु तो होनी ही है, बन जायेंगे तो आपकी, नही जायेगे तो मेरी। मंगलवार को कथा में सैकडों की संख्या में श्रोता उपस्थित रहे। आयोजक मण्डल ने बताया कि 1 जनवरी व 2 जनवरी का आचार्य युग पुरूष स्वामी परमानन्द गिरि महाराज का दर्शन लाभ एवं पावन संदेश मिलेगा। 31 दिसम्बर व 1 जनवरी को रात्रि में जादू का कार्यक्रम व 2 जनवरी को ऐतिहासिक रामलीला का आयोजन किया जायेगा। इसके बाद 3 जनवरी को विशाल भण्डारे का आयोजन किया जायेगा। 

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