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Tuesday, December 17, 2019

पहाड़ों की बर्फबारी से ठंडी हुई हवाएं, गलन में इजाफा

जबरदस्त ठंड से जनजीवन अस्त-व्यस्त, आग ही शीतलहरी से बचाव का बनी सहारा 
गौशालाओं और बस्तियों में बेजुबान मवेशियों के दम तोड़ने का सिलसिला जारी 
अति व्यस्त इलाकों में भी जबरदस्त शीतलहरी से नजर आ रहा है सन्नाटा 
सरकारी तौर पर जलवाए जाने वाले अलावों का पता नहीं, ठिठुर रहे हैं राहगीर 

बांदा, कृपाशंकर दुबे । दिसंबर माह के दिन जैसे-जैसे गुजर रहे हैं, वैसे-वैसे ठंड बढ़ती जा रही है। कुहासे भरी ठंड और चल रही ठंडी हवाओं ने जनजीवन अस्त-व्यस्त करके रख दिया है। पहाड़ी इलाकों में हो रही बर्फबारी से जहां पहाड़ों ने सफेद चादर ओढ़ ली है वहीं पहाड़ी इलाकों से छनकर आने वाली ठंडी हवाओं ने सोमवार की शाम से ठंड में एकबारगी इजाफा कर दिया है। इसके अलावा जनपद में विभिन्न स्थानों पर हो रही ओलावृष्टि का असर भी मौसम पर पड़ा है। ओलावृष्टि के चलते भी गलन बढ़ी है। ठंडी हवाओं ने लोगों को सिकुड़ने पर मजबूर कर दिया है। दिसंबर माह में प्रतिदिन तापमापी पारे की सुई लुढ़कती चली जा रही है। 
जबरदस्त शीतलहरी के बीच अलाव जलाकर बदन सेंकते लोग 
मंगलवार को तापमान 22.45 डिग्री सेल्सियस अधिकतम रेकार्ड किया गया। ठंड में इजाफा होने से लोग किसी तरह से अलाव जलाकर बदन सेंककर ठंड से बचाव कर रहे हैं। सरकारी तौर पर अभी अलाव नहीं जलवाए गए हैं। शाम ढलते ही राहगीरों को ठिठुरना पड़ रहा है। आम आदमी तो किसी तरह ठंड से अपना बचाव कर रहा है लेकिन सबसे ज्यादा मुसीबत बेजुबान मवेशियों की है जो अपना दर्द किसी से बयां नहीं कर सकते हैं। जबरदस्त शीतलहरी के कारण प्रतिदिन गांवों में बेजुबान मवेशी दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। जबरदस्त ठंड के चलते स्कूल
शीतलहरी के चलते बेजबुजान भी ले रहे हैं अलाव का सहारा 
खुले होने के कारण सुबह बच्चे ठंड से ठिठुरते हुए स्कूल जा रहे हैं। स्कूल प्रशासन की ओर से भी बच्चों को ठंड से बचाव के लिए कोई इंतजामात नहीं किए गए हैं। जनपद के विभिन्न स्थानों पर संचालित गौशालाओं में महज खानापूरी की जा रही है। गौवंश प्रतिदिन दम तोड़ रहा है। 
ठंड से बचाव के लिए सरकारी तौर पर जलवाए जाने वाले अलावों का अभी तक पता नहीं है। दिसंबर माह में पड़ रही कड़ाके की ठंड के बावजूद प्रशासनिक मशीनरी और जिम्मेदार अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। शाम
मंगलवार की सुबह कोहरे की धुंध का दृश्य 
होते ही सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है। इक्का-दुक्का राहगीर तो नजर आते हैं वह ठंड से ठिठुर रहे हैं। सरकारी अलाव कहीं भी नजर नहीं आ रहे हैं। मंगलवार की सुबह पूरी तरह से कोहरे से ढकी रही। सुबह चल रही ठंडी हवाओं ने लोगों को ठिठुरने पर मजबूर कर दिया। गनीमत रही कि आसमान साफ होने के कारण गुनगुनी धूप खिली रही, जिससे लोगों को राहत महसूस हुई। 

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