Latest News

जबरदस्त ठंड से जनजीवन अस्त-व्यस्त

बेजुबानों की आफत, आग जलाकर ठंड से बचाव कर रहे लोग 
सरकारी अलावों का अता-पता नहीं, राहगीर भी ठिठुर रहे 

बांदा, कृपाशंकर दुबे । दिसंबर माह के दिन जैसे-जैसे गुजर रहे हैं, वैसे-वैसे ठंड बढ़ती जा रही है। पहाड़ी इलाकों में हो रही बर्फबारी से जहां पहाड़ों ने सफेद चादर ओढ़ ली है वहीं पहाड़ी इलाकों से छनकर आने वाली ठंडी हवाओं ने ठंड में इजाफा कर दिया है। इसके अलावा जनपद में विभिन्न स्थानों पर हो रही ओलावृष्टि का
ठंड के चलते प्रतिदिन दम तोड़ रहा गोवंश 
असर भी मौसम पर पड़ा है। ओलावृष्टि से गलन बढ़ गई है। ठंडी हवाओं ने लोगों को सिकुड़ने पर मजबूर कर दिया है। दिसंबर माह में प्रतिदिन तापमापी पारे की सुई लुढ़कती चली जा रही है। शनिवार को तापमान 22 डिग्री सेल्सियस अधिकतम रेकार्ड किया गया। ठंड में इजाफा होने से लोग किसी तरह से अलाव जलाकर बदन
सेंककर ठंड से बचाव कर रहे हैं। सरकारी तौर पर अभी अलाव नहीं जलवाए गए हैं। शाम ढलते ही राहगीरों को ठिठुरना पड़ रहा है। आम आदमी तो किसी तरह ठंड से अपना बचाव कर रहा है लेकिन सबसे ज्यादा मुसीबत बेजुबान मवेशियों की है जो अपना दर्द किसी से बयां नहीं कर सकते हैं। वर्तमान समय में प्रतिदिन गांवों में बेजुबान मवेशी दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। जनपद के विभिन्न स्थानों पर संचालित गौशालाओं में महज खानापूरी
कागज जलाकर आग से बदन सेंक रहे हैं लोग 
की जा रही है। गौवंश प्रतिदिन दम तोड़ रहा है। बावजूद इसके अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। इधर, ठंड को लेकर प्रशासनिक मशीनरी भी फिलहाल सुस्त नजर आ रही है। शनिवार की सुबह पूरी तरह से कोहरे से ढकी रही। पूरा दिन सूर्य भगवान के दर्शन लोगों को नहीं हो सके। इससे ठंड के साथ ही गलन में इजाफा हो गया है। शनिवार को पारा लुढ़ककर 22 डिग्री सेल्सियस अधिकतम रेकार्ड किया गया। जबरदस्त ठंड से लोग तो किसी तरह से अपना बचाव कर रहे हैं, लेकिन बेजुबान मवेशियों की आफत है। प्रतिदिन बेजुबान गोवंश और अन्य मवेशी दम तोड़ रहे हैं। 

No comments