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रेलवे की नेतागिरी छोड़ो या नौकरी

दिल्ली (संवाददाता) - दिल्ली में परिवर्तन बैठक में लिया निर्णय
55 से अधिक उम्र पार कर चुके नेताओं को जारी होगा नोटिस, दिल्ली में परिवर्तन बैठक में उठा था मुद्दा। अब अनेक कर्मचारी नेताओं पर होगा असर।

 बीएसएनएल के बाद अब रेलवे में भी अनिवार्य सेवानिृवति योजना लागू करने की तैयारी है। रेलवे में अगर आपको संगठन से जुड़कर नेतागिरी करने का शौक है तो जरूर करें, लेकिन इसके लिए आपको रेलवे की नौकरी को छोडऩा होगा। इस बारे में शनिवार-रविवार को दिल्ली में हुई परिवर्तन नीति की बैठक में निर्णय किया गया है। यह लागू हुआ तो मंडल के दोनों प्रमुख संगठन के मंडल मंत्री को या तो पद छोडऩा होगा या रेलवे को। रेलवे इसी माह संगठन के पदाधिकारियों को नोटिस जारी करके दोनों में से एक पद छोडऩे को कहा जा सकता है।
रेलवे ने शनिवार-रविवार को परिवर्तन नीति को लेकर बड़ी बैठक की थी। इसमें विभिन्न मुद्दों को लेकर चर्चा देशभर के महाप्रबंधक, डीआरएम आदि से रेलवे बोर्ड, रेलवे मंत्री आदि के बीच हुई है। इसमें यह निर्णय लिया गया है कि रेलवे में संगठन में काम करने वाले पदाधिकारी रेलवे के लिए अपना कोई सेवा का अंशदान नहीं देते, बल्कि पूरे समय संगठन का काम करते रहते है, जबकि वेतन रेलवे से लेते है। इसके बाद निर्णय लिया गया कि वे सभी पदाधिकारी जो 55 वर्ष की उम्र के या इससे अधिक उम्र के हैं व रेलवे में काम कर रहे हैं तो इनको दोनों में से एक का चयन करने को कहा जाए।
>मंडल में है यह स्थिति
मंडल में वेस्टर्न रेलवे एम्प्लाइज यूनियन, वेस्टर्न रेलवे मजदूर संघ हो या ओबीसी से लेकर एससीएसटी संगठन, इनके पदाधिकारी की उम्र 50 वर्ष से अधिक ही है।
> इसमें यूनियन व मजदूर संघ के मंडल मंत्री क्रमश: एसबी श्रीवास्तव, बीके गर्ग की 50 वर्ष से करीब की उम्र के है। रेलवे इसी माह इस नियम को लागू करती है तो इन दोनों को या तो पद छोडऩा होगा या रेलवे को। रेलवे को छोड़ा तो यह संगठन में पद पर नहीं रह पाएंगे।
>रेलवे से जुडे़ संघटन के पदाधिकारियों का मानना है कि यह सब दबाव के लिए हो रहा है।

>यूनियनों के पदाधिकारियों का कहना है कि -"हमारा तगड़ा विरोध रहेगा"
"रेलवे एक खास संघटन को लाभ पहुंचाने के लिए यह सब कयावद कर रही है। इस नीति को सूचना है कि इसी माह लागू किया जा रहा है। यह नीति लागू की गई तो संगठन इसका तगड़ा विरोध करेगा।
-प्रकाशचंद्र व्यास, प्रवक्ता, वेस्टर्न रेलवे एम्प्लाइज यूनियन"

>यूनियनों के पदाधिकारियों का कहना है कि - लोकतंत्र का गला घोंट रहे,
"सरकार इस प्रकार का आदेश देकर लोकतंत्र का गला घोट रही है। वो जानती है कि उसकी हां में हां मिलाने वाले संगठन को चुनाव जीताने में वो सफल नहीं रहेंगे। आदेश जारी तो हो, फिर बताएंगे कि कर्मचारी संगठन की शक्ति क्या होती है।"

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