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बलात्कार एक गंभीर समस्या....

 दिनेश प्रताप सिंह राठौर 
(वरिष्ठ पत्रकार)

 भारत देश में एक एक अरब 25 करोड़ से अधिक आबादी है परंतु यहां पर विकास तो हुआ है परंतु इतना विकास नहीं हुआ जितना विकास चीन का जर्मनी का फ्रांस का रूस का अनुभव से देश है जैसे इजराइल और छोटे छोटे से देश हैं जो आज विश्व में एक महाशक्ति के रूप में बने हैं यहां पर कानून की सख्त है यहां पर कोई भी अपराधी हो या अभी कोई भी बलात्कारी हो उसे सख्त कानून से निर्णय देकर समाज के सामने एक ऐसा संदेश लाया जाता है कि दोबारा कोई ऐसी हिमाकत करने की हिम्मत ना करें। हम भारत में देखते रहते हैं कि बहुत सारे बलात्कार की बातें सामने आती है ऐसा क्यों हमारा समाज किस हद तक चला गया है वह इंसान के रूप में शैतान बन गया है छोटी-छोटी बच्चियों जो नवोद उनके साथ दुष्कर्म करने की हिम्मत कैसे जुटा लेते हैं। आए दिन इस तरह की घटनाएं होती रहती हैं पर सरकार जब घटनाएं हो जाती है। तब सक्रिय होती है हां पूरा देश एवं मीडिया इतना सक्रिय हो जाता है कि अब देश में कोई भी बलात्कारी नहीं रह पाएगा, परंतु कुछ दिनों

बाद सब ठंडे बस्ते में चला जाता है यहां पर न्यायपालिका इतनी शिथिल है की एक मुकदमा जय गंभीर मसले का हो किसी भी का हो बरसों का सीखते रहते हैं अपराधी मस्त रहता है जमानत पर छूट जाता है। क्योंकि यहां का कानून सबूत मांगता है और सबूतों कोई खट्टा करने में एक गरीब आदमी एक कमजोर आदमी बड़े लोगों के सामने छोटा पड़ जाता है और अपराध की दुनिया में अपराधों की सीमा बढ़ती रहती है। तेलंगना राज्य में हैदराबाद में जो घटना घटित हुई जिस तरह बलात्कार करके मारा गया यह बेहद शर्मनाक घटना है इस पर सरकार कोई भी हो पर इस पर उन अपराधियों को ऐसी सजा देनी चाहिए तो समाज में कैसा संदेश जाए कि वह आगे इस तरह की हरकत ना कर सके। क्योंकि हमारा भारत देश एक धर्मनिरपेक्ष देश है यहां पर सभी धर्मों का सम्मान किया जाता है परंतु कुछ लोग धर्म जाति के नाम पर मनमानी करते हैं और अभद्रता एवं लव जिहाद के नाम से जो कार्य करते हैं वह कभी अपने मकसद में कामयाब नहीं होंगे। क्योंकि बहुत सी ऐसी मिसाले हैं इसी जाधव को ना देखते हुए किसी ने अपने राखी बांधकर भाई का सम्मान दिया इसी ने चाचा भतीजा मामा बनकर बेटी बनकर उसका जीवन सुधारा ऐसी बहुत से बातें आज इतिहास में जमी हुई है   । परंतु हमें कह सकते हैं किए जिस तरह से बलात्कार होते हैं और बलात्कार करने वालों को कानून तुरंत निर्णय दे क्योंकि इनको चौराहे पर खड़ा होकर इनको सजा-ए-मौत देनी चाहिए क्योंकि इस तरह के अपराध जब हो जाते हैं तो हफ्ते 1 मीडिया में और सरकार बहुत तेज कार्य करती है बाद में सब ठंडे बस्ते में कानून के हाथ में चले जाते हैं। जहां पर न्यायिक प्रक्रिया बहुत ही शिथिल है । हमें दुख होता है एक छोटी मासूम बच्चियों को साथ यह लोग जिस तरह का घिनौना कार्य करते हैं इन्हें शर्म नहीं आती है यह ईश्वर से नहीं डरते हैं यह अपनी मौत से नहीं डरते हैं यह कल आने वाले समय से नहीं डरते हैं। ऐसे लोग जब हकीकत सामने मौत दिखाई देती है तब इनके समझ में आता है कि मैंने जो किया अघोर पाप है वह सबक इनको मिलना जरूरी है। इसमें राजनीति ना होकर दोषियों को सख्त सजा मिले। लेकिन मैं एक बात निवेदन के साथ सभी से कहना चाहता हूं कि आजकल अभिभावक भी अपने बच्चों के साथ पूर्ण जिम्मेदारी तो रखता है।।पर्वतीय नहीं देखते हैं बच्चे हमारे क्या कर रहे हैं कहां जा रहे हैं किस हाल में है सिर्फ पैसा देकर पढ़ाई करना मकसद नहीं होना चाहिए। बच्चे किस दिशा और दशा में जा रहे हैं यह वालों को समय निकालकर देखना चाहिए। तथा हमारा समाज आज के पहनावा जो चल रहा है उस पहनावे में भी बदलाव होना चाहिए। आप किसी पार्टी में जाते होंगे वहां पर पुरुष महिला के  वस्त्रों  में कितन अंतर पाएंगे भयानक सर्दी होगी पुरुष पूरे सूट-बूट से पूरा शरीर ढाका होगा वही महिला को देखा जा सकता है। इसलिए हर बेटी बहन को चाहिए की पहनावा अच्छा रखें जिससे समाज में बहार एक अच्छा संदेश जाए मैंने यह बात इसलिए लिखी है क्योंकि यह समाज में आप सभी देखते हैं हम आप सभी अभिभावकों को इस पर ध्यान देने की जरूरत है।

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