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अकीदतो मोहब्बत के साथ निकला जुलूस-ए-गौसिया

हिन्दू भाइयों ने भी जुलूस में की शिरकत, दिखी आपसी सौहार्द की झलक 

बांदा, कृपाशंकर दुबे । शहर में सोमवार को 11वीं महीने की 11 तारीख के मौके पर शेख अब्दुल कादिर जिलानी रहमतुल्ला अलेह (बड़े पीर साहब) की याद में जुलूस-ए गौसिया निकाला गया। यह जुलूस छिपटहरी स्थित दरगाह खानकाह शरीफ के सामने से लगभग तीन बजे उठाया गया। केंद्रीय कमेटी के संरक्षक और पदाधिकारियों के द्वारा हरी झंडी दिखाकर इस जुलूस-ए-गौसिया को रवाना किया गया। ये जुलूस-ए-गौसिया अपने निर्धारित रास्तों मर्दननाका, मनोहरीगंज, डीएवी इंटर कालेज चैराहा, पत्थरफोड़ बाबा दरगाह, जिला परिषद चैराहा, गोल कोठी, सट्टन चैराहा, हाथीखाना, ईदगाह, अमर टाकीज चैराहा, गूलरनाका, छावनी, सब्जी मंडी, कोतवाली रोड होता हुआ वापस खानकाह शरीफ के सामने पहुंचा। जहां सलातोसलाम के साथ-साथ मुल्क में अमनोअमान की दुआ की गई। 

जुलूस-ए-गौसिया में शामिल अकीदतमंद 
मालुम हो कि ये ग्यारहवीं का महीना गौसुल आजम शेख अब्दुल कादिर जिलानी बड़े पीर साहब के नाम से जाना-पहचाना जाता है। रवायतों के मुताबिक बड़े पीर साहब ने अपने जमाने में पैगंबरे इस्लाम के नाम पर ग्यारहवीं के महीने की 11 तारीख को नजरो नियाज कराई थी। लिहाजा अब बड़े पीर साहब के मामने वाले पूरी दुनिया में इस दिन बड़े पीर साहब के नाम पर बड़े पैमाने पर लंगर करते हैं। जगह-जगह पर देगें चढ़ाकर उनके नाम से लंगर किए जाते हैं। यह सिलसिला पूरे माह चलता है। खासतौर से ग्यारहवीं की 11 तारीख को लगभग सभी उनके मानने वालों के घरों पर उनके नाम की फातिहाख्वानी होती है। लोग अपनी हैसियत के मुताबिक नजरो न्याज करते हैं। लंगर करते हैं और यह सिलसिला लगभग पूरे माह चलता रहता है। सोमवार को ग्यारहवीं के 11 तारीख के मौके पर खुद्दामे गौसो ख्वाजा कमेटी के जानिब से एक भारी भरकम जुलूस-ए-गौसिया निकाला गया। इस जुलूस-ए-गौसिया में हरे, फिरोजी झंडों के साथ-साथ तिरंगे झंडे को भी शामिल किया गया। जिससे इस जुलूस-ए-गौसिया में भी देश भक्ति का रंग देखने को मिला। इस जुलूस-ए-गौसिया में तरह-तरह की झांकियां बनाई गईं और गगनचुंबी झंडे बनाकर इस जुलूस में शामिल किए गए। या गौस अल मदद की सदाओं के साथ ये जुलूस छिपटहरी स्थित खानकाह शरीफ के सामने से उठाया गया। रास्ते में जगह-जगह अकीदतमंदों के द्वारा इस जुलूस का इस्तकबाल किया गया। जुलूस पर फूलों की बारिश की गई। लोगों ने जुलूस पर लंगर किया। किसी ने पानी, किसी ने चाय काफी, किसी ने लड्डू आदि के लंगर किए। यह जुलूस अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ पूरे शहर में घूमा। देर शाम यह जुलूस वापस दरगाह खानकाह शरीफ के सामने पहुंचा, जहां सलातोसलाम पढ़ा गया और मुल्क में अमनोअमान की दुआएं मांगी गईं। जुलूस और लंगर में हिंदू भाइयों ने भी शामिल होकर आपसी सौहार्द की मिशाल पेश की। इस जुलूस-ए-गौसिया में मरकजी कमेटी के सरपरस्त हबीब बाबा, अध्यक्ष मौलाना शफीकुद्दीन, उपाध्यक्ष सैयद अख्तर अली, मीडिया प्रभारी सैयद इमरान अली, आसिफ, मतीन, अब्दुल रहमान, कादिर, अफजाल, शीबू न्याजी, गौसुल इमरान, बरकत अली, मेराज अहमद, हस्मती, रईस खान, मेराज अली, मोहम्मद मतीन, शारिक, अब्दुल रब, मो. नासिर, शादाब सिद्दीकी, मुवीन वारसी, मोहम्मद शाहरुख इत्यादि ने सहयोग किया। 

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