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अन्ना जानवरों के संरक्षण, संवर्धन में जन सहभागिता जरूरी

हमीरपुर, महेश अवस्थी  । जिलाधिकारी डाॅ ज्ञानेश्वर त्रिपाठी ने कहा कि गोवंशीय अन्ना पशुओं के संरक्षण, संवर्धन तथा प्रबन्धक के लिये सरकारी मशीनरी व ग्राम प्रधानों के साथ-साथ जन सहभागिता जरूरी है। जन सहयोग के बिना इस कार्य में अपेक्षित प्रगति नहीं की जा सकती। इसके लिये लोगों को प्रोत्साहित किया जाये। पशु आश्रय स्थलों का संचालन सुचारू रूप से किया जावे। वे कलेक्टेªट सभागार में ग्राम प्रधानों के साथ जरूरी बैठक में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि शीत लहर से कोई अन्ना पशु की मौत न होने पाये। इसके लिये अस्थाई

शेड का निर्माण, तिरपाल की व्यवस्था कर ली जाये। गायों का दूध निकालकर अन्ना छोड़ने वाले पशु पालकों को चिन्हित करने में प्रधान सहयोग करें तो उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाये। पशु क्रूरता अधिनियम में मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है। अन्ना पशुओं के चारे, भूसे की खरीद नियमानुसार की जाये। गोवंशीय पशुओं को सुपुर्दर्गी में देने का काम किया जाये साथ ही पराली नहीं जालाना चाहिये क्योंकि इससे भूमि बंजर होती है। इन घटनाओं को सेटेलाईट से टेªस किया जा रहा है। पराली जलाने का समय, स्थान, तिथि खेत के गाटा संख्या का भी पता चल जाता है। अभी तक 41 स्थानों में 70 लागों के खिलाफ कार्यवाही की गई है। पराली जलाने पर प्रधान, लेखपाल, सचिव तीनों की जिम्मेदारी होगी। पराली जलाने से रोकने में की भूमिका महत्वपूर्ण हैं। सामाजिक और व्यक्तिगत् दोनों प्रकार से नुकसार तथा आर्थिक नुकसान के बाद जेल की नौबत आ सकती है। बैठक में सीडीओ आरके सिंह, एसपी श्लोक कुमार सिंह आदि मौजूद रहे।

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