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भागवत कथा के तीसरे दिन ध्रुव चरित्र का किया वर्णन

फतेहपुर, शमशाद खान । शहर के गाजीपुर बस स्टॉप स्थित अशोक नगर धान मील परिसर में आयोजित संगीतमय भागवत कथा के तीसरे दिन जमकर भक्ति रस की बयार बही। बड़ी संख्या में धानमील परिसर में महिलाओं एवं पुरुषों ने पहुंचकर भागवत कथा का आंनद लिया। आचार्य विधा सागर शुक्ल ने ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि बालक को सही संस्कार मां से ही प्राप्त होते है। सुनीति जैसी माता ने बचपन से ही ध्रुव का मार्गदर्शन किया। माता के संस्कार तथा संत नारदजी के सत्संग से पांच वर्ष की आयु में ही धु्रुव जी ने कठोर
भागवत कथा में हिस्सा लेंती श्रद्धालु महिलाएं।  
तपस्या की और छः महीने में ही भगवान का दर्शन प्राप्त किया। छत्तीस हजार वर्ष तक सुशासन करने के बाद अटल पद को प्राप्त किया। भरत जी का चरित्र वर्णन करते हुए आचार्य ने बताया कि साधना के मार्ग में अति सावधानी की आवश्यकता है। हिरनी के बच्चे की संगति से मोह ग्रस्त मीतु जी के अगले जन्म में हिरन बनना पड़ा। भक्ति में संसार को मन से हटना पड़ेगा। मन ही बन्धन कराता है तथा मन ही मोक्ष दिलाता है। अतः मन पर नियंत्रण करने से ही भक्ति हो सकती है। इस मौके पर मधुसूदन दीक्षित, भोला मिश्रा, पीएस शुक्ला, उमाकांत द्विवेदी, राम सुहावन तिवारी, पप्पू शुक्ला, पप्पू अग्निहोत्री, सोनू गुप्ता, दीपक मिश्रा, आदि रहे। वही भगवत सुनने के पश्चात भकतो को प्रसाद वितिरत किया गया।

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