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सत्तर साल बाद भी मजरा बुढ़ेरा में नहीं हुये विकास कार्य

गलियों में न नालियां बनी और न ही पक्की सड़क का निर्माण

रामपुरा (जालौन), अजय मिश्रा । एक ओर जहां प्रदेश सरकार गांवों के विकास के लिये बजट देने में कोई कोताही नहीं बरत रही है तो वहीं दूसरी ओर गांव की सरकार के मुखिया ग्राम प्रधान चुनावी रंजिश के चलते ऐसे गांवों से विकास कार्यों से दूर रखकर अपनी राजनैतिक रोटियां सेंकने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाते हैं। ऐसा ही हाल रामपुरा विकासखंड की ग्राम पंचायत मई का मजरा बुढ़ेरा का है। जहां आजादी से आज तक विकास की किरणें नहीं पहुंच पायी। जब मीडिया टीम ने उक्त मजरा में विकास कार्यों को देखा तो समूचे मजरा मंे कच्ची गलियां कीचड़ से भरी मिली। ऐसी स्थिति में उक्त गांव के वाशिंदे कैसे अपना जीवन यापन करते होंगे इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। विकासखंड के अधिकारियों की नजरों से उक्त मजरा आज भी अछूता ही है।
मजरा बुढ़ेरा की कच्ची गलियां विकास को मुंह चिढ़ाती।
विकास खण्ड के अंतर्गत ग्राम पंचायत मई के मजरा बुढे़रा के बाशिंदों को जीवन यापन करने के लिए बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा हैं। जहाँ गांव के अन्दर आम रास्ते से निकलने के लिए जगह ही नहीं है। गाँव में आम रास्ते में नालियां व सड़क एक समान हो गयी हैं। गाँव के जंगबहादुर सिंह, धीरेन्द्र सिंह, राजबहादुर सिंह, दीपचंद्र दोहरे, रामू सिंह व विवेक सिंह कहते हैं कि इस पंचवर्षी गांव में प्रधान द्वारा कोई विकास कार्य नहीं कराया गया। गांव के अन्दर गन्दगी का अम्बार लगता जा रहा हैं। हालात तो ये हैं बहुत से लोग गांव से पलायन भी कर चुके हैं। कई बार ग्रामीण गाँव की साफ सफाई व गलियों के निर्माण कार्य कराने को लेकर ग्राम प्रधान व विकास खण्ड अधिकारी से मिले व अपनी परेशानियों के बारे में बताया, लेकिन अभी तक कोई विकास कार्य नहीं कराया गया। प्रधान के प्रति ग्रामीणों में रोष व्यक्त हैं। हैरानी की बात तो यह है कि उक्त गांव में आज तक विकास कार्यों को कराने वाले अधिकारियों ने भी ध्यान नहीं दिया जिससे आजादी के सात दशक बाद भी उक्त मजरा में विकास कार्य नहीं कराये। मजरा बुढ़ेरा को विकास कार्यों से दूर रखने में पूर्व व वर्तमान ग्राम प्रधान को ही गांव के वाशिंदे दोषी ठहरा रहे हैं।

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