Latest News

पुलिसिया कहानी कोर्ट में फेल, किशोर ने काटी सजा, बरी हो गया बालिग आरोपित

बच्ची से दुष्कर्म व हत्या से जुड़े मामले में पुलिस की लापरवाही उजागर हुई।...
कानपुर गौरव शुक्ला:- पुलिसिया कहानी का यूं तो कोई जोड़ नहीं, लेकिन जब इनकी परतें कोर्ट में खुलती हैं तो कई बार हैरानी होती है। दुष्कर्म और हत्या की एक ऐसी ही कहानी पर एक किशोर को तीन साल की सजा हो गई, लेकिन बालिग निर्दोष साबित हो गया।

बच्ची की दुष्कर्म के बाद हुई थी हत्या

बचाव पक्ष के अधिवक्ता करीम अहमद सिद्दीकी के मुताबिक, बिठूर के गांव कुकरादेव की साढ़े चार वर्ष की बच्ची 16 मई 2015 की शाम लापता हुई थी। अगली सुबह 8:30 बजे घर के सामने के तालाब में शव मिला। पिता ने गांव के मनीष व एक किशोर पर दुष्कर्म व हत्या का शक जताया। बच्ची के बड़े भाई ने बयानों में कहा कि बहन के साथ मनीष की दुकान पर टॉफी लेने गया था तो उसे टॉफी देकर भगा दिया था और बहन को रोक लिया। यह बात मम्मी-पापा को बताई भी थी।

मनीष ने कर लिया था इकबाल

मृतका के भाई के इस बयान पर दोनों आरोपित पकड़े गए थे। मनीष ने इकबाल किया कि किशोर दोस्त व उसने दुष्कर्म किया। फिर, गला दबाया और मरा समझकर तकिया में रखकर तालाब में फेंक दिया।Ó तत्कालीन सीओ कल्याणपुर पवित्र मोहन त्रिपाठी ने आरोप पत्र दायर कर दिया। केस लडऩे में लाचार किशोर ने तभी गुनाह कुबूल कर लिया। किशोर न्याय बोर्ड से तीन साल की सजा हो गई।

मनीष को बरी किया

मनीष का केस एडीजे कोर्ट में चला। बकौल अधिवक्ता, बच्ची की हत्या नहीं हुई। वह तालाब किनारे शौच को गई थी। पैर फिसलने से डूब गई। शव उतराया तो पता लगा। दलील से संतुष्ट कोर्ट ने मनीष को बरी कर दिया। इसलिए भी कि बच्ची के फेफड़ों में कीचड़ मिला था। मौत भी डूबने से बताई गई। निजी अंगों या शरीर में न चोट थी, न दुष्कर्म की पुष्टि हुई।

पुलिस इनका नहीं दे पाई जवाब

-मनीष परचून की दुकान नहीं, बल्कि सैलून चलाता था।

-मनीष के घर के आगे भी तालाब था। फिर, वादी के घर के सामने वाले तालाब में शव क्यों फेंका।

-जिस बोरी में तकिया सीज किया गया था, उसे जब कोर्ट में खोला गया तो तीन जोड़ी जूते चप्पल निकले।

No comments