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पौष अमावस्या में उमड़े लाखों आस्थावान

गलनभरी ठंड की परवाह किए बगैर लगाई मंदाकिनी में डुबकी

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। पौष मास की अमावस्या पर्व पर लाखों श्रद्धालुओं ने देवगंगा मंदाकिनी में स्नान कर मत्यगयेन्द्रनाथ मंदिर में शंकर भगवान का जलाभिषेक कर कामदगिरि की परिक्रमा की। चित्रकूट परिक्षेत्र के विभिन्न धार्मिक स्थलों का दर्शनार्थियों ने भ्रमण किया। यूपी-एमपी सीमा पर बसी धर्मनगरी में लगने वाले मेला दौरान श्रद्धालु विभिन्न ट्रेन, बसों व निजी वाहनों से धर्मनगरी आये।

    पौष मास की अमाावस्या मेले में लाखों श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी में डुबकी लगाई। सवेरे से ठिठुरन भरी ठंड में आस्थावनों ने स्नान कर परिक्रमा लगाई। मेले में सैकड़ों बसे व चार पहिया वाहनों से पार्किंग स्थल भरे रहे। कामदगिरि के आसपास आस्थावानों की अपार भीड़ परिक्रमा मार्ग में रही। मंदाकिनी तट रामघाट में दिन-रात मेला चला। इस दौरान पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की सतर्क नजर बनी रही। वहीं अमावस्या मेला के लिये जिला प्रशासन ने पूर्व से तैयारियां पूर्ण कर ली थी। यूपी-एमपी क्षेत्र के पांच कोसी मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं ने लेटी परिक्रमा लगाई। ठंड के बावजूद आस्थावानों की आस्था नहीं डिगी। हालाकि अपरान्ह बाद हल्की धूप निकलने से श्रद्धालुओं ने राहत की सांस ली। जिलाधिकारी शेषमणि पाण्डेय व पुलिस अधीक्षक अंकित मित्तल ने भ्रमण कर मेला ड्यूटी में लगे सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को निर्देश देते रहे। जिससे मेला क्षेत्र में किसी प्रकार की अनहोनी नहीं हो सकी। मेले में कामदगिरि की परिक्रमा तो लाखों श्रद्धालु लगाते हैं लेकिन हजारों श्रद्धालु ऐसे हैं जो लेटकर पंच कोसी परिक्रमा लगाते हैं। इसके बादं बांके सिद्ध, देवांगना, पंपापुर, सीता रसोई, हनुमानधारा, मत्यगेंद्रनाथ, कामतानाथ, रामशैय्या सहित भरतकूप आदि स्थानों पर श्रद्धालुओं ने जाकर दर्शन किये। इन सभी स्थानों पर श्रद्धालु मत्था टेकने पहुंचे और अपनी मन्नते मांगी। मेला के दौरान मेला स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया गया था। चित्रकूट धाम कर्वी स्टेशन में सुरक्षा के मद्देनजर सीसीटीबी कैमरे लगे रहे। श्रद्धालु कामतानाथ के जयकारे लगाते हुए गंतव्य की ओर रवाना हुये। किसानों ने अच्छी फसल के लिये मन्नते मांगी। समाजसेवियों ने जगह-जगह भण्डारे के आयोजन किये।

सूर्यग्रहण के चलते मंदिरों के बंद रहे कपाट
चित्रकूट। पौष मास की अमावस्या गुरुवार को हाड़कंपाऊ ठंड के चलते आस्थावानों की आस्था भारी पड़ी। लाखों आस्थावान भयंकर गलन में भी मंदाकिनी नदी में सूर्यग्रहण के पूर्व और बाद में डुबकी लगाते देखे गए। ग्रहण के पूर्व से शूदक होने पर श्रद्धालुओं ने मठ-मंदिरों के पट बंद होने के बावजूद कामदनाथ की परिक्रमा लगाई। तत्पश्चात लगभग साढ़े ग्यारह बजे से मंदाकिनी नदी में पुनः स्नान का सिलसिला प्रारंभ हुआ। मत्यगयेन्द्र शंकर भगवान के जलाभिषेक बाद कामतानाथ प्रमुख द्वार में भगवान श्रीराम, लक्ष्मण व मां जानकी के दर्शन कर परिक्रमा की। 

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