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कर्म से ही प्राप्त होता है फल: अवधूत

उपदेश देते स्वामी अवधूत महाराज

बबेरू। मौनी धाम में आयोजित दिन दिवसीय विशाल भंडारा प्रारम्भ होने से पहले स्वामी अवधूत महाराज ने श्रमदानी सेवको को संदेश देते हुए कहा कि कर्म से ही फल प्राप्त होते है। मनुष्य को अच्छे कर्म करना चाहिए।

पौराणिक अवधूत आश्रम मौनी धाम में विगत वर्षो की तरह इस वर्ष भी 15,16 व 17 दिसम्बर को आयोजित विशाल भंडारा की पूर्ण तैयारी होने पर स्वामी अवधूत महाराज ने श्रमदानी स्वयंसेवको को उपदेश देते हुए बताया कि संसार में सब दुखों का नाश करने के लिए मनुष्य को अच्छे कर्म करने के अलावा कोई दूसरा मार्ग नही है। संसार रूपी खजाने में ऐसा कोई रत्न नही है। दो धर्मानुसार कर्म करने से शुभ परिणाम न प्राप्त हो। तीनों लोको में ऐसा पदार्थ नही है, जो कर्म करने से प्राप्त न किया जा सके। जो जिस पदार्थ को पाने के लिए प्रयत्नशील होकर कर्म करता है, उसको वह वस्तु अवश्य प्राप्त होती है। इसमें कोई शंशय नही है। कर्म भी दो प्रकार के होते है। धर्मानुसार व अधर्मानुसार। जो जिस मार्ग पर चलकर कर्म करता है। उसी प्रकार उसको फल प्राप्त होते है। महाप्रतापी रावण को अधर्म एवं दुराचार के चलते समूचे परिवार सहित नाश होना पडा। वही धर्मानुसार कर्म करने पर मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम की पूरे जगत में पूजा होती है। संत तुलसीदास ने भी लिखा है कि कर्म प्रधान विश्व रचि राखा। स्वामी अवधूत महाराज ने कहा कि अच्छे कर्म करो और उत्तम फलों की प्राप्ति करो।

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