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बेटियों की सुरक्षा के लिए अधिवक्ताओं ने बढ़ाये कदम

फतेहपुर, शमशाद खान । समूचे देश में बेटियों के साथ हो रहे बलात्कार व हत्या से विरोध के स्वर लगातार उठ रहे हैं। वहीं बेटियों की सुरक्षा के लिए अधिवक्ताओं ने भी अपने कदम आगे बढ़ा दिये हैं। बुधवार को सिविल अधिवक्ता मंच के पदाधिकारियों ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री व बार कौंसिल अध्यक्ष को ज्ञापन भेजकर कड़े कानून बनाये जाने की आवाज उठायी है। 
एसडीएम को ज्ञापन देने जाते अधिवक्ता।  
सिविल अधिवक्ता मंच के प्रान्त संयोजक आरपी मौर्य एडवोकेट की अगुवई में अधिवक्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे और उपजिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री व बार कौंसिल के अध्यक्ष को एक ज्ञापन भेजा। जिसमें कहा गया कि लोकतांत्रिक प्रणाली में कानून को हाथ में लेना विकृत मानसिकता होती है। देश की न्याय पालिका में बड़ी ताकत है। लेकिन विगत 70 वर्षों में निःसंदेह न्याय पालिका व उससे जुड़े लोग ढीले हो चुके हैं। जिसका परिणाम पूरा देश भोग रहा है। मांग किया कि ऐसा कानून लाया जाये कि अपराध जगत का फैसला तीन माह व अन्य सिविल वादों में एक वर्ष में अन्तिम निर्णय हो तभी भारत की नारियों एवं नागरिकों को राहत मिलेगी। ाााकहा कि कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद कमजोर साबित हुए हैं। किसी अन्य व्यक्ति को कानून मंत्री बनाकर उनके सहयोग हेतु जिला न्यायालय के प्रैक्टिसिंग अधिवक्ताओं की टीम संशोधन के उपाय हेतु बनाई जाये। फास्ट ट्रैक कोर्ट, पास्को कोर्ट आदि पर जब तक सुपरविजन प्रणाली लागू न होगी तब तक ऐसे सब न्यायालय आरामगृह साबित होंगे। इसलिए टाइमबाउण्ड के साथ कार्यों का निरीक्षण आवश्यक है। आंध्र प्रदेश पुलिस कार्रवाई पर जनता व मीडिया उनकी पीठ ठोंक रही है और हम सब न्याय पालिका व उससे जुड़े लोगों की किरकिरी हो रही है। जो भविष्य के लिए अच्छे लक्षण नहीं है। इस मौके पर राजेश कुमार मौर्या, मुस्तकीम बेग, अयोध्या प्रसाद, छेदीलाल, अमित, अजय कुमार, रामलाल, अरूण मौर्य, सुनील गुप्ता, सागर कुमार मौर्य, चन्द्र कुमार, सुनील गुप्ता, प्रदीप कुमार मौर्य, रामशरण यादव, रामनरेश, मो0 इसरार, राजकुमार, हेमन्त कुमार, राम औतार, लक्ष्मी देवी, हरिहर प्रसाद, दिनेश मौर्य आदि मौजूद रहे। 

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