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आखिरकार जिन्दगी की जंग हार गयी फतेहपुर की नीतू

चौदह  दिसम्बर को दरिन्दे ने दुष्कर्म के बाद जलाया था जिन्दा
सपा व कांग्रेस ने पच्चीस लाख मुआवजा व सरकारी नौकरी की उठायी आवाज
गांव समेत अन्तिम संस्कार स्थल तक तैनात रहा पुलिस बल 

फतेहपुर, शमशाद खान । हैदराबाद की घटना को शायद ही अभी लोग भूले होंगे कि विगत चैदह दिसम्बर को हुसैनगंज थाना क्षेत्र के ऊदीपुर गांव में वहशी दरिन्दे द्वारा एक किशोरी का बलात्कार करके जिन्दा जला दिये जाने के मामले में जिन्दगी की जंग से लड़ते-लड़ते कानपुर के हैलट अस्पताल में नीतू की सांसे थम गयी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने जहां हैलट अस्पताल में धरना देकर प्रदेश सरकार से मुआवजा व सरकारी नौकरी की आवाज उठायी वहीं जिले के सपाई भी मृतका के गांव पहुंचे और पच्चीस लाख रूपये का मुआवजा व परिवार के किसी एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी दिलाये जाने की मांग की। सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिकोण से गांव समेत अन्तिम संस्कार स्थल तक पुलिस बल की तैनाती रही। कड़ी सुरक्षा के बीच मृतका का भिटौरा घाट में अन्तिम संस्कार कर दिया गया। 
अन्तिम संस्कार स्थल पर मौजूद सपा व कांग्रेस के नेता।  
बताते चलें कि चैदह दिसम्बर की सुबह ऊदीपुर गांव निवासी नीतू घर पर अकेली थी। तभी पड़ोस में रहने वाला मेवालाल उसके घर में घुस गया और जबरन बलात्कार करके मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी थी। आग का गोला बनी किशोरी चीखती-चिल्लाती हुयी घर से बाहर भागी और ग्रामीणों ने किसी तरह आग बुझाकर उसे उपचार के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया था। जहां गम्भीर हालत में उसे हैलट अस्पताल के लिए रिफर कर दिया गया था। हैलट अस्पताल में जिन्दगी और मौत के बीच संघर्ष करते-करते छह दिनों बाद आखिरकार उसकी सांसे थम गयी। घटना से आक्रोशित कांग्रेसियों ने प्रदेश महासचिव एवं पूर्व सांसद राकेश सचान के नेतृत्व में हैलट अस्पताल में ही धरना देकर मृतका को न्याय दिलाये जाने के साथ ही पच्चीस लाख का मुआवजा व पीड़िता के परिवारीजन को सरकारी नौकरी दिये जाने की आवाज बुलन्द की। उधर परिजन नीतू के शव को गांव लेकर आये। जहां परिवारीजनों का रो-रोकर बुरा हाल रहा। सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिकोण से पुलिस अधीक्षक प्रशांत वर्मा ने बड़ी संख्या में पुलिस बल की गांव में तैनाती कर दी। नीतू की मौत की खबर पाते ही समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह यादव के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मण्डल गांव पहुंचा और पीड़िता के परिवार को न्याय दिलाये जाने की हुंकार भरी। कड़ी सुरक्षा के बीच नीतू के शव का भिटौरा घाट में अन्तिम संस्कार कर दिया गया। घटना वाले दिन ही पुलिस ने आरोपी मेवालाल को हिरासत में ले लिया था। जिसके बाद इस घटना में नया मोड़ आ गया था। पुलिस व आरोपी के अनुसार उसका प्रेम-प्रसंग काफी समय से किशोरी से चल रहा था। घटना वाले दिन गांव में पंचायत भी हुयी थी। जिसमें किशोरी की शादी तक उसे गांव से बाहर रहने की हिदायत दी गयी थी। पंचायत के इस फैसले से आहत होकर किशोरी ने उसे अपने घर बुलाया और स्वयं मिट्टी का तेल डालकर आग लगा ली थी। वहीं अपनी अन्तिम सांस तक नीतू ने अपने बयानों में मेवालाल पर जलाने का आरोप लगाया है। 

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