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मुहम्मदाबाद गौशाला में भूख प्यास से दम तोड़ रहे गौवंश, आधा दर्जन गौवंश मरे

सर्दी में नही किया गया कोई पुख्ता इंतजाम
ओलों की चोट से जख्मी हुई एक सैकड़ा गाये

कुसमिलिया (जालौन), अजय मिश्रा । डकोर क्षेत्र के ग्राम मुहम्मदाबाद में गौवंशों के लिए बनाई गई गौशाला अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही है। इस गौशाला में बंद गौवंशो के लिए न तो सर्दी से बचाव के कोई पुख्ता इंतजाम है और न ही उनके लिए खान पान की कोई व्यवस्था की गई है। यहां तक कि शुक्रवार को हुई भारी बारिश और भीषण ओलावृष्टि ने एक सैकड़ा से अधिक गौवंश गम्भीर रूप से चोटिल हो गए है। जबकि रात में आधा दर्जन गौवंशो की मौत हो गई। सूचना पाकर आनन फानन में पहुचे प्राशासनिक अधिकारियों ने उन्हें दफन करवाया। ग्रामीणों की मानें तो अभी तक एक दर्जन से अधिक गौवंशो की मौत हो चुकी है।


शासन और उच्चतम न्यायालय द्धारा किसानों की फसलों को अन्ना मवेशियों से बचाने के लिए प्रत्येक गांव में भारी बजट से एक स्थाई या अस्थाई गौशालाए बनाई गई है। इन अन्ना मवेशियों के खानपान के लिए 30 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से ग्राम पंचायत को भुगतना भी किया है। यहां तक कि इनके व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए मनरेगा योजना का भी उपयोग किया गया है। मगर यह योजना धरातल पर नही उतर पा रही है। डकोर क्षेत्र के ग्राम पंचायत मुहम्मदाबाद में बनी अस्थाई गौशाला अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही है। इस गौशाला में बंद गौवंशो के लिये न हो उचित खानपान की व्यवस्था की गई है और न ही सर्दी से बचाव के कोई इंतजाम है। जबकि तीन दिन पूर्व ही इस गौशाला को 42 हजार रुपये का बजट जारी किया है। शुक्रवार को हुई तेज बारिश और भीषण ओलावृष्टि से रात में आधा दर्जन गौवंशो की मौत हो गई है। जैसे ही इनकी मौत की सूचना प्रशासनिक अधिकारियों को हुई तो उन्हें आनन फानन में नहर के पास गड्ढा कर दफना दिया गया है। इससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। वही ग्रामीणों की माने तो दो दिन के अंदर एक दर्जन से अधिक गौवंशो की भूख प्यास से मौत हो चुकी है। 

ग्राम पंचायत की उदाशीनता का शिकार हो रहे गौवंश

कुसमिलिया। मुहम्मदाबाद गौशाला गौवंशों के लिए नासूर बन गई है। आयेदिन इस गौशाला में गौवंशो की भूख प्यास से मौत हो चुकी है। मगर आज तक इस गौशाला में अन्ना मवेशियों के लिए कोई व्यवस्था नही की गई है। यहां तक कि नियुक्त गौरक्षक भी कही नजर नही आते है।

गौशाला में चहुंओर पसरी गंदगी

कुसमिलिया। इस गौशाला की दुर्दशा इतनी बद से बत्तर है कि यहां पर केवल गौवंशो के मल मूत्र के अलावा कुछ नजर नही आता है। चारो तरफ कीचड़ ही कीचड़ दिखाई दे रहा है। ऐसे में गौवंश कैसे सुरक्षित रह सकते है।

तीन दिन पहले गौशाला को मिला था 42 हजार का बजट

कुसमिलिया। एक सप्ताह पूर्व ही बीडीओ डकोर के निरीक्षण में खामियां मिली थी। इस पर उन्होने पंचायत सचिव और ग्राम प्रधान को फटकार लगाई थी। साथ ही व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे। साथ ही गौशाला की साफ सफाई के लिए भी आदेश दिए थे। इसके बाद उन्होंने व्यवस्था को दुरूस्त करने के लिए ग्राम पंचायत को 42 हजार का बजट जारी किया था।

क्या कहते है जिम्मेदार

कुसमिलिया। मुहम्मदाबाद गौशाला को लेकर समाचार पत्र ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। उस खबर को संज्ञान में लेकर गौशाला को देखा था। जहां पर गौवंशांे के लिए कोई खास व्यवस्था नही थी। न ही मवेशियों के लिए चारे की व्यवस्था थी और न ही साफ सफाई थी। इसके बाद प्रधान ने बताया था कि बजट नही है इसलिए व्यवस्था नही सुधारी जा सकती है। इसके बाद ही 42 हजार रुपये का बजट दिया था। अगर इसके बाद भी गौवंशों की मौत हो रही है तो वह इस मामले की जांच करवाएंगे।

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