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एनीमिया मुक्त भारत अभियान संवेदीकरण कार्यशाला

सभी स्कूलों में खिलाई जाएंगी आयरन की गोलियां
बच्चों के साथ अध्यापक भी खाएंगे आयरन की गोलियां 
विभन्न प्रतियोगिताओं के जरिये होगा बच्चों का संवेदीकरण  

बांदा, कृपाशंकर दुबे । एनीमिया (खून की कमी) के प्रति आम लोगों में जागरुकता बढाने के लिए जनपद में 2 दिसंबर से 31 मार्च तक ‘एनीमिया मुक्त भारत’ अभियान चलाया जा रहा है जिसके तहत व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ-साथ सभी सरकारी स्कूलों में हर सोमवार को बच्चों को आयरन की गोली खिलाई जानी है। इसी सम्बन्ध में आज बुधवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी सभागार में जनपद के समस्त माध्यमिक विद्यालयों और इंटर कालेजों के प्रधानाध्यापकों के लिए संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। 
कार्यक्रम के दौरान नोडल अधिकारी डा. आर के सचान ने एनीमिया के मुद्दे पर चर्चा करते हुए बताया कि
कार्यशाला को संबोधित करते सीएमओ 
अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज में खून की कमी से ग्रसित शून्य से 19 वर्ष तक के किशोर-किशोरियों और गर्भवती व धात्री महिलाओं में प्रतिवर्ष 3 फीसदी की गिरावट लाना है। अभियान के तहत सभी प्राथमिक, माध्यमिक व इंटर कालेजों के बच्चों को चार हफ्ते तक प्रति सोमवार को आयरन की गुलाबी या नीली गोली अध्यापकों की निगरानी में दी जाएगी। उन्होंने सभी शिक्षकों से कहा कि इस गतिविधि के लिए वे अपने-अपने विद्यालय में दो नोडल अधिकारी नियुक्त करें। सभी नोडल शिक्षक सम्बंधित पीएचसी का नंबर अपने पास रखें। कभी-कभी आयरन की गोली खाने से बच्चों को पेट दर्द, जी मचलाने जैसे लक्षण हो सकते हैं, ऐसे में तुरंत सम्बंधित पीएचसी से संपर्क करें। साथ ही उन्होंने सभी शिक्षकों को निर्देश दिए कि कार्यक्रम की शुरुआत में शिक्षक स्वयं आयरन की गोली का सेवन करें जिससे बच्चे भी गोली लेने के लिए प्रोत्साहित हो सकें। इसके अलावा खेल-खेल में विभिन्न गतिविधियों जैसे पोस्टर प्रतियोगिता, लघु नाटिका, रेसिपी प्रदर्शन आदि द्वारा बच्चों को एनीमिया के बारेमें जागरुक कर उन्हें इससे बचने के टिप्स भी दिए जाएं। 
यूनीसेफ के ब्लाक मोबिलाइजेशन अधिकारी रामसहाय स्वरूप ने बताया कि कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को गुलाबी रंग की गोली, कक्षा 6 से 12 तक के बच्चों को नीले रंग की गोली और गर्भवती महिलाओं को लाल रंग की गोली देने के प्रावधान है। कार्यक्रम में आयुष्मान भारत योजना के जिला समन्वयक डा. धीरेन्द्र वर्मा ने समस्त शिक्षकों को योजना के बारे में बताकर उन्हें इसका प्रचार करने में सहयोग देने की अपील भी की जिससे ज्यादा से ज्यादा पात्र लाभार्थियों को इसका लाभ मिल सके। कार्यक्रम में आरबीएसके मैनेजर वीरेन्द्र प्रताप और अकाउंट असिस्टेंट राजू साहू भी मौजूद रहे। 

क्या है एनीमिया और उसके लक्षण
बांदा। डा. आरके सचान ने बताया कि शरीर में एनीमिया या खून की कमी तब होती है जब रक्त में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से काफी कम हो जाता है। इस तरह की स्थिति को मेडिकल भाषा में आयरन की कमी भी कहते है। किशोरियों के रक्त में सामान्य हीमोग्लोबिन का स्तर 12 ग्राम तथा किशोरों में सामान्य हीमोग्लोबिन का स्तर 13 ग्राम होना चाहिए। एनीमिया से ग्रसित व्यक्ति को थकान, सिर दर्द व कमजोरी महसूस होती है, उसके दिल की धड़कन तेज या अनियमित हो सकती है, विशेषकर शारीरिक गतिविधि के समय उसे सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर काफी कम होने से त्वचा भी पीली दिखाई देती है।  

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