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सीटी स्कैन का रोगी के शरीर पर पड़ता है प्रतिकूल प्रभाव

एक बार सीटी स्कैन = चार सौ एक्सरे

बिजनौर (संजय सक्सेना) एक बार सीटी स्कैन कराते समय रोगी के शरीर पर जितना प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है उतना विकीरण का प्रतिकूल प्रभाव चार सौ एक्सरे कराने के बाद पड़ता है, इसीलिए आवश्यक होने पर ही सीटी स्कैन कराया जाये, यह कहना है मुख्य चिकित्साधिकारी डा. विजय कुमार यादव का. 
रोगी के शरीर पर विकीरण के दुष्प्रभाव को लेकर जिला चिकित्सालय में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला में जिले के समस्त चिकित्सा अधीक्षक व प्रभारी चिकित्साधिकारी शामिल हुए. इस मौके पर सीएमओ ने कहा जिला चिकित्सालय में प्राय: सीटी स्कैन मानक से ज्यादा हो रहे है. सीटी स्कैन से एक्सपोजर


ज्यादा होता है और मरीज के शरीर पर विकीरण का प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. उन्होंने जनपद के समस्त चिकित्सकों से जिला चिकित्सालय में सिटी स्कैन के लिए मरीज तभी संदर्भित करने को कहा जब ऐसा किया जाना नितांत आवश्यक हो, क्योकि एक बार सीटी स्कैन किये जाने के समय मरीज के शरीर पर विकीरण का जितना प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, उतना चार सौ एक्सरे किये जाने के बाद पड़ता है. उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी रमाकांत पांडेय ने भी सीटी स्कैन के बारे में इसी प्रकार की सहमति जताई है. जिला चिकित्सालय के अधीक्षक डा. ज्ञानचंद ने कहा चिकित्सक रोगी की बेसिक जाँच कराये बिना सीटी स्कैन के लिए संदर्भित ना करे, वर्तमान में जिला चिकित्सालय में औसतन सौ सीटी स्कैन प्रतिदिन किये जा रहे हैं. कार्यशाला में सीटी स्कैन के नोडल डा.बीआर त्यागी, रेडियोलॉजिस्ट डा. आरएस त्यागी, डेन्टल सर्जन डा. ओपी सिंह, सर्जन डा. नरेश जौहरी, डा. अरुण कुमार पांडेय,  ऑर्थोपैडिक सर्जन डा. संजय कुमार. डा. याग्यवेन्द्र के अलावा जिले भर के प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के प्रभारी शामिल हुए.  

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