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प्राकृतिक जल स्रोतों को नदियों, तालाबों से जोड़ेंगे

नदी, नारी नीर महासम्मेलन का आयोजन बदौसा में 12 दिसंबर को होगा 
प्रेस वार्ता के जरिए तालाब बचाओ अभियान के संयोजक ने दी जानकारी 

बांदा, कृपाशंकर दुबे । बुंदेलखंड में सबसे बड़ी समस्या पेयजल है। प्राकृतिक स्रोतों को नदियों, तालाबों से जोड़ने के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के तीन दर्जन से ज्यादा छात्रों ने नदी नारी और नीर अभियान का शुभारंभ किया। इसके तहत आगामी 12 दिसंबर को बदौसा कस्बे में सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इसके सम्मेलन के जरिए लोगों को बागेन नदी और प्राकृतिक जल स्रोतों को संरक्षित करने के लिए जागरूक किया जाएगा। 
प्रेस वार्ता में जानकारी देते रामबाबू तिवारी (बीच में)
नदी नारी नीर सम्मेलन के आयोजक रामबाबू तिवारी शोध छात्र इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने सोमवार को स्व. सुरेश गुप्ता मेमोरियल प्रेस क्लब में मीडिया से रूबरू होते हुए बताया कि जल संसाधन धीरे-धीरे हमारे व्यवहार और समझ के अभाव के कारण्एा अपना अस्तित्व खोते जा रहे हैं। मानव संस्कृति की आधार नदियां सिसक रही हैं। छोटी नदियां विलुप्त होती जा रही हैं। श्री तिवारी ने मीडिया को बताया कि नदी, नारी और नीर अभियान के तहत वह बागेन नदी को संरक्षित करने का काम करेंगे। इसके साथ ही प्राकृतिक जल स्रोतों को नदियों से जोड़ा जाएगा ताकि वह सदानीरा बनी रहें। बताया कि जल के प्राकृतिक स्रोतों के सरंक्षण के लिए और बुंदेलखंड को पानीदार बनाने के लिए जल साक्षरता अभियान चलाया जाएगा। बागै भक्त परिषद के संयाजेक शहनवाज खान शानू ने बागै नदी का इतिहास बताते हुए कहा कि पन्ना जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर स्थित धार्मिक स्थल सारंगधर मंदिर के निकट इस नदी का उद्गम स्थान है। यहां से कई गांवों से होते हुई धर्मपुर के पास वृस्पति कुंड में गिरती है। श्री तिवारी ने मीडिया को बताया कि पहली दिसंबर को बागै अनुपम यात्रा का आयोजन किया गया। इसका समापन नदी, नारी नीर सम्मेलन जो 12 दिसंबर को बदौसा में आयोजित किया जा रहा है, में किया जाएगा। सामाजिक कार्यकर्ता श्याम मोहन धुरिया ने कहा कि पहले घर गांवों की सभ्यता और संस्कृति की पहचान तालाबों से होती थी। अब हम इनके उस महत्व को नहीं समझते। दुनिया के भाग्यशादी देशों में एक हैं जहां इंद्रदेव की कृपा होती है, लेकिन हम इसका 15 फीसदी से ज्यादा उपयोग नहीं कर पाते। श्री तिवारी ने बताया कि जल साक्षरता अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करेंगे और कारवां को आगे बढ़ाते हुए नदियों, तालाबों, पोखरों को संरक्षित करने का काम किया जाएगा। इस मौके पर रामबाबू के साथ चंदन धुरिया आदि मौजूद रहे। 

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